बहेड़ी विधानसभा सीट - Bareilly

बहेड़ी

वर्तमान विधायक
श्री अताउर रहमान
जिला
Bareilly
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
समाजवादी पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
पीलीभीत
बहेरी विधानसभा सीट
बहेरी, उत्तर प्रदेश की विधानसभा क्षेत्र संख्या 118 है, जो बरेली जिले में स्थित है। यह पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। इसकी स्थापना 1956 में हुई थी और यहाँ पहली बार चुनाव 1957 में हुआ था। यह सीट अनारक्षित है और इसमें बहेरी शहर, रिछा, बंजरिया, राय नवादा और बहेरी तहसील के अन्य कई क्षेत्र शामिल हैं। हाल के वर्षों में यह सीट समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच बदलती रही है।
जनसंख्या
विधानसभा संख्या : 118
जिला: बरेली
लोकसभा क्षेत्र: पीलीभीत
आरक्षण स्थिति: सामान्य (अनारक्षित)
नगर जनसंख्या (2011): 68,413
कुल जनसंख्या (बहेरी नगर, 2011): 68,413
पुरुष: 35,939
महिला: 32,474
लिंग अनुपात: 904/1,000
अनुसूचित जाति जनसंख्या: 5.4%
अनुसूचित जनजाति जनसंख्या: 13
साक्षरता दर: 55.1%
मतदान प्रतिशत (2022): 72.59%
धार्मिक एवं समुदायिक विभाजन (2011 की जनगणना)
मुस्लिम: 68.82%
हिन्दू: 29.52%
अन्य: 1.66%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
विजेता: अता उर रहमान (सपा)
वोट शेयर: 46.67%
उपविजेता: छत्रपाल सिंह गंगवार (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 72.59%
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
अता उर रहमान, जिन्हें अताउर्रहमान के नाम से भी जाना जाता है, उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की बहेरी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक हैं। उनका जन्म 10 जनवरी 1968 को बरेली में हुआ था और उन्होंने 1989 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। वे 16वीं (2012-2017) और 18वीं (2022-वर्तमान) उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं और सपा सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। बहेरी क्षेत्र में वे एक प्रभावशाली मुस्लिम नेता माने जाते हैं। हालांकि, उनका राजनीतिक सफर विवादों से अछूता नहीं रहा है। 2024 में भाजपा प्रत्याशी छत्रपाल गंगवार और उनके भतीजे को 'लुटेरा' कहने के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इससे पहले भी उनके खिलाफ विवादित बयानबाजी सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
बहेरी विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में बहेरी विधानसभा क्षेत्र में कई जमीनी समस्याएँ प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने आईं। क्षेत्र की जर्जर सड़कों और लगातार बिजली कटौती ने आवागमन और जीवन को कठिन बना दिया, जबकि मूलभूत सुविधाओं जैसे पेयजल, पक्की गलियों, शौचालयों और नालियों की सफाई की कमी ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में महसूस की गई। बहेरी में किसी बड़े उद्योग का न होना युवाओं के लिए रोजगार संकट पैदा करता रहा, जबकि कृषि और छोटे व्यवसायों में भी सरकारी सहयोग की कमी ने समस्याओं को और बढ़ाया। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियाँ, खासकर अवैध खनन, पर्यावरण और खेती दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हुईं। किसानों को सिंचाई, खाद-बीज, एमएसपी और आवारा पशुओं की समस्या लगातार परेशान करती रही। सरकारी योजनाओं का लाभ भी सभी किसानों तक नहीं पहुंच पाया। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की जर्जर स्थिति, स्टाफ और संसाधनों की कमी ने आम जनता को परेशान किया, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहद सीमित रही। सामाजिक और जातीय समीकरण भी चुनावी विमर्श का हिस्सा रहे, जहां मुस्लिम, दलित, कुर्मी और मौर्य-शाक्य जैसी बड़ी आबादी के मुद्दे-सुरक्षा, सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व, उठते रहे। बरसात के मौसम में जलभराव और नालियों की साफ-सफाई की समस्या बीमारियों की आशंका को जन्म देती रही, जो स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय बनी रही।

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