बदायूँ विधानसà¤à¤¾ सीट - Budaun
बदायूँ |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री महेश चन्द्र गुप्ता |
| जिला | Budaun |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | 2,17,791 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बदायूं |
बदायूं विधानसभा सीट
बदायूं विधानसभा बदायूं जिला में स्थित है और बदायूं लोकसभा के अंतर्गत आता है। 1956 में 'डीपीएसीओ (1956)' (परिसीमन आदेश) पारित होने के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1957 में हुआ था। 2008 में 'संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन आदेश' पारित होने के बाद, निर्वाचन क्षेत्र को पहचान संख्या 115 सौंपी गई थी। बदायूँ गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है। जनपद बदायूँ में भिलौलिया भगवान बुद्ध का एक बहुत बड़ा आकर्षण केंद्र रहा है। बदायूं ऐतिहासिक नजरिये से काफी महत्व का शहर है। विश्व प्रसिद्ध छोटे बड़े सरकार की दरगाह है। बदायूं को सूफी संतों की सरजमीं कहा जाता है। देश की पहली व अंतिम महिला शासक रही रजिया सुल्तान बदायूं की निवासी थी।
जनसंख्या विवरण (जनगणना 2011)
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 115
जनपद: बदायूं
लोकसभा क्षेत्र: बदायूं
जनसंख्या: 3,127,621
आरक्षण स्थिति: अनारक्षित (सामान्य)
मुख्य शहरी केंद्र: बदायूं नगर
धार्मिक एवं साम्प्रदायिक विभाजन (जनगणना 2011)
हिन्दू: 77.89%
मुस्लिम: 21.47%
ईसाई: 0.17%
सिख: 0.03%
बौद्ध: 0.05%
जैन:0.02%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,17,791
विजेता: महेश गुप्ता (भाजपा)
वोट शेयर: 46.4%
उपविजेता: रायस अहमद (सपा)
मतदान प्रतिशत: 58.0%
बदायूं विधानसभा सीट का गठन 1956 में परिसीमन के बाद हुआ और पहला चुनाव 1957 में संपन्न हुआ। 1980 और 1990 के दशक में यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला होता था, जिसमें 1989 और 1991 में भाजपा के कृष्ण स्वरूप वैश्य लगातार दो बार विधायक बने। 1993 के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) ने यादव-मुस्लिम समीकरण के बल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की और 2012 में सपा के आबिद रजा खान ने जीत हासिल की। हालांकि, यह सीट राजनीतिक रूप से अस्थिर मानी जाती है क्योंकि पिछले तीन दशकों में कोई भी प्रत्याशी लगातार दो बार नहीं जीत सका। लोकसभा स्तर पर भी सपा का वर्चस्व रहा है, लेकिन 2019 में भाजपा की संघमित्रा मौर्य ने जीत दर्ज की। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के महेश गुप्ता ने सपा के रायस अहमद को हराया, जबकि बसपा और कांग्रेस क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहीं। 2017 में भी भाजपा ने सपा को हराया था, जबकि 2012 में सपा विजयी रही थी। जिले की जनसंख्या में मौर्य-शाक्य, दलित और अन्य पिछड़े वर्ग भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। सपा का परंपरागत आधार मुस्लिम-यादव (एमवाई) गठजोड़ रहा है, लेकिन भाजपा ने 2017 और 2022 में हिंदू मतों के ध्रुवीकरण से बढ़त बनाई। बसपा और कांग्रेस का प्रभाव सीमित रहा है और कांग्रेस का वोट शेयर लगातार घटता जा रहा है। कुल मिलाकर, बदायूं सीट पर भाजपा और सपा के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलती है, जिसमें जातीय और सांप्रदायिक समीकरणों की निर्णायक भूमिका होती है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
महेश चंद्र गुप्ता, जिनका जन्म 10 अगस्त 1957 को दहगवां, जिला बदायूं (उत्तर प्रदेश) में हुआ, एक प्रतिष्ठित और जनसेवाभावी राजनेता हैं। स्नातक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। उनका परिवार पहले से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है. उनके ताऊ अशर्फी लाल जी सहसवान से विधायक रह चुके हैं। महेश गुप्ता ने 1986 से 1992 तक मंडल अध्यक्ष और जिलामंत्री के रूप में संगठनात्मक भूमिकाएँ निभाईं और 1999 में भाजपा बदायूं के जिलाध्यक्ष बने। 2007 में वे पहली बार बदायूं विधानसभा सीट से विधायक चुने गए और 2017 व 2022 में लगातार दो बार फिर इस सीट से जीत दर्ज की। 2019 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में शहरी विकास राज्य मंत्री का दायित्व सौंपा गया। उनकी छवि एक ईमानदार, संघर्षशील और विकासोन्मुख जनप्रतिनिधि की रही है, जो बदायूं क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर सक्रिय रहे हैं। चुनावी हलफनामे (2022) के अनुसार, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
बदायूं विधानसभा : पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
बदायूं शहर लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। सीवर व्यवस्था बेहद कमजोर है, जिससे जलभराव और गंदगी की स्थिति आम हो गई है, जबकि साफ-सफाई और सड़क मरम्मत जैसे जरूरी कार्य उपेक्षित हैं। ट्रैफिक जाम शहर की स्थायी समस्या बन चुका है, खासकर गड्ढों से भरी मुख्य सड़कों के कारण। बिजली आपूर्ति भी अनियमित रहती है और गर्मियों में पेयजल संकट गहराता है, जिससे नागरिकों को गंभीर असुविधा होती है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सीमित हैं, जिससे स्वरोजगार, सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और कौशल विकास की मांग लगातार उठती रही है। जातीय दृष्टि से बदायूं एक विविधता भरा क्षेत्र है। यहां दलित, यादव, मौर्य, ब्राह्मण, लोध, कश्यप, वैश्य और ठाकुर समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति है, जो चुनावी समीकरणों को गहराई से प्रभावित करते हैं। साथ ही, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में संसाधनों की कमी, डॉक्टरों और शिक्षकों की अनुपलब्धता जैसी समस्याओं के कारण जनता में असंतोष बना हुआ है।