बरेली विधानसà¤à¤¾ सीट - Bareilly
बरेली |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | डा0 अरुण कुमार |
| जिला | Bareilly |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बरेली |
बरेली शहर विधानसभा सीट
बरेली शहर उत्तर प्रदेश के बरेली लोकसभा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण विधानसभा खंड है। यह बरेली जिले का प्रमुख शहरी केंद्र और प्रशासनिक मुख्यालय भी है। बहेरी शहर, जिला बरेली की सबसे बड़ी तहसील है, जो मुस्लिम बहुल है। मीना बाज़ार बहेरी में एक प्रसिद्ध जगह है और अन्य जगहों पर महिलाओं की खरीदारी के लिए एक बेहतरीन केंद्र के रूप में जाना जाता है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
कुल जनसंख्या: 9,03,668
पुरुष: 4,76,927
महिला: 4,26,741
लिंग अनुपात: 895/1,000
साक्षरता दर: 60.1%
धार्मिक और साम्प्रदायिक विभाजन
हिन्दू: 58.58%
मुस्लिम: 38.80%
सिख: 0.90%
ईसाई: 0.78%
जैन: 0.05%
बौद्ध: 0.05%
जातीय संरचना
अनुसूचित जाति: 7.9%
अनुसूचित जनजाति: 0.3%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 3,63,673
विजेता: डॉ. अरुण सक्सेना (भाजपा)
वोट शेयर: 53.77
उपविजेता: राजेश कुमार अग्रवाल (सपा)
मतदान प्रतिशत: 62.0%
बरेली शहर विधानसभा उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख शहरी सीट है, जिसका राजनीतिक इतिहास और चुनावी रुझान काफी रोचक रहे हैं। 2008 के परिसीमन के बाद इस क्षेत्र का गठन हुआ और 2012 में पहला चुनाव हुआ। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र कांग्रेस, जनसंघ और जनता पार्टी का प्रभाव क्षेत्र रहा है, लेकिन 1985 के बाद से भाजपा का दबदबा लगातार बढ़ता गया। 1993 से भाजपा के राजेश अग्रवाल और बाद में डॉ. अरुण कुमार (अब अरुण सक्सेना) ने लगातार जीत हासिल की है। 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने क्रमशः 37%, 51.37% और 53.77% वोट शेयर के साथ जीत दर्ज की, जबकि सपा दूसरे स्थान पर रही। कांग्रेस और बसपा का प्रभाव यहां लगातार घटा है, जिससे मुकाबला मुख्यतः भाजपा और सपा के बीच सिमट गया है। भाजपा ने इस क्षेत्र में न केवल जीत का सिलसिला बनाए रखा है, बल्कि उसका वोट शेयर भी बढ़ा है। मुस्लिम और शहरी मध्यम वर्ग के वोट यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं, लेकिन भाजपा की पकड़ अब तक मजबूत बनी हुई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बरेली जिले की 9 में से 7 सीटों पर भाजपा ने विजय हासिल की, जिनमें बरेली शहर भी शामिल था।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और बरेली शहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उनका जन्म 24 दिसंबर 1948 को बरेली में हुआ था। उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की और बरेली में एक निजी अस्पताल का संचालन करते हैं। एक सफल चिकित्सक के साथ-साथ वे एक अनुभवी राजनेता भी हैं। 2012, 2017 और 2022 में वे लगातार बरेली शहर से विधायक निर्वाचित हुए हैं। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश सरकार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उनकी छवि एक सादगीपूर्ण, ईमानदार और जनता के बीच लोकप्रिय नेता की रही है। चुनावी हलफनामों और सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, डॉ. सक्सेना के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, जिससे वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के उन गिने-चुने विधायकों में शामिल हैं जिनकी छवि पूरी तरह 'क्लीन' मानी जाती है।
बरेली शहर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
बरेली शहर में बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, शहरी विकास, सांप्रदायिक सौहार्द और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। कई वार्डों में जर्जर सड़कें, जलभराव और नियमित पेयजल आपूर्ति की समस्याएँ नागरिकों की मुख्य शिकायतें रही हैं। हालांकि 'हर घर नल' योजना, रिंग रोड और फ्लाईओवर जैसी परियोजनाओं से कनेक्टिविटी और ढांचे में सुधार के प्रयास हुए हैं। उद्योगों के बंद होने से बेरोजगारी बढ़ी, खासकर युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार की कमी महसूस की गई, लेकिन हालिया निवेशों से उम्मीदें जगी हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी के बावजूद, अटल आवासीय विद्यालय, मुख्यमंत्री कम्पोजिट विद्यालय और पीएम श्री योजना के तहत शैक्षणिक ढांचे को सुदृढ़ करने की कोशिश हुई है। स्वास्थ्य सेवाओं में नई एंबुलेंस और जीवन रक्षक सुविधाओं की शुरुआत हुई है, लेकिन अपेक्षाएँ अब भी अधिक हैं। 'स्मार्ट सिटी' योजना के तहत सफाई, यातायात और डिजिटल सेवाओं पर ध्यान दिया गया, वहीं सांप्रदायिक सौहार्द की दृष्टि से यह उल्लेखनीय है कि 2017 के बाद कोई दंगा नहीं हुआ, जिसे शासन की बड़ी उपलब्धि माना गया। पर्यावरण संरक्षण पर खर्च तो हुआ, पर रखरखाव की कमी के चलते पौधारोपण की प्रभावशीलता पर सवाल उठे। 'स्वच्छ बरेली' अभियान से जागरूकता तो बढ़ी, लेकिन जमीनी क्रियान्वयन में चुनौतियाँ बनी रहीं।