बरहज विधानसभा सीट - Deoria

बरहज

वर्तमान विधायक
श्री दीपक कुमार मिश्र ‘शाका’
जिला
Deoria
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
बांसगांव
बरहज विधानसभा (देवरिया)
बरहज उत्तर प्रदेश विधान सभा की एक विधानसभा सीट है, जो उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित बरहज शहर को कवर करती है। बरहज, बांसगांव लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। वर्ष 2008 से इस विधानसभा क्षेत्र की संख्या 403 में से 342 निर्धारित की गई है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार दीपक मिश्रा ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी।
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 342
जिला: देवरिया, उत्तर प्रदेश
लोकसभा क्षेत्र: बंसगांव (SC)
आरक्षण: सामान्य
जनसंख्या विभाजन (जनगणना 2011)
कुल जनसंख्या (बरहज नगर पंचायत, 2011): लगभग 21,000
विधानसभा क्षेत्र अनुमानित जनसंख्या: 3 लाख
लिंगानुपात: 950/1000
साक्षरता दर: 71% (जिला औसत)
अनुसूचित जाति: 13%
धार्मिक एवं सामुदायिक विभाजन (जनगणना 2011)
हिंदू: 85-88%
मुस्लिम: 11-14%
अन्य: 1% से कम
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,92,693
विजेता: दीपक कुमार मिश्रा (भाजपा)
वोट शेयर: 47.4%
उपविजेता: मुरली मनोहर जायसवाल (सपा)
मतदान प्रतिशत: 57.6%
बरहज विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास बेहद बहुआयामी और अप्रत्याशित रहा है। यह सीट अपने उतार-चढ़ाव वाले चुनावी रुझानों के लिए जानी जाती है, जहां तीन बार निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत ने इसे जिले की सबसे खास सीट बना दिया है। आजादी के बाद 1950 से 1980 तक कांग्रेस का दबदबा रहा, लेकिन 1957 में उग्रसेन की निर्दलीय जीत ने कांग्रेस की लहर को पहली चुनौती दी। समाजवादी विचारधारा का गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में सपा और उसके पूर्ववर्ती दलों का गहरा प्रभाव रहा है। 1991 में भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज की और अब तक भाजपा व बसपा दोनों यहां दो-दो बार विजयी हो चुकी हैं। प्रमुख चेहरों में उग्रसेन, मोहन सिंह, सुरेन्द्र प्रसाद मिश्र, स्वामीनाथ यादव, दुर्गा प्रसाद मिश्र और सुरेश तिवारी शामिल रहे हैं। 2017 में भाजपा के सुरेश तिवारी विजयी रहे, जबकि 2022 में पार्टी ने उन्हें टिकट न देकर दीपक मिश्रा (शाका) को मैदान में उतारा, जिन्होंने सपा के मुरली मनोहर जायसवाल को 16,861 वोटों से हराया। बरहज के मतदाता अक्सर लहरों से इतर सोचकर वोट करते हैं और विकास, जातीय संतुलन, बाढ़, सड़क, रोजगार, चीनी मिल, जल निकासी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर निर्णय लेते हैं। जातीय समीकरण में ब्राह्मण, यादव, दलित, मुस्लिम, भूमिहार और ओबीसी सभी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है, जहां भाजपा को सवर्ण व ओबीसी, सपा को यादव-मुस्लिम और बसपा को दलित वोट बैंक का समर्थन मिलता है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
दीपक कुमार मिश्रा उर्फ शाका, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और बरहज विधानसभा क्षेत्र से 2022 में पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। 27 मार्च 1970 को देवरिया में जन्मे दीपक मिश्रा एक कृषक और सक्रिय राजनेता हैं। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक एवं मंत्री स्वर्गीय दुर्गा प्रसाद मिश्र के पुत्र हैं और उन्हीं की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। क्षेत्र में 'शाका बाबा' के नाम से लोकप्रिय, वे जनता से सीधे जुड़ाव के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है और पारिवारिक जीवन में पत्नी मधुरी मिश्रा व दो संतानों के साथ रहते हैं। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
बरहज विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में बरहज विधानसभा क्षेत्र में कई प्रमुख मुद्दे जनता की चिंता का केंद्र रहे हैं। हर साल आने वाली बाढ़ और खराब जल निकासी व्यवस्था से क्षेत्र के दर्जनों गांव प्रभावित होते हैं, जिससे फसलों, मकानों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचता है। तटबंधों की मजबूती और जल प्रबंधन की मांग लगातार उठती रही है। इसके अलावा, जर्जर सड़कों, पुलों की कमी और ग्रामीण इलाकों में खराब संपर्क मार्गों के चलते बुनियादी विकास की धीमी रफ्तार को लेकर लोगों में असंतोष बना रहा। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली तथा शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की भारी कमी लगातार चर्चा में रही। बेरोजगारी भी एक बड़ा मुद्दा रहा, खासकर युवाओं में, जो रोजगार की कमी के कारण पलायन करने को मजबूर हैं। स्वरोजगार, लघु उद्योग और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की मांग लगातार उठी है। साथ ही, बरहज की बंद पड़ी पुरानी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने और क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की मांग भी प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल रही। इन सबके साथ-साथ जातीय संतुलन भी राजनीतिक समीकरणों में अहम भूमिका निभाता रहा है, जहां ब्राह्मण, यादव, दलित, मुस्लिम, भूमिहार और ओबीसी समुदायों की निर्णायक भागीदारी प्रत्याशी चयन और मतदान व्यवहार को प्रभावित करती है।

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