असमोली विधानसà¤à¤¾ सीट - Sambhal
असमोली |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्रीमती पिंकी सिंह |
| जिला | Sambhal |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | सम्भल |
असमोली विधानसभा सीट
असमोली विधानसभा उत्तर प्रदेश के संभल जिले की एक प्रमुख विधानसभा सीट है। यह क्षेत्र 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया और इसमें मुख्य रूप से ग्रामीण आबादी, प्रमुख बाजार और खेती-बाड़ी क्षेत्र शामिल हैं। यह विधानसभा संभल लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी में आती है। विधानसभा क्रमांक 32 है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: संभल
विधानसभा क्रमांक: 32
लोकसभा क्षेत्र: संभल
आरक्षण: कोई नहीं (सामान्य)
अनुमानित आबादी: 2.5-3 लाख
साक्षरता दर: 71.15%
लिंग अनुपात: 903/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 40-42%
मुस्लिम: 56-58%
अन्य समुदाय: लगभग 1–2%
अनुसूचित जाति: लगभग 25%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,58,364
विजेता: पिंकी सिंह (सपा)
वोट शेयर: 43.2%
उपविजेता: हरेंद्र कुमार (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 68.4%
असमोली विधानसभा सीट, जो संभल जिले की एक अहम और सामाजिक रूप से विविध सीट है, उत्तर प्रदेश विधानसभा में क्रमांक 32 पर आती है और संभल लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस सीट पर पिछले कई वर्षों से समाजवादी पार्टी का प्रभाव बना हुआ है, खासकर मुस्लिम और पिछड़ी जातियों के मजबूत समर्थन के चलते। यहां के चुनावों में जातीय और धार्मिक समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में सपा की पिंकी सिंह यादव ने लगातार जीत हासिल की है। भाजपा, बसपा और AIMIM जैसे दलों ने मुकाबले में जोर लगाया, लेकिन सपा का जनाधार मजबूत रहा। 2022 के चुनाव में पिंकी सिंह ने 42.92% यानी 1,11,652 वोट हासिल कर भाजपा के हरेंद्र सिंह को 25,206 वोटों के अंतर से हराया। कुल मतदान लगभग 68.58% हुआ था। चुनाव में मुख्य मुद्दे स्थानीय विकास, ग्रामीण सुविधाएं, कानून व्यवस्था, कृषि, रोजगार और सामाजिक सौहार्द के इर्द-गिर्द घूमते रहे, जो क्षेत्र की ज़मीनी जरूरतों को दर्शाते हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
पिंकी सिंह यादव समाजवादी पार्टी की नेता और असमोली विधानसभा सीट से तीन बार लगातार विधायक रही हैं। उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। वे 2012 से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और क्षेत्र में ग्रामीण व शहरी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर सक्रियता से काम करती हैं। यादव जाति से ताल्लुक रखने वाली पिंकी यादव का पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही है। उनके दादा और पिता दोनों सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने बी.ए., बी.एड. और एलएलबी की डिग्रियां हासिल की हैं और वे कृषि व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं, जिससे उन्हें ग्रामीण विकास की ज़मीनी समझ भी है। पिंकी यादव समाजवादी पार्टी की महिला एवं बाल मामलों की संयुक्त समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं। जहां तक उनके चुनावी शपथपत्रों के अनुसार उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
असमोली विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में असमोली विधानसभा क्षेत्र में कई अहम मुद्दे लगातार चर्चा में रहे, जिनका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ा। क्षेत्र में जल आपूर्ति, सड़क, बिजली और जलनिकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी रही, खासकर ग्रामीण इलाकों में इन सुविधाओं के सुधार को लेकर निरंतर मांग उठती रही। कृषि-प्रधान क्षेत्र होने के कारण किसानों की समस्याएं जैसे सिंचाई की सुविधा, खाद-बीज की उपलब्धता, फसल की कीमत और मंडी सुधार काफी अहम रहे। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों, दवाओं और जरूरी संसाधनों की कमी ने लोगों को परेशान किया। शिक्षा व्यवस्था भी कमजोर रही स्कूलों में शिक्षक और बुनियादी ढांचे की कमी साफ दिखाई दी, साथ ही गाँवों के समग्र विकास और परिवहन सुविधाओं को लेकर लोगों की अपेक्षाएं लगातार बनी रहीं। असमोली चूंकि मुस्लिम बहुल इलाका है, इसलिए सामाजिक सौहार्द, सुरक्षा और सहिष्णुता को लेकर भी लोगों में जागरूकता और सतर्कता रही। वहीं बेरोजगारी ने युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकारी नौकरियों और स्थानीय उद्योगों की कमी के चलते रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सीमित रहे। इन सबके बीच, जनता ने राजनीतिक नेतृत्व से ज़मीनी स्तर पर संवाद और सरकारी योजनाओं की प्रभावी पहुंच की लगातार मांग की।