अतरौली विधानसभा सीट - Aligarh

अतरौली

वर्तमान विधायक
श्री संदीप कुमार सिंह
जिला
Aligarh
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
अलीगढ़
अतरौली विधानसभा क्षेत्र का परिचय
अतरौली विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद में स्थित एक सामान्य (अनारक्षित) ग्रामीण सीट है। यह अलीगढ़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और इस क्षेत्र की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
 
जनसंख्या विवरण:
अनुमानित जनसंख्या: 2.5 से 3 लाख (2011 की जनगणना के अनुसार)
अनुसूचित जातियाँ: लगभग 18.45%, (2008 के परिसीमन आयोग के अनुसार)
साक्षरता दर: लगभग 67.52%,
धार्मिक वितरण:
हिंदू: 80–85%
मुस्लिम: लगभग 15–20%
जातीय वितरण:
जाट: लगभग 20–25%
पिछड़े वर्ग (OBC): लगभग 25–30%
ब्राह्मण और ठाकुर: 5–10%
 
चुनावी माहौल और समीकरण:
2022 विधानसभा चुनाव:
विजेता: संदीप कुमार सिंह (भाजपा)
वोट शेयर: 125,691            
दूसरा स्थान: विरेश यादव (सपा)
अतरौली विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक रूप से भाजपा ने जाट और सवर्ण वोटों के समर्थन से 2014 से लगातार दबदबा बनाए रखा है। 2022 और 2017 में भाजपा के संदीप कुमार सिंह ने क्रमशः सपा और बसपा को हराकर सीट जीती। हालांकि, 2012 में समाजवादी पार्टी के जफर आलम ने यह सीट जीती थी, जब सपा को यादव और मुस्लिम समुदाय का व्यापक समर्थन मिला था। बसपा का प्रभाव दलित वोट बैंक में देखा जाता है, जबकि कांग्रेस का प्रभाव सीमित है और वह कभी-कभी अल्पसंख्यकों के बीच समर्थन जुटा पाती है।
 
विधायक परिचय और आपराधिक मामले
संदीप कुमार सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हैं और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की अतरौली विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पोते हैं। उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में अतरौली सीट से जीत हासिल की, जिसमें 2022 में समाजवादी पार्टी के वीरेश यादव को हराया। संदीप सिंह पर कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उनका राजनीतिक कॅरियर उनके पारिवारिक राजनीतिक विरासत से जुड़ा हुआ है।
 
अतरौली के पिछले पाँच साल
पिछले पाँच वर्षों में अतरौली विधानसभा क्षेत्र, अलीगढ़ में कई अहम समस्याएं सामने आई हैं, जिन्होंने स्थानीय जनता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं जैसे खराब सड़कें, अनियमित बिजली आपूर्ति और पीने के पानी की कमी प्रमुख मुद्दे रहे हैं। किसानों को फसल के उचित मूल्य न मिलना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी भी चिंता का विषय है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी और अस्पतालों में बुनियादी सेवाओं का अभाव है। साथ ही, जातिगत तनाव, सामाजिक असमानता, महिला सशक्तिकरण की चुनौतियाँ और जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे भी क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं।

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