बाबागंज विधानसभा सीट - Pratapgarh

बाबागंज

वर्तमान विधायक
श्री विनोद सरोज
जिला
Pratapgarh
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
जनसत्ता दल लोकतांत्रिक
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
कौशांबी
बाबागंज विधानसभा सीट
बाबागंज विधानसभा उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की एक प्रमुख और सामाजिक रूप से विविध सीट है। यह विधानसभा सीट क्रमांक 245 है और कौशांबी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। बाबागंज सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। इसका गठन 2008 में परिसीमन के बाद हुआ और पहली बार 2012 में यहां चुनाव हुए। निर्वाचन क्षेत्र में शहरी-ग्रामीण दोनों तरह की आबादी निवास करती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: प्रतापगढ़
विधानसभा क्रमांक: 245
लोकसभा क्षेत्र: कौशांबी
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: लगभग 2.1-2.5 लाख
साक्षरता दर: 61-65% (जिला)
लिंग अनुपात: 938/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 84-86%
मुस्लिम: 13-
अन्य समुदाय: 1-2%
अनुसूचित जाति:18-22%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,64,845
मतदान प्रतिशत: 52.0%
विजेता: विनोद कुमार (जनसत्ता दल लोकतांत्रिक)
वोट शेयर: 40.8%
उपविजेता: गिरीश चंद्रा (सपा)
बाबागंज विधानसभा, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की सुरक्षित (SC) और राजनीतिक रूप से अहम सीट, 2008 के परिसीमन के बाद बनी और तब से ही यहां राजा भैया का प्रभाव साफ नजर आता है। उनके समर्थन से विनोद कुमार सोनकर ने 2012 से लगातार जीत हासिल की है। 2017 में भाजपा को 37 हजार से ज्यादा वोटों से हराया और 2022 में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के उम्मीदवार के रूप में सपा के गिरीश चंद्रा को 15,767 वोटों से मात दी। करीब 3.15 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति के साथ यादव, मुस्लिम, ओबीसी, ब्राह्मण और क्षत्रिय समुदाय भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2022 में विनोद कुमार को 40.34%, गिरीश चंद्रा को 30.88% और भाजपा के केशव प्रसाद को 18.22% वोट मिले, जबकि मतदान प्रतिशत करीब 52.18% रहा। यहां के चुनावी रुझानों में दलित मतदाताओं की प्राथमिकताएं, किसान मुद्दे, बुनियादी सुविधाओं का विकास, जातीय-सामाजिक संतुलन और स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता अहम रही है, जिसमें अब तक निर्दलीय समर्थित उम्मीदवारों की पकड़ मजबूत बनी हुई है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
विनोद कुमार, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की बाबागंज विधानसभा सीट से जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के विधायक, लंबे समय से इस क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय और राजा भैया के करीबी माने जाते हैं। 2007 से लगातार चुनाव लड़ते हुए उन्होंने 2007, 2012 और 2017 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की, जबकि 2022 में जनसत्ता दल के टिकट पर सपा प्रत्याशी को हराया। दलित, ओबीसी और मुस्लिम सहित विभिन्न समुदायों में उनकी मजबूत पकड़ है और क्षेत्र में उनका नाम अक्सर 'भैया' के असर से जोड़ा जाता है। 2022 चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज हैं।
बाबागंज विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में बाबागंज विधानसभा क्षेत्र की राजनीति और जनचर्चा का केंद्र किसानों की परेशानियां, बुनियादी सुविधाओं की कमी, रोजगार के अवसर, कानून व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और स्थानीय विकास रहे हैं। गन्ना व अन्य फसलों के उचित मूल्य, भुगतान में देरी और सिंचाई की दिक्कतों ने किसानों में असंतोष बढ़ाया, जबकि पेयजल, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी लोगों की बड़ी चिंता रही। युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सीमित रहे, जिससे सरकारी नौकरियों की मांग तेज हुई। महिला सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना भी अहम मुद्दे रहे। ग्रामीण-शहरी विकास में पारदर्शिता की कमी और नेताओं के जनसंपर्क की सक्रियता ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। कुल मिलाकर, बाबागंज की प्राथमिकताओं में किसान हित, बुनियादी ढांचा, रोजगार, कानून व्यवस्था और सामाजिक समरसता सबसे आगे रहे।

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