अनूपशहर विधानसभा सीट - Bulandshahr

अनूपशहर

वर्तमान विधायक
श्री संजय कुमार शर्मा
जिला
Bulandshahr
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
बुलंदशहर
अनूपशहर विधानसभा सीट
अनूपशहर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र भारत के उत्तर प्रदेश विधान सभा के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यह बुलंदशहर जिले का एक हिस्सा है और बुलंदशहर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1952 में हुआ था, जब 1950 में परिसीमन आदेश पारित किया गया था। 2008 में 'संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश' पारित होने के बाद, अनूपशहर को पहचान संख्या 67 सौंपी गई। इसे 'छोटी काशी' कहा जाता है और यह बुलंदशहर जिले की प्राचीनतम सीटों में से एक है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह क्षेत्र गंगा किनारे बसा है और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध माना जाता है।
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 67
जिला: बुलंदशहर
लोकसभा क्षेत्र: बुलंदशहर
स्थापना वर्ष: 1951
आरक्षण: सामान्य
कुल जनसंख्या (2011): 2.5–3 लाख
साक्षरता दर: 70.18 %
धार्मिक और जातीय विभाजन (जनगणना 2011)
मुस्लिम: 25.32%
हिन्दू: 74.23%
ईसाई: 0.07%
सिख: 0.14%
बौद्ध: 0.00%
अनुसूचित जाति: 14.19%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,37,255
विजेता: संजय कुमार शर्मा (भाजपा)
वोट शेयर: 52.9%
उपविजेता: रमेश्वर (रालोद)
मतदान प्रतिशत: 62.9%
1952 से 1962 तक इस क्षेत्र में कांग्रेस का प्रभाव प्रमुख रहा और कुल 17 विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 7 बार जीत दर्ज की। इसके बाद राजनीति में विविधता आई और भाजपा ने 3 बार, बसपा ने 2 बार, जनता दल/जनता पार्टी ने 2 बार, जबकि बीकेडी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक बार जीत हासिल की। 1991 में भाजपा ने पहली बार यहां जीत दर्ज की, जबकि बसपा के गजेंद्र सिंह ने 2007 और 2012 में लगातार दो बार विजय हासिल की। 2017 में भाजपा के संजय शर्मा ने बसपा के गजेंद्र सिंह को भारी अंतर से हराकर पार्टी को 10 साल बाद फिर से इस सीट पर वापसी दिलाई। जातीय समीकरण इस क्षेत्र की राजनीति में बेहद निर्णायक रहे हैं, जहां मुस्लिम और दलित मतदाताओं की संख्या करीब 40% है, वहीं लोध राजपूत 22-25% और ठाकुर, जाट, ब्राह्मण समुदायों की कुल हिस्सेदारी लगभग 30% के आसपास है। यहां किसी भी पार्टी का स्थायी दबदबा नहीं रहा, लेकिन जातिगत और धार्मिक समीकरणों ने हर चुनाव में परिणामों को प्रभावित किया है। हालिया रुझानों में भाजपा का उभार स्पष्ट दिखा है, खासकर 2017 में संजय शर्मा की जीत के साथ। वहीं, बसपा का प्रभाव 2012 के बाद से लगातार घटता गया और कांग्रेस, जो कभी मजबूत थी, अब हाशिए पर चली गई है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
संजय कुमार शर्मा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश की अनूपशहर विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने 2022 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में 73,048 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। वे पेशे से राजनीतिज्ञ हैं और इससे पहले भारत सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रह चुके हैं। साथ ही, वे मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के ओएसडी (OSD) भी रहे हैं। शिक्षाविद् पृष्ठभूमि से आने वाले शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमटेक और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की है। वे लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं और निकाय कोटे से एमएलसी चुनाव भी लड़ चुके हैं। उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों, 2022 चुनावी शपथपत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ किसी भी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
अनूपशहर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में अनूपशहर विधानसभा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दे राजनीतिक और जनचर्चा का केंद्र बने रहे। ग्रामीण और शहरी विकास को लेकर अनेक योजनाएं लागू की गईं, जिनमें बुलंदशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण के तहत अनूपशहर तहसील के 20 गांवों को शामिल करने की प्रक्रिया प्रमुख रही, जिससे इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध शहरी विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की कोशिशें तेज हुईं। यह क्षेत्र कृषि प्रधान है, इसलिए सिंचाई, फसल का उचित मूल्य, गन्ना भुगतान, न्यूनतम समर्थन मूल्य, कृषि बीमा और लागत जैसे मुद्दे लगातार चुनावी विमर्श में रहे। जातीय समीकरणों की बात करें तो लोध, ठाकुर, ब्राह्मण, जाट, दलित और मुस्लिम समुदायों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने उम्मीदवार चयन और वोटिंग पैटर्न को प्रभावित किया, जहां बसपा ने दलित-मुस्लिम गठजोड़ और भाजपा ने सवर्ण-लोध वोट बैंक पर फोकस किया। बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर जनता में असंतोष बना रहा, खासकर सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर। शहरीकरण के दबाव के चलते कॉलोनियों के विस्तार, भूमि उपयोग और अवैध निर्माण भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। धार्मिक दृष्टिकोण से गंगा के किनारे स्थित होने और “छोटी काशी” के रूप में प्रसिद्धि के कारण धार्मिक पर्यटन, गंगा घाटों के विकास और सांस्कृतिक आयोजनों पर भी राजनीतिक विमर्श होता रहा। इसके साथ ही, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, स्वरोजगार योजनाएं और बढ़ते पलायन की समस्या भी चुनावी चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रही।

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