बस्ती सदर विधानसà¤à¤¾ सीट - Basti
बस्ती सदर |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री महेंद्र नाथ यादव |
| जिला | Basti |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बस्ती |
बस्ती सदर विधानसभा सीट
बस्ती सदर (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 310) उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का एक प्रमुख विधानसभा क्षेत्र है, जिसमें बस्ती नगर (नगर पालिका क्षेत्र) और इसके आसपास के अर्ध-शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। यह बस्ती लोकसभा क्षेत्र के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है।
जनसंख्या विभाजन (जनगणना 2011)
कुल मतदाता: 3,71,546
पुरुष: 1,98,880
महिला: 1,72,638
अन्य: 28
लिंग अनुपात: 950/1000
अनुसूचित जाति (SC) जनसंख्या: लगभग 78,041
धार्मिक एवं साम्प्रदायिक विभाजन (जनगणना 2011)
हिंदू: 74.50%
मुस्लिम: 24.50%
ईसाई: 0.14%
सिख: 0.04%
बौद्ध: 0.40%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,14,773
विजेता: महेंद्र यादव (समाजवादी पार्टी)
वोट शेयर: 40.1%
उपविजेता: दयाराम चौधरी (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 57.7%
बस्ती सदर विधानसभा सीट पर पारंपरिक रूप से बहुदलीय मुकाबला देखने को मिला है, जहां समाजवादी पार्टी (सपा), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस के बीच प्रतिस्पर्धा रही है। 2012 में बसपा के जीतेंद्र कुमार ने जीत दर्ज की, जबकि 2017 में भाजपा के दयाराम चौधरी ने बड़ी बढ़त के साथ सफलता हासिल की। 2022 में सपा के महेंद्र यादव ने भाजपा को मामूली अंतर से हराकर सीट अपने नाम की। बस्ती जिले की राजनीति में यादव, ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्गों की भूमिका निर्णायक रही है। 2022 के चुनाव में सपा को 86,029 (40.1%) वोट मिले, जबकि भाजपा को 84,250 (38.99%) वोटों के साथ करीबी हार का सामना करना पड़ा। बसपा और कांग्रेस क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहीं, जबकि बसपा का प्रभाव 2012 के बाद से लगातार घटता गया है और कांग्रेस की स्थिति कमजोर बनी हुई है। पिछले चुनावों में तीन प्रमुख दलों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली है, लेकिन साथ ही वोटिंग प्रतिशत में गिरावट भी दर्ज की गई. 2017 में 44.86% से घटकर 2022 में 39.81% रह गया।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
महेंद्र नाथ यादव, बस्ती जनपद के ग्राम कलवारी एहतमाली (चनगहिया) निवासी, समाजवादी पार्टी के नेता हैं और वर्तमान में बस्ती सदर विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने किसान डिग्री कॉलेज, बस्ती से एमएससी (गणित) की पढ़ाई की और छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे, जहाँ वे छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे। 2003 में लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष बने और 2005 से 2015 तक लगातार दस वर्षों तक जिला पंचायत सदस्य रहे। 2019 से वे सपा के बस्ती जिलाध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं। 2017 में उन्होंने पहली बार बस्ती सदर विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए; हालांकि 2022 में उन्होंने भाजपा के दयाराम चौधरी को हराकर पहली बार विधायक बनने में सफलता पाई। वे पिछड़े वर्ग, दलितों और गरीबों की आवाज़ उठाने वाले, संघर्षशील और युवा नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। 2022 चुनावी हलफनामों के अनुसार, उनके खिलाफ 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
बस्ती सदर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
बस्ती सदर विधानसभा क्षेत्र में पिछले वर्षों के दौरान कई जमीनी समस्याएँ प्रमुख चुनावी मुद्दों के रूप में उभरी हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली सबसे गंभीर समस्याओं में रही, जहाँ सरकारी अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी की हालत खराब है। हेल्थ एटीएम जैसी आधुनिक पहलें तकनीकी खामियों, स्टाफ की कमी और संसाधनों के अभाव के कारण विफल रही हैं, जिससे मरीजों को इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों या शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। वहीं, शहरी अव्यवस्था जैसे सड़कें, जल निकासी, सफाई, ट्रैफिक जाम, कचरा प्रबंधन और पेयजल अब भी बुनियादी परेशानियाँ बनी हुई हैं। रोजगार की कमी, स्वरोजगार के लिए संसाधनों का अभाव और युवाओं का पलायन क्षेत्र की एक और बड़ी चिंता रही है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं का अभाव और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर असंतोष रहा, साथ ही उच्च शिक्षा और व्यावसायिक संस्थानों की मांग भी उठती रही है। कानून-व्यवस्था, विशेष रूप से महिला सुरक्षा, छेड़छाड़ और चोरी-डकैती जैसी घटनाएँ भी चिंता का विषय बनी रही हैं। इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों में सिंचाई, बिजली, सड़क, खाद-बीज की उपलब्धता, फसल की कीमत और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किसानों की समस्याएँ भी लगातार चुनावी चर्चा का हिस्सा रही हैं।