बागपत विधानसà¤à¤¾ सीट - Bagpat
बागपत |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | योगेश धामा |
| जिला | Bagpat |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | 315054 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बागपत |
बागपत विधानसभा (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 52) उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले की पाँच विधानसभा सीटों में से एक है, जो बागपत लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट पहली बार 1952 में स्थापित हुई थी और 1974 में पुनर्गठित की गई। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख राजनीतिक सीट रही है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह स्थान महाभारत में वर्णित व्याघ्रप्रस्थ के रूप में जाना जाता है और वर्तमान में यह अपनी कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था और सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है
बागपत विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से जाट समुदाय सबसे प्रभावशाली है, जिसे यहां का सबसे बड़ा वोट बैंक माना जाता है। मुस्लिम आबादी लगभग 29% है और कई गांवों में निर्णायक भूमिका निभाती है, जबकि दलित समुदाय (मुख्यतः वाल्मीकि व चमार) की हिस्सेदारी करीब 14–15% है। गुर्जर, त्यागी, सैनी जैसे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और ब्राह्मण-बनिया जैसे सवर्ण वर्ग भी मौजूद हैं, हालांकि इनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है। राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र हमेशा सक्रिय रहा है। वर्तमान विधायक योगेश धामा (भाजपा) हैं, जिन्होंने 2022 में रालोद के अहमद हमीद को 6,733 वोटों से हराया। पिछले दशकों में यहां कांग्रेस, भाजपा और रालोद का प्रभाव रहा है, विशेषकर रालोद को जाट समर्थन का लाभ मिलता रहा है। लोकसभा स्तर पर भी यह सीट चरण सिंह परिवार का गढ़ रही है और फिलहाल राजकुमार सांगवान (रालोद) सांसद हैं। यहां राजनीतिक भागीदारी काफी मजबूत है, जिसमें हालिया चुनावों में मतदान प्रतिशत लगभग 65–66% रहा।
योगेश धामा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हैं और उत्तर प्रदेश की बागपत विधानसभा सीट (सीट संख्या 52) से वर्तमान विधायक हैं। उन्होंने 2017 और 2022 में लगातार दो बार इस सीट से जीत दर्ज की। उनका राजनीतिक सफर राष्ट्रीय लोकदल (RLD) से शुरू हुआ, जहाँ उन्होंने लगभग 15 वर्षों तक सक्रिय भूमिका निभाई और तीन बार जिला पंचायत सदस्य व अध्यक्ष के रूप में चुने गए। उनकी पत्नी रेनू धामा भी 2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। हालांकि, अजीत सिंह के साथ मतभेदों के चलते योगेश धामा ने 2017 से पहले भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने 2017 में RLD के अहमद हमीद को 6,733 वोटों से हराया और 2022 में BSP के अरुण कसाना को हराकर दोबारा विधायक बने। निजी जीवन में वह एक स्नातक हैं, पेशे से कृषि कार्य व गैस एजेंसी का संचालन करते हैं, और 2022 के चुनावी शपथपत्र के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 21.1 करोड़ रुपये है। उनके खिलाफ कुल तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें संभवतः चुनाव आचार संहिता उल्लंघन और स्थानीय विवाद शामिल हैं। notably, 2022 के चुनाव में खिंडौडा गाँव में आचार संहिता का उल्लंघन कर सभा आयोजित करने पर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
पिछले पाँच वर्षों में बागपत विधानसभा क्षेत्र ने कई प्रमुख मुद्दों का सामना किया है, जिनमें कृषि संकट सबसे महत्वपूर्ण रहा है। किसानों को गन्ना मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के भुगतान में देरी झेलनी पड़ी, वहीं यमुना और हिंडन नदियों के आसपास बाढ़ सुरक्षा उपायों के अभाव ने खेती को प्रभावित किया। शुगर मिलों के आधुनिकीकरण की मांग भी अधूरी रही। बुनियादी ढाँचे की बात करें तो सड़कें खराब हालत में हैं, विशेषकर बड़ौत-अमीनगर और बागपत-मुरादनगर मार्गों का चौड़ीकरण अधूरा है। सार्वजनिक परिवहन में अव्यवस्था बनी रही, जब तक कि ₹3.5 करोड़ की लागत से प्रस्तावित नया बस स्टेशन पूरा नहीं हुआ। युवाओं को रोजगार की कमी, औद्योगिक विकास की धीमी गति और बेहतर संस्थानों के अभाव में पलायन का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी चिंताजनक रही, हालांकि हाल ही में 50 शय्याओं वाले क्रिटिकल केयर अस्पताल और नए मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति मिली है। कानून-व्यवस्था की स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध और पुलिस बल की कमी के कारण प्रभावित हुई। शिक्षा और महिला सुरक्षा भी बड़ी चिंताएँ रहीं, खासकर कन्या कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने 2024-25 में ₹351 करोड़ की 281 परियोजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल हैं। साथ ही, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़ी औद्योगिक योजनाओं और 2023-24 में गन्ना किसानों को 99.51% भुगतान जैसे प्रयास भी किए गए हैं।