बक्शी का तालाब विधानसभा सीट - Lucknow

बक्शी का तालाब

वर्तमान विधायक
श्री योगेश शुक्ला
जिला
Lucknow
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
मोहानलालगंज
बख्शी का तालाब विधानसभा सीट
बख्शी का तालाब विधानसभा, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जिले की एक प्रमुख सीट है। यह शहरी और ग्रामीण मिश्रित क्षेत्र है, जिसमें ऐतिहासिक रूप से महोना क्षेत्र और लखनऊ पूर्व के कुछ हिस्से शामिल हैं। यह विधानसभा मोहानलालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। 2012 के नए परिसीमन के बाद पहली बार यहां निर्वाचन हुआ था। यहाँ पर जातीय समीकरण और सामुदायिक विविधता चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: लखनऊ
विधानसभा क्रमांक: 169
लोकसभा क्षेत्र: मोहानलालगंज
आरक्षण: कोई नहीं (सामान्य)
अनुमानित आबादी: 3,49,654
साक्षरता दर: 68.66% (तहसील)
लिंग अनुपात: 902/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 82%
मुस्लिम: लगभग 16%
अन्य समुदाय: 2%
अनुसूचित जाति: करीब 33%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 3,16,848
विजेता: योगेश शुक्ल (भाजपा)
वोट शेयर: 46.7%
उपविजेता: गोमती यादव (सपा)
मतदान प्रतिशत: 69.6%
बख्शी का तालाब विधानसभा सीट का राजनीतिक सफर अब तक काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2012 में परिसीमन के बाद इस सीट का गठन हुआ, जो पहले महोना विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा थी। उसी साल हुए पहले चुनाव में समाजवादी पार्टी की गोमती यादव ने जीत दर्ज की, लेकिन 2017 में भाजपा लहर के चलते अविनाश त्रिवेदी ने बसपा के नकुल दुबे को हराकर भाजपा के लिए यहां जीत का रास्ता खोला। 2022 में भाजपा के योगेश शुक्ला ने सपा की गोमती यादव को 27,788 वोटों के बड़े अंतर से हराकर पार्टी की पकड़ को और मजबूत किया। इस सीट पर ओबीसी, ठाकुर, ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम वोटर्स का समीकरण हर चुनाव में अहम भूमिका निभाता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के वोट यहां निर्णायक साबित होते हैं, जबकि शहरी वोटर्स का असर अपेक्षाकृत कम रहता है। दिलचस्प बात यह है कि अब तक हुए तीन चुनावों में अलग-अलग दलों को जीत मिली है, जिससे साफ जाहिर होता है कि यहां मतदाता किसी एक पार्टी से भावनात्मक रूप से नहीं जुड़े हैं, बल्कि उम्मीदवार की लोकप्रियता, जातीय संतुलन और स्थानीय मुद्दे चुनावी परिणाम तय करते हैं। 2022 में भाजपा की जीत और सवर्ण-ओबीसी गठजोड़ ने यह संकेत दिया कि पार्टी ने अब इस क्षेत्र में संगठित मजबूती और जातीय संतुलन दोनों हासिल कर लिए हैं। कुल मिलाकर, यह सीट राजनीतिक रूप से बेहद प्रतिस्पर्धी रही है और आने वाले चुनावों में भी दिलचस्प मुकाबले की संभावना बनी हुई है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
योगेश शुक्ल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हैं और वर्तमान में बख्शी का तालाब विधानसभा सीट (लखनऊ ज़िला, उत्तर प्रदेश) से विधायक हैं। उन्होंने 2022 में पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। मूल रूप से कानपुर निवासी योगेश शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1960 को हुआ था और उन्होंने इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह लखनऊ में रहते हैं और राजनीति के साथ-साथ कृषि से भी जुड़े हैं। पारिवारिक रूप से वे विवाहित हैं, पत्नी का नाम सुमन शुक्ला है और उनके तीन बच्चे हैं। चुनावी हलफनामों और ‘मायनेता’ जैसे सार्वजनिक स्रोतों के अनुसार, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
बख्शी का तालाब विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में बख्शी का तालाब विधानसभा क्षेत्र में विकास और जनता की समस्याएं लगातार चर्चा का विषय बनी रहीं। क्षेत्र में सड़कों का चौड़ीकरण, खासकर बीकेटी से कुम्हरावां रोड तक और नई सड़कों के निर्माण ने बुनियादी ढांचे में सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए। शिक्षा के क्षेत्र में नया पॉलिटेक्निक कॉलेज खुला और स्कूलों में सुविधाएं बेहतर हुईं, लेकिन सिंचाई की अनियमितता और नहरों में पानी की कमी अब भी किसानों की बड़ी चिंता बनी रही। जातीय समीकरणों की बात करें तो ठाकुर, ब्राह्मण, यादव, मुस्लिम और ओबीसी मतदाता किसी भी उम्मीदवार की किस्मत तय करने में निर्णायक रहे हैं। सामाजिक न्याय, आरक्षण और दलित-मुस्लिम मुद्दों पर भी खूब सियासी बयानबाजी देखने को मिली। रोजगार की कमी और नए उद्योगों की अनुपस्थिति युवाओं में नाराज़गी का कारण बनी, जबकि कानून-व्यवस्था को लेकर हाल के वर्षों में संतोषजनक माहौल दिखा। महिला सुरक्षा, सीसीटीवी जैसे इंतजामों की मांग उठती रही। सरकारी योजनाओं जैसे राशन, पीएम आवास और शौचालयों के वितरण पर जहां सरकार ने काम का दावा किया, वहीं विपक्ष ने उसकी जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े किए। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए दो गोशालाएं बनीं, लेकिन जलभराव, सीवर सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली अब भी गंभीर समस्या है। इन तमाम मुद्दों के बीच बख्शी का तालाब की राजनीति विकास और जन सरोकारों के इर्द-गिर्द घूमती रही।

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