आगरा उत्‍तर विधानसभा सीट - Agra

आगरा उत्‍तर

वर्तमान विधायक
श्री पुरूषोत्तम खण्‍डेलवाल
जिला
Agra
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
आगरा
आगरा उत्तर विधानसभा सीट प्रोफाइल 
आगरा उत्तर विधानसभा शहरी, व्यावसायिक और वैश्य समाज के दबदबे वाली आगरा शहर की सबसे अहम सीटों में गिनी जाती है। 1985 से लगातार भाजपा के कब्जे में रहने, वैश्य उम्मीदवारों के ही जीतते रहने और थोक–खुदरा व्यापार, सर्राफा, कपड़ा मंडियों के असर के कारण इसे भाजपा का अभेद्य गढ़ कहा जाता है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: आगरा,
विधानसभा क्रमांक: 89
लोकसभा क्षेत्र: आगरा लोकसभा क्षेत्र
आरक्षण: सामान्य (अनारक्षित) सीट
अनुमानित आबादी: 4,37,969
साक्षरता दर: 70 प्रतिशत 
लिंग अनुपात: लगभग 880-900 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
धार्मिक और सामाजिक विभाजन 
हिंदू: 80 %
मुस्लिम:15 %
अन्य समुदाय: 1-2 %
अनुसूचित जाति: 18-22 %
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान 
आगरा उत्तर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास देखें तो 1977 में डॉ. प्रकाश नारायण गुप्ता (कांग्रेस) और 1980 में ओम प्रकाश जिंदल (कांग्रेस) जीते थे। लेकिन 1985 के बाद से यहां भाजपा का लगातार दबदबा बना हुआ है। 1985 में सत्य प्रकाश विकल ने करीब 45% वोट शेयर के साथ जीत दर्ज की और फिर 1989, 1991, 1993 और 1996 में लगातार चार बार भाजपा से चुनाव जीते, जहां उनका वोट शेयर लगभग 50-56% तक रहा। इसके बाद 2002, 2007 और 2012 में जगन प्रसाद गर्ग ने लगातार तीन बार जीत हासिल की, भले ही मुकाबले बहुकोणीय रहे। 2017 में गर्ग ने 1,35,120 वोट और 58.55% वोट शेयर के साथ बड़ी जीत दर्ज की। 2019 के उपचुनाव में उनके निधन के बाद भाजपा के पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने सीट बचाए रखी। 2022 में भी भाजपा ने भारी अंतर से जीत दर्ज की। कुल मिलाकर, 1985 के बाद से करीब चार दशक से यह सीट भाजपा के पास है और वैश्य–व्यापारी समाज के साथ पार्टी की मजबूत पकड़ यहां की राजनीति का मुख्य पैटर्न बन चुकी है।
2022 चुनावी परिणाम (आगरा उत्तर विधानसभा) 
कुल मतदाता: 2,39,144
मतदान प्रतिशत: 55.0%
विजेता: पुरुषोत्तम खंडेलवाल, (भाजपा)
वोट शेयर: 64.3%
उपविजेता: शब्बीर अब्बास (बहुजन समाज पार्टी)
विधायक परिचय और आपराधिक मामला 
पुरुषोत्तम खंडेलवाल वैश्य/अग्रवाल समाज से आने वाले व्यापारी पृष्ठभूमि के नेता हैं और आगरा उत्तर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं। आगरा की सर्राफा, कपड़ा और थोक मंडियों में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है, जो भाजपा के पारंपरिक वैश्य वोट बैंक के साथ मेल खाती है। वे 2019 के उपचुनाव में पहली बार विधायक बने, जब जगन प्रसाद गर्ग के निधन के बाद सीट खाली हुई थी। इसके बाद 2022 में फिर से चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति और मजबूत कर ली।उनके चुनावी हलफनामे या निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड उनके खिलाफ किसी बड़े या गंभीर आपराधिक मामले का साफ उल्लेख नहीं मिलता है।
आगरा उत्तर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे 
आगरा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी चर्चा ज़्यादातर व्यापार और शहरी मुद्दों के आसपास घूमती है। यहां थोक, खुदरा बाजार, सर्राफा, जूता–चप्पल, चमड़ा और कपड़ा कारोबार स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए जीएसटी, नोटबंदी के बाद का असर, ऑनलाइन बाजार से प्रतिस्पर्धा और टैक्स का बोझ बड़े मुद्दे बनते रहे हैं। शहर की तंग गलियां, ट्रैफिक जाम, पार्किंग की कमी, सीवर–नाली, जलभराव और सफाई जैसे सवाल भी हर चुनाव में उठते हैं; स्मार्ट सिटी, सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाओ अभियान पर भी खूब बहस होती है। ताजमहल के कारण पर्यटन से जुड़ी रोज़गार की बड़ी चेन यहां सक्रिय है, इसलिए पर्यटन में गिरावट या सुरक्षा व्यवस्था भी राजनीति का हिस्सा बनती है। कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा “सख्त प्रशासन” की बात करती है, जबकि विपक्ष व्यापारी और युवाओं से जुड़े मामलों में पुलिस रवैये पर सवाल उठाता है। साथ ही वैश्य, हिंदू और मुस्लिम आबादी का सामाजिक समीकरण यहां की राजनीति तय करता है; भाजपा का आधार अक्सर हिंदू–वैश्य एकजुटता पर टिका रहा है, जबकि सपा, बसपा, कांग्रेस मुस्लिम और गैर–वैश्य वर्गों को साथ लाकर चुनौती देने की कोशिश करती रही हैं।

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