भरथना विधानसà¤à¤¾ सीट - Etawah
भरथना |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह |
| जिला | Etawah |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | 2,45,477 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | इटावा |
भरथना विधानसभा सीट
भरथना विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। यह इटावा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। 2008 के परिसीमन के बाद इसे 201 नंबर दिया गया है। भरथना शहर इस विधानसभा क्षेत्र का मुख्य केंद्र है। इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी (सपा), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस जैसे प्रमुख दलों का प्रभाव रहा है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
स्थान: एटा जिला
लोकसभा क्षेत्र: एटा
विधानसभा संख्या: 201
आरक्षण स्थिति: अनुसूचित जाति (SC)
कुल जनसंख्या (नगर) : 28,164
लिंग अनुपात: 885/1000
साक्षरता दर: 78.16%
धार्मिक और सामाजिक संरचना
हिंदू: 91.49%
मुस्लिम: 8.03%
ईसाई: 0.04%
सिख: 0.21%
बौद्ध: 0.06%
जैन: 0.08%
अनुसूचित जाति (दलित): 18.47 %
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,45,477
विजेता: राघवेन्द्र कुमार सिंह (सपा)
वोट शेयर: 42.2%
उपविजेता: सिद्धार्थ शंकर दोहरे (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 60.5%
भरथना विधानसभा सीट, जो इटावा जिले की एक प्रमुख सुरक्षित (एससी) सीट है, लंबे समय तक समाजवादी पार्टी (सपा) का गढ़ रही है। 2007 में मुलायम सिंह यादव ने यहां से जीत दर्ज कर बाद में यह सीट छोड़ी थी, जबकि 2012 में सपा की सुखदेवी वर्मा ने जीत हासिल की। हालांकि 2017 में भाजपा की सावित्री कठेरिया ने सपा के कमलेश कठेरिया को लगभग 2000 वोटों से हराकर पहली बार इस सीट पर भाजपा का झंडा फहराया और भरथना से चुनी गईं पहली महिला विधायक बनीं। इस क्षेत्र में यादव, लोधी, शाक्य, राजपूत, जाटव, ब्राह्मण और मुस्लिम समुदायों का सामाजिक समीकरण चुनावी परिणामों को गहराई से प्रभावित करता है। 2022 के चुनाव में सपा के राघवेंद्र कुमार सिंह ने भाजपा प्रत्याशी सिद्धार्थ शंकर दोहरे को हराकर पार्टी की पारंपरिक सीट फिर से वापस हासिल की। यह परिणाम स्पष्ट करता है कि 2017 की भाजपा की जीत के बाद 2022 में सपा ने मजबूती से वापसी की। हालिया चुनावी रुझानों में चावल मिल उद्योग का पतन, बुनियादी सुविधाओं की कमी, ग्रामीण विकास और जातिगत समीकरण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे, और मुकाबला मुख्यतः सपा और भाजपा के बीच सीमित रहा, जबकि बसपा और कांग्रेस की उपस्थिति नाममात्र की रही है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
राघवेन्द्र कुमार सिंह समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले की भरथना (एससी) विधानसभा सीट से विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इससे पहले वे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सक्रिय नेता थे, लेकिन 2021 में बसपा छोड़कर सपा में शामिल हो गए। पेशे से कृषक और समाजसेवी राघवेन्द्र कुमार सिंह की उम्र 2022 के अनुसार 52 वर्ष है। उनके खिलाफ एक हल्का आपराधिक मामला 2005 में दर्ज हुआ था जिसमें उन्हें कोई सजा नहीं हुई है। उनके 2022 चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके विरुद्ध इसके अलावा एक आपराधिक मामला दर्ज है।
भरथना विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में भरथना विधानसभा क्षेत्र में कई गंभीर और जमीनी मुद्दे उभरकर सामने आए हैं। कभी चावल मिलों के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अब व्यापारिक संकट से जूझ रहा है, जहां पहले 60 से अधिक धान मिलें सक्रिय थीं, उनका कारोबार लगभग पूरी तरह बंद हो गया, जिससे स्थानीय व्यापारियों और श्रमिकों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा। भरथना की अधिकतर आबादी ग्रामीण है, जहां बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा का अभाव बना हुआ है, विशेष रूप से चंबल-यमुना के जंगलों में बसे गांवों में हालात और भी खराब हैं। बरसात में इन गांवों का संपर्क टूट जाता है और सरकारी योजनाएं सीमित पहुंच पाती हैं। सिंचाई के लिए नलकूप, ट्यूबवेल और हैंडपंप जैसी सुविधाओं की कमी, और सरकारी सहायता में निरंतरता का अभाव भी किसानों की प्रमुख चिंता रही। स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहद सीमित हैं। इलाके में पर्याप्त अस्पताल, संसाधन और आपात सुविधाएं जैसे फायर स्टेशन नहीं हैं, हालाँकि हाल ही में इनकी घोषणाएं हुईं, जिनके क्रियान्वयन पर विपक्ष ने सवाल उठाए। भरथना के पचनदा क्षेत्र में पांच नदियों का संगम और ऐतिहासिक मंदिर पर्यटन की दृष्टि से संभावनाएं रखते हैं, लेकिन विकास की मांग अब भी पूरी नहीं हुई। राजनीतिक रूप से यह समाजवादी पार्टी का पारंपरिक गढ़ रहा है, जिसे 2017 में भाजपा ने पहली बार जीतकर चुनौती दी। क्षेत्र में यादव, लोधी, शाक्य, ब्राह्मण, जाटव, राजपूत, कुशवाहा और मुस्लिम समुदायों का सामाजिक समीकरण भी चुनावी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।