बलदेव विधानसभा से विधायक पूरन प्रकाश का राजनीतिक सफर, शिक्षा, प्रमुख कार्य, उपलब्धियां और जनाधार
10 June, 2026 | Desk

बलदेव विधानसभा से विधायक पूरन प्रकाश का राजनीतिक सफर, शिक्षा, प्रमुख कार्य, उपलब्धियां और जनाधार

बलदेव विधानसभा
पूरन प्रकाश भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मथुरा जिले की बलदेव (एससी) विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे पांच बार विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। प्रारंभिक राजनीतिक जीवन में वे राष्ट्रीय लोकदल से जुड़े रहे और बाद में भाजपा में शामिल हुए। 2017 और 2022 में लगातार भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज कर उन्होंने क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ साबित की। चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
शैक्षिक योग्यता और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि
  • जन्म: 15 जुलाई 1955, मथुरा।
  • शिक्षा: एलएलबी (कानून स्नातक)।
  • पेशा: कृषि, वकालत, व्यापार एवं राजनीति।
  • जाटव (अनुसूचित जाति) समुदाय से संबंध रखते हैं।
  • किसान और दलित समाज के बीच मजबूत जनाधार रखते हैं।
राजनीतिक सफर
  • राजनीतिक विरासत वाले परिवार से आते हैं, उनके पिता कन्हैया लाल कई बार विधायक रहे।
  • 1991 में पहली बार विधायक बने।
  • 2007 और 2012 में राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर चुनाव जीता।
  • 2016 में रालोद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए।
  • 2017 और 2022 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में लगातार जीत दर्ज की।
  • बलदेव क्षेत्र में भाजपा का मजबूत आधार स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रमुख कार्य और उपलब्धियां
  • ग्रामीण सड़कों, नालियों, पुलियों और खड़ंजा निर्माण कार्यों को बढ़ावा दिया।
  • आलू किसानों, सिंचाई और कृषि विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
  • यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के विकास और औद्योगिक परियोजनाओं की मांग की।
  • ग्रामीण आधारभूत ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी।
  • दलित और किसान समुदाय के हितों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
  • क्षेत्र में जनसंपर्क और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई।
बलदेव के प्रमुख नेता
  • पूरन प्रकाश पांच बार विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली दलित नेताओं में गिने जाते हैं।
  • निरंजन सिंह धांगर राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख किसान नेता रहे हैं।
  • बबीता देवी रालोद की प्रभावशाली महिला नेता हैं और 2022 में प्रमुख प्रतिद्वंद्वी रहीं।
  • अशोक कुमार बसपा के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं और दलित राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।