बहराइच विधानसà¤à¤¾ सीट - Bahraich
बहराइच |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्रीमती अनुपमा जायसवाल |
| जिला | Bahraich |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बहराइच |
बहराइच विधानसभा सीट
बहराइच विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख शहरी विधानसभा सीट है, जो बहराइच नगर को कवर करती है। यह बहराइच लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यह सीट अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी में आती है और यहां पर राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बीच समय-समय पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला है।
जनसंख्या और मतदाता विवरण
विधानसभा संख्या: 286
जिला जनसंख्या (2011): 34,87,731
बहराइच शहर की जनसंख्या: लगभग 2.5–3 लाख (अनुमानित)
लोकसभा क्षेत्र: बहराइच (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित)
कुल मतदाता (2022): 2,31,708
लिंग अनुपात (जिला): 892/1,000
धार्मिक और सामाजिक संरचना
जिला स्तर (जनगणना 2011):
हिंदू: 65.71%
मुस्लिम: 33.53%
अन्य (ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन): 1% से कम
बहराइच शहर (जनगणना 2011):
मुस्लिम: 56.07%
हिंदू: 42.40%
अन्य: 2% से कम
हालिया चुनावी परिणाम
2022 चुनाव परिणाम:
विजेता: अनुपमा जायसवाल (भाजपा)
वोट शेयर: 46.45%
उपविजेता: यासर शाह (सपा)
मतदान प्रतिशत (2022): 59.0%
बहराइच विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच ही रहा है। 2022 में भाजपा की अनुपमा जायसवाल ने सपा के यासिर शाह को महज 4,078 वोटों के करीबी अंतर से हराया। 2017 में भी भाजपा की अनुपमा जायसवाल ने सपा की रुबाब सैयदा को हराया था। हालांकि 1993 से 2012 तक सपा का वर्चस्व रहा, जब वकार अहमद शाह लगातार पांच बार विधायक चुने गए। क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जो परंपरागत रूप से सपा के समर्थन में रहे हैं, जबकि भाजपा को ब्राह्मण, ठाकुर और अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों का समर्थन प्राप्त हुआ। बसपा और कांग्रेस अब यहां लगभग हाशिये पर हैं। 2022 में दोनों का वोट शेयर 5% से भी कम रहा। ऐतिहासिक रूप से 1977 के बाद से सपा ने 5 और भाजपा ने 4 बार यह सीट जीती है। 2017 से भाजपा का प्रभाव बढ़ा है, लेकिन 2022 में सपा ने फिर से मजबूत टक्कर दी, जिससे यह साफ है कि मुकाबला अब त्रिकोणीय नहीं, बल्कि द्विपक्षीय हो चुका है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
अनुपमा जायसवाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश की बहराइच विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे कलवार (जायसवाल) समुदाय से संबंध रखती हैं। उन्होंने एम.ए., बीएड, बीटीसी और एलएलबी जैसी उच्च शैक्षिक योग्यताएँ प्राप्त की हैं। अनुपमा ने अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत भाजपा महिला मोर्चा से की थी। उन्होंने 2012 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2017 और 2022 में लगातार दो बार जीत हासिल कर विधायक बनीं। वे योगी आदित्यनाथ सरकार में बेसिक शिक्षा, बाल विकास, पुष्टाहार, राजस्व और वित्त विभागों की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भी रह चुकी हैं। बहराइच में महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और ग्रामीण विकास के मुद्दों पर उनकी सक्रियता उल्लेखनीय रही है। 2022 के चुनावी शपथपत्र के अनुसार उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
बहराइच विधानसभा के पिछले 5 साल
पिछले पाँच वर्षों में बहराइच विधानसभा सीट पर शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। शहरी बुनियादी ढांचे की बात करें तो जर्जर सड़कें, जलभराव और नालियों की सफाई न होना आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बने रहे। बिजली आपूर्ति भी अनियमित रही, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाकों में दिक्कतें आईं। गर्मियों में पेयजल संकट और पाइपलाइन लीकेज ने भी लोगों को परेशान किया। रोजगार के अवसर सीमित होने और महंगाई के कारण युवाओं का पलायन जारी रहा। किसानों को फसल भुगतान में देरी, सिंचाई की कमी और फसल बीमा में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कानून-व्यवस्था भी एक बड़ी चुनौती रही, जिसमें भूमि विवाद, चोरी और महिलाओं के खिलाफ अपराध प्रमुख रहे, वहीं साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखना भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहा। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार की आवश्यकता महसूस की गई, जहाँ अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी की शिकायतें आईं। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा। आवागमन के साधनों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शहर तक पहुंचने में कठिनाई हुई। सामाजिक और जातीय समीकरणों की बात करें तो मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रही, वहीं ब्राह्मण, ठाकुर और ओबीसी समुदायों का समर्थन चुनावी नतीजों को प्रभावित करता रहा।