बांसगांव विधानसभा सीट - Gorakhpur

बांसगांव

वर्तमान विधायक
डा0 विमलेश पासवान
जिला
Gorakhpur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
बांसगांव
बांसगांव विधानसभा सीट
बांसगांव विधानसभा सीट (संख्या 327) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित है और यह बांसगांव लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और मुख्य रूप से ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों को कवर करती है। बांसगांव का राजनीतिक महत्व गोरखपुर क्षेत्र की राजनीति में हमेशा अहम रहा है।
जनसंख्या और जनगणना 2011
जिला: गोरखपुर
विधानसभा क्रमांक: 327
लोकसभा क्षेत्र: बांसगांव
अनुमानित कुल आबादी: 3.5-4 लाख
आरक्षण: अनुसूचित जाति
लिंगानुपात: 950/1,000
साक्षरता दर: लगभग 60.68%
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 85-90%
मुस्लिम: 8-12%
अन्य समुदाय: 1% से कम
अनुसूचित जाति: लगभग 23.1%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,87,082
विजेता: विमलेश पासवान (भाजपा)
वोट शेयर: 55.1%
उपविजेता: डॉ संजय कुमार (सपा)
मतदान प्रतिशत: 49.3%
बांसगांव विधानसभा, जो गोरखपुर जिले में स्थित और अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है, उसका राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। 1962 में बनी इस सीट पर शुरुआत में कांग्रेस का दबदबा था और महावीर प्रसाद जैसे बड़े दलित नेता यहां से कई बार चुने गए। लेकिन 1991 के बाद भाजपा ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की और 2009 के बाद से कमलेश पासवान के नेतृत्व में लगातार जीत दर्ज की, जिससे भाजपा का वर्चस्व बन गया। बसपा ने यहां कई बार मजबूती से मुकाबला किया, लेकिन जीत नहीं सकी। पिछले कुछ चुनावों में भाजपा को दलितों के साथ-साथ अन्य पिछड़ी जातियों और सामान्य वर्ग का भी समर्थन मिला, जिससे पार्टी को और मजबूती मिली। सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा ने चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन भाजपा के संगठन और जातीय समीकरणों के आगे वे कमजोर साबित हुए। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के कमलेश पासवान ने जीत दर्ज की, जबकि बसपा के सदल प्रसाद दूसरे स्थान पर रहे। इस लगातार जीत से साफ है कि बांसगांव में भाजपा की पकड़ मजबूत बनी हुई है, हालांकि बुनियादी सुविधाओं, बाढ़, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे भी लगातार चर्चा में रहे हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
विमलेश पासवान भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और इस वक्त उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा में बांसगांव (गोरखपुर) क्षेत्र के विधायक हैं। वे पेशे से एक सर्जन हैं, खास तौर पर ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के विशेषज्ञ हैं। राजनीति में सक्रिय होने के साथ-साथ उन्होंने मेडिकल फील्ड में भी काम किया है। 2017 में उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और बसपा के धर्मेंद्र कुमार को करीब 22,873 वोटों से हराकर विधायक बने। इसके बाद 2022 में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। उनका परिवार पहले से ही राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके भाई कमलेश पासवान सांसद व केंद्रीय मंत्री हैं और मां सुभावती पासवान भी सांसद रह चुकी हैं। जहां तक आपराधिक रिकॉर्ड की बात है, सार्वजनिक तौर पर उनके खिलाफ किसी भी गंभीर या आपराधिक मामले का कोई उल्लेख नहीं मिलता।
बांसगांव विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में बांसगांव विधानसभा क्षेत्र में विकास और सामाजिक मुद्दों को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं। क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के सुधार की लगातार मांग रही है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जल निकासी और सड़क की हालत को लेकर लोगों में नाराजगी रही है। चूंकि यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, इसलिए दलित नेतृत्व, सामाजिक न्याय और समुदाय की भागीदारी भी बड़ी चर्चा का विषय रही। बेरोजगारी खासकर युवाओं के लिए चिंता का कारण बनी रही और स्थानीय स्तर पर रोजगार व स्वरोजगार के साधनों को बढ़ावा देने की मांग उठती रही। कोविड के दौरान और उसके बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, अस्पतालों की हालत और दवाओं की उपलब्धता जैसी समस्याएं भी सामने आईं। किसानों के लिए फसल की कीमत, समय पर भुगतान और सिंचाई सुविधाएं जैसे मुद्दे लगातार उठते रहे। कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर भी सवाल उठते रहे, खासकर ग्रामीण इलाकों में। साथ ही, मौजूदा विधायक विमलेश पासवान के परिवार का राजनीतिक प्रभाव जिनके भाई और मां दोनों सांसद रह चुके हैं, भी स्थानीय राजनीति में परिवारवाद और नेतृत्व को लेकर बहस का कारण बना।

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