आंवला विधानसà¤à¤¾ सीट - Bareilly
आंवला |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री धर्मपाल सिंह |
| जिला | Bareilly |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | आंवला |
आंवला विधानसभा सीट प्रोफाइल
आंवला उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद की एक महत्वपूर्ण विधानसभा सीट (संख्या 126) है, जो आंवला लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसमें आंवला, अलीगंज, सिरौली, औंला नगर पालिका परिषद (NPP) और सिरौली नगर पंचायत (NP) शामिल हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
कुल जनसंख्या (2011): 55,629
पुरुष: 29,231
महिला: 26,398
लिंगानुपात: 903/1000
साक्षरता दर: 57.31%
आरक्षण स्थिति: सामान्य
धार्मिक एवं साम्प्रदायिक विभाजन (जनगणना 2011)
मुस्लिम: 50.68%
हिन्दू:49.02%
ईसाई: 0.20%
सिख: 0.08%
बौद्ध : 0.01%
अनुसूचित जाति: 7.56%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,90,298
विजेता: धर्मपाल सिंह (भाजपा)
वोट शेयर: 46.8%
उपविजेता: राधाकृष्ण शर्मा (सपा)
मतदान प्रतिशत: 61.1%
आंवला विधानसभा सीट, जो 1952 में अस्तित्व में आई, बरेली जिले की प्रमुख ग्रामीण सीटों में से एक मानी जाती है। प्रारंभिक वर्षों में यहां कांग्रेस, जनता पार्टी और अन्य दलों का प्रभाव रहा, लेकिन 1990 के दशक के बाद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ बना ली। 1985, 1989 और 1991 में भाजपा के श्याम बिहारी सिंह ने जीत दर्ज की, जबकि 1993 में समाजवादी पार्टी के महिपाल सिंह यादव विजयी रहे। इसके बाद 1996 और 2002 में भाजपा के धर्मपाल सिंह ने जीत हासिल की। 2007 में बसपा के पंडित राधाकृष्ण शर्मा ने भाजपा के वर्चस्व में एकमात्र बड़ा विराम डाला, लेकिन 2012, 2017 और 2022 में धर्मपाल सिंह ने लगातार जीत दर्ज कर भाजपा की स्थिति को और मजबूत किया। वे इस सीट से सबसे लंबे समय तक विधायक रहने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। पिछले तीन चुनावों में भाजपा का दबदबा बना रहा है, विशेषकर 2017 में सपा के सिद्धराज सिंह को बड़े अंतर से हराकर और 2022 में पुनः जीत दर्ज कर, यह स्पष्ट हो गया है कि आंवला विधानसभा भाजपा का एक मजबूत गढ़ बन चुका है। 2007 की बसपा जीत को छोड़ दें तो लगभग तीन दशकों से यहां भाजपा का वर्चस्व कायम है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
धर्मपाल सिंह, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और आंवला विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जिनका जन्म 15 जनवरी 1953 को बरेली, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय से एम.ए., बी.एड. और एल.एल.बी. की डिग्रियाँ प्राप्त की हैं। लोधी समुदाय से आने वाले धर्मपाल सिंह का राजनीतिक कॅरियर व्यापक और प्रभावशाली रहा है। वे अब तक पांच बार आंवला विधानसभा से विधायक चुने जा चुके हैं— 1996, 2002, 2012, 2017 और 2022 में। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश सरकार में पशुपालन एवं डेयरी मंत्री के रूप में कार्यरत हैं और इससे पहले सिंचाई, श्रम, पंचायती राज, लोक निर्माण तथा पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। निजी जीवन में उनकी पत्नी वंदना सिंह और तीन बच्चे हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान दाखिल शपथपत्र और सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, धर्मपाल सिंह पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, जिससे वे स्वच्छ छवि वाले नेताओं में गिने जाते हैं।
आंवला विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
आंवला विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी एक प्रमुख और लगातार उठता हुआ मुद्दा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर सड़कों, जलभराव, नियमित बिजली कटौती और सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी को लेकर जनता में गहरा असंतोष है। साथ ही, औंला को अलग जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है, जिसे लोग स्थानीय प्रशासनिक सुविधा और तेज़ विकास से जोड़कर देखते हैं, लेकिन यह मांग अब तक अधूरी है। क्षेत्र के किसानों को सिंचाई, फसल की उचित कीमत, खाद-बीज की उपलब्धता और समय पर भुगतान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, खासकर गन्ना, धान और गेहूं की खेती में समर्थन मूल्य और पारदर्शी मंडी व्यवस्था की मांग होती रही है। युवाओं में बेरोजगारी की दर बढ़ी है और स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों की कमी के चलते पलायन की प्रवृत्ति भी देखी गई है। कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा भी चिंताजनक मुद्दे बने हैं, जहां ग्रामीण इलाकों में पुलिस गश्त और त्वरित कार्रवाई की मांग की जाती है। सामाजिक और जातीय दृष्टिकोण से देखें तो आंवला की आबादी में मुस्लिम, दलित, यादव, ब्राह्मण, मौर्य, वैश्य और कायस्थ समुदायों की भागीदारी काफी अधिक है, जिससे चुनावी रणनीतियों में जातीय और धार्मिक संतुलन का विशेष महत्व रहता है और यह उम्मीदवार चयन और वोटिंग पैटर्न को भी प्रभावित करता है।