आगरा दक्षिण विधानसभा सीट - Agra

आगरा दक्षिण

वर्तमान विधायक
श्री योगेन्द्र उपाध्याय
जिला
Agra
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
आगरा
आगरा साउथ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र प्रोफ़ाइल
आगरा साउथ उत्तर प्रदेश के शहरी केंद्र में स्थित है, जो ताज महल और अन्य ऐतिहासिक स्मारकों का घर है। यह निर्वाचन क्षेत्र आगरा नगरपालिका निगम के कुछ हिस्सों को शामिल करता है। यह सीट परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी और तब से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के योगेंद्र उपाध्याय यहां से विधायक रहे हैं।
- जिला: आगरा
- लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र: आगरा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (एससी वर्ग के लिए आरक्षित)
- विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या: 88
- श्रेणी: सामान्य (अनारक्षित)
- स्थापना: 2008 (सीमांकन के बाद)
जनसंख्या और चुनावी विवरण
- मतदाता (2017): लगभग 348,912 मतदाता
- जनसांख्यिकी: यह निर्वाचन क्षेत्र विभिन्न समुदायों से भरपूर है, जिसमें मुसलमानों के साथ-साथ हिंदू भी शामिल हैं।
- मतदाता भागीदारी: 60-65%
चुनावी इतिहास
2022 विधानसभा चुनाव
- विजेता: योगेंद्र उपाध्याय (BJP)
- मत प्राप्त: 101,815
- दूसरे स्थान पर: विनय अग्रवाल (समाजवादी पार्टी - SP)
- BJP ने तीसरी बार सीट जीती, लेकिन विपक्षी पार्टी के रूप में BSP से SP ने भी अपनी जगह बनाई।
आगरा साउथ विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2012 से लगातार सफलता हासिल की है, जिसमें योगेंद्र उपाध्याय ने हर चुनाव में जीत दर्ज की है। 2012 में BJP ने 74,324 वोटों के साथ जीत हासिल की और BSP को 22,960 वोटों के अंतर से हराया। 2017 में, BJP ने 111,882 वोट प्राप्त किए और अपने विजय अंतर को दोगुना करते हुए 54,225 वोटों से BSP को हराया। 2022 में भी BJP ने योगेंद्र उपाध्याय के नेतृत्व में जीत हासिल की, हालांकि इस बार समाजवादी पार्टी (SP) मुख्य विपक्षी बनकर उभरी, BSP का प्रभाव घट गया। BJP ने सभी चुनावों में 50% से अधिक वोट प्रतिशत प्राप्त किया, जो शहरी भारत में पार्टी के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है।
आगरा साउथ विधानसभा के अहम मुद्दे
आगरा साउथ विधानसभा क्षेत्र को कई समस्याओं का सामना है, जिनमें अव्यवस्थित सड़क नेटवर्क, यातायात जाम, जल आपूर्ति की अनियमितता और अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं। यहां की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर निर्भर है, लेकिन रोजगार के अवसरों का विविधीकरण जरूरी है। जाति आधारित राजनीति प्रभावी है और सुरक्षा-व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। वायु प्रदूषण और यमुना नदी का प्रदूषण भी सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। शैक्षिक और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि लोग अधिकतर निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं।
आगरा साउथ विधानसभा के पिछले पांच साल
आगरा साउथ विधानसभा क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण समस्याएँ उभरी हैं, जिनमें बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे कूड़ा प्रबंधन और पानी की आपूर्ति, आर्थिक और रोजगार से जुड़ी चुनौतियाँ तथा पर्यटन पर अत्यधिक निर्भरता शामिल हैं। जाति और धर्म की राजनीति, सामाजिक सुरक्षा और महिलाओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दे रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी ने नागरिकों को परेशान किया है, जबकि वायु और यमुना नदी प्रदूषण ने पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इन समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
वर्तमान प्रतिनिधि (अप्रैल 2025 तक)
- विधायक: योगेंद्र उपाध्याय (BJP)
- कार्यकाल: 2012–वर्तमान (तीसरी बार, 2022 में चुने गए)
- पृष्ठभूमि: एक प्रमुख BJP नेता, उपाध्याय ने लगातार जीत दर्ज की है और पार्टी की संगठनात्मक ताकत का लाभ उठाकर चुनाव जीते हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
योगेंद्र उपाध्याय, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्य हैं, का जन्म 1955 में आगरा, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने स्नातकोत्तर और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की है। उनका राजनीतिक कॅरियर 2012 से 2022 तक रहा है, जिसमें उन्होंने आगरा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में तीन लगातार कार्यकाल पूरे किए हैं (2012-2017, 2017-2022, और 2022 से वर्तमान तक)। वे उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्यरत हैं और योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में भाजपा विधानमंडल दल के नेता भी रहे। हालांकि, उन्हें नवंबर 2023 में कश्मीर में शहीद हुए सेना अधिकारी के परिवार के प्रति असंवेदनशीलता के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आपराधिक मामला
वर्तमान में योगेंद्र उपाध्याय के खिलाफ कोई प्रमुख आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, लेकिन उन्हें एक भूमि विवाद में आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। एक मौजूदा जानकारी के अनुसार 2012 में 3 मामले, 2017 में 7 मामले और 2022 में कुल 4 मामले लंबित हैं।

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