अतरौलिया विधानसà¤à¤¾ सीट - Azamgarh
अतरौलिया |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | डा0 संग्राम यादव |
| जिला | Azamgarh |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | लालगंज |
अतरौलिया, आज़मगढ़ – निर्वाचन क्षेत्र प्रोफ़ाइल
अतरौलिया उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले में स्थित एक नगर पंचायत कस्बा है। यह उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधानसभा क्षेत्र संख्या 343 के रूप में जाना जाता है और लालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह आज़मगढ़ शहर से लगभग 45 किमी उत्तर में स्थित है और राष्ट्रीय राजमार्ग 233 पर है, जो इसे आज़मगढ़, गोरखपुर और अन्य प्रमुख स्थानों से जोड़ता है। अतरौलिया एक छोटा लेकिन जीवंत नगर है, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक स्थलों, और सड़क संपर्क के लिए जाना जाता है।
जनसंख्या प्रोफ़ाइल (2011 की जनगणना के अनुसार)
- जनसंख्या (2011): 9,374 (नगर पंचायत क्षेत्र)
- अनुमानित जनसंख्या (2025): लगभग 13,300
- लिंगानुपात: 953/1000
- साक्षरता दर: 80.57%
पुरुष साक्षरता: 87.46%,
महिला साक्षरता: 73.34%
- अनुसूचित जाति: 14.65%
- अनुसूचित जनजाति: शून्य
धार्मिक और समुदायिक संरचना
धर्म प्रतिशत
हिंदू : 76.45%
मुस्लिम : 23.26%
ईसाई: 0.02%
बौद्ध: 0.23%
अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र, आज़मगढ़ में पिछले दो चुनावों में समाजवादी पार्टी का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला है। 2022 के चुनाव में डॉ. संग्राम यादव ने SP की ओर से चुनाव लड़ते हुए 91,502 वोट (39.55%) प्राप्त कर निषाद पार्टी (भाजपा गठबंधन) के प्रशांत सिंह को हराया, जिन्हें 74,255 वोट (32.10%) मिले। बहुजन समाज पार्टी के सरोज कुमार ने 22.17% वोट शेयर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। 2017 में भी संग्राम यादव ने भाजपा के कन्हैया लाल निषाद को 2,467 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। इस क्षेत्र में लगातार दो बार की जीत यह दर्शाती है कि यहां समाजवादी पार्टी की एक मज़बूत पकड़ है, हालांकि भाजपा और बसपा भी चुनावी दौड़ में कड़ी टक्कर देती रही हैं। वोट शेयर में मामूली अंतर यह संकेत देता है कि यह सीट राजनीतिक रूप से प्रतिस्पर्धात्मक बनी हुई है।
विधायक परिचय
डॉ. संग्राम यादव, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और अतरौलिया, आज़मगढ़ से विधायक हैं, जिनका जन्म 3 अक्टूबर 1971 को सेनपुर, आज़मगढ़ में हुआ था। वे पूर्व विधायक बलराम यादव के पुत्र हैं, जो अतरौलिया से पाँच बार विधायक रह चुके हैं। डॉ. यादव ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए., एलएलबी और पीएचडी की डिग्रियाँ प्राप्त की हैं और राजनीति के साथ-साथ कृषि से भी जुड़े हुए हैं। वे 2012 और 2017 में लगातार दो बार अतरौलिया से विधानसभा चुनाव जीतकर 16वीं और 17वीं उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने। 2012 में उन्होंने बसपा के सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा को 43,620 वोटों से हराया था, जबकि 2017 में उन्होंने भाजपा के कन्हैया लाल निषाद को 2,467 वोटों के मामूली अंतर से मात दी। 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। डॉ. यादव के खिलाफ 2025 तक 5 आपराधिक मामला दर्ज है.
अतरौलिया क्षेत्र के पिछले 5 साल
अतरौलिया क्षेत्र में विकास की राह में कई जमीनी चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। बुनियादी ढाँचे की बात करें तो जिले के कुछ अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम अब तक अधूरा है, जिससे सुरक्षा संबंधी जोखिम बने हुए हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में खराब सड़कों और अनियमित बिजली आपूर्ति की शिकायतें आम हैं। शिक्षा व्यवस्था में भी समस्याएँ बनी हुई हैं— यूपी बोर्ड परीक्षाओं के दौरान 22 केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए, जिससे नकल रोकना मुश्किल हुआ, साथ ही डिजिटल शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में तकनीकी सुविधाओं की कमी छात्रों के लिए परेशानी का कारण बनी। कृषि क्षेत्र भी संकट से जूझ रहा है, जहाँ नहरों में पानी की कमी और छुट्टा पशुओं की समस्या को लेकर किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जैसे तहबरपुर में अवैध हथियार फैक्ट्री का पकड़ा जाना और जीयनपुर में सड़क दुर्घटना में युवक की मौत। प्रशासनिक भ्रष्टाचार के मामले भी सामने आए हैं, जैसे पल्हना चौकी प्रभारी पर रिश्वत लेने के आरोप और विकास योजनाओं की धीमी गति—नगर पंचायत क्षेत्रों में सीवरेज व जल निकासी ठप है। इसके अलावा, सामाजिक असंतोष भी बढ़ रहा है; हाल ही में वकीलों ने अधिवक्ता संशोधन अधिनियम के विरोध में न्यायिक कार्य ठप किया और किसानों ने बिजली बिल माफी व सब्सिडी की माँग को लेकर महापंचायत आयोजित की।