बड़ौत विधानसभा सीट - Bagpat

बड़ौत

वर्तमान विधायक
श्री कृष्णपाल मलिक
जिला
Bagpat
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
बागपत
बड़ौत विधानसभा सीट
बड़ौत विधानसभा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की जाट बहुल, गन्ना–कृषि प्रधान और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटी रणनीतिक सीट है। यह मेरठ सहारनपुर मुजफ्फरनगर कॉरिडोर पर स्थित कस्बाई देहाती क्षेत्र है, जहां खाप राजनीति, किसान आंदोलनों और रालोद–भाजपा टकराव की मजबूत परंपरा रही है।
जनसंख्या (जनगणना 2011) और बुनियादी तथ्य 
जिला: बागपत 
विधानसभा क्रमांक: 51 (बड़ौत) 
लोकसभा क्षेत्र: बागपत लोकसभा क्षेत्र 
आरक्षण: सामान्य (कोई आरक्षण नहीं) 
अनुमानित आबादी: लगभग 4-4.25 लाख 
साक्षरता दर: 70 प्रतिशत
लिंग अनुपात: लगभग 880–900 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
 
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (अनुमानित)
हिंदू: बड़ौत साफ तौर पर जाट बहुल सीट है; जाटों के साथ गुर्जर, त्यागी, ब्राह्मण, बनिया, ओबीसी और दलित (जाटव आदि) समुदायों की बड़ी आबादी है। 
मुस्लिम: कस्बे और कई गांवों में मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है। 
अनुसूचित जाति: 20%
 
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान 
 
बड़ौत विधानसभा सीट 1952 से अस्तित्व में थी, लेकिन 1969 के बाद परिसीमन के चलते समाप्त हो गई और 2008 के परिसीमन में दोबारा अस्तित्व में आई। नवगठित सीट पर 2012 के पहले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के लोकेश दीक्षित ने जीत दर्ज की, जबकि रालोद दूसरे, सपा तीसरे और भाजपा चौथे स्थान पर रही। जिससे यह संकेत मिला कि जाट–किसान बहुल क्षेत्र में भी उस समय बसपा का दलित आधार मजबूत था। 2017 में भाजपा ने रालोद से आए जाट नेता कृष्णपाल मलिक को प्रत्याशी बनाया और उन्होंने रालोद के साहेब सिंह को 27 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया; यह जीत किसान–जाट बेल्ट में भाजपा की बड़ी राजनीतिक सफलता मानी गई। परंपरागत रूप से कांग्रेस और रालोद के प्रभाव वाले बड़ौत क्षेत्र में 2014 और 2017 के बाद भाजपा ने जाट–खाप और किसान नेतृत्व के साथ तालमेल बैठाकर अपना संगठनात्मक और चुनावी आधार उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया।
 
2022 चुनावी परिणाम (बड़ौत विधानसभा) 
कुल मतदाता: 3,04,084
विजेता: कृष्णपाल सिंह मलिक (के.पी. मलिक) (भाजपा) 
वोट शेयर: 46.5%
उपविजेता: जयवीर सिंह तोमर, राष्ट्रीय लोकदल (सपा रालोद गठबंधन के प्रत्याशी)  
 
विधायक परिचय और आपराधिक मामला 
कृष्णपाल सिंह मलिक
वे जाट समुदाय से आते हैं और शुरुआती दौर में राष्ट्रीय लोकदल से जुड़े रहे, जहां किसान राजनीति के एक पहचाने हुए स्थानीय चेहरे के रूप में उभरे; बाद में भाजपा में शामिल होकर पार्टी के लिए जाट–किसान प्रतिनिधित्व का प्रमुख चेहरा बने। 2017 में पहली बार भाजपा प्रत्याशी के रूप में बड़ौत से विधायक चुने गए और 2022 में दोबारा जीत दर्ज कर उन्होंने क्षेत्र में अपना मजबूत जनाधार साबित किया। उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों, 2022 चुनावी शपथपत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
 
बड़ौत विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे 
बड़ौत क्षेत्र की राजनीति में गन्ना मूल्य, मिलों पर बकाया भुगतान, तौल केंद्रों की गड़बड़ी और नहर–सिंचाई जैसी समस्याएं लंबे समय से किसान आंदोलनों और पंचायतों का कारण रही हैं; 2020–21 के किसान आंदोलन में बड़ौत–बागपत–शामली बेल्ट की सक्रिय भागीदारी ने भाजपा और रालोद–सपा के बीच राजनीतिक ध्रुवीकरण को और स्पष्ट किया। दिल्ली–सहारनपुर–मेरठ–मुजफ्फरनगर से जुड़ाव के कारण कस्बे में भारी ट्रैफिक, जाम और पार्किंग की समस्या भी बड़ा मुद्दा बनी रही, जिसे विपक्ष “फेल रिपोर्ट कार्ड” बताता है। युवाओं के लिए स्थायी रोजगार, इंडस्ट्रियल एरिया, आईटीआई/पॉलिटेक्निक और डिग्री कॉलेज जैसी संस्थाओं की मांग, साथ ही तेज शहरीकरण, अव्यवस्थित कॉलोनियों, नाली–सीवर, ड्रेनेज और पेयजल की कमी ने आम नागरिक को प्रभावित किया है। जमीन विवाद, आपसी रंजिश, आपराधिक घटनाएं और खाप पंचायतों की भूमिका सामाजिक–राजनीतिक तनाव का कारण बनीं, जहां भाजपा ने सख्त कानून–व्यवस्था का नैरेटिव लिया तो विपक्ष ने किसान–युवा सुरक्षा और न्याय की बात उठाई। इसके साथ ही हाईवे चौड़ीकरण, औद्योगिक परियोजनाओं, ईंट भट्ठों और अवैध निर्माण से खेती की जमीन में कमी, प्रदूषण और भूजल स्तर गिरने को लेकर गांवों में चिंता बढ़ी, लेकिन इन मुद्दों पर दीर्घकालिक राजनीतिक सहमति सीमित ही दिखी।

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