भाटपार रानी विधानसà¤à¤¾ सीट - Deoria
भाटपार रानी |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री सभाकुंवर |
| जिला | Deoria |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | सलेमपुर |
भाटपार रानी विधानसभा
भाटपार रानी उत्तर प्रदेश विधान सभा का एक निर्वाचन क्षेत्र है जो भारत के उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भाटपार रानी शहर को कवर करता है। भाटपार रानी लोकसभा क्षेत्र सलेमपुर के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। 2008 से, यह विधानसभा क्षेत्र 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से 340 नंबर पर है।
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 340
जिला: देवरिया
लोकसभा क्षेत्र: सलेमपुर
आरक्षण: नहीं
जनसंख्या (जनगणना 2011)
कुल जनसंख्या (अनुमानित, 2011): 3.1 लाख
लिंगानुपात: 950/1000 पुरुष
साक्षरता दर: 71%
अनुसूचित जाति: 13%
धार्मिक एवं जातीय विभाजन (जनगणना 2011)
हिंदू: 85-87%
मुस्लिम:12-14%
अन्य: 1% से कम
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,92,693
विजेता: सभा कुंवर कुशवाहा (भाजपा)
वोट शेयर: 47.4%
उपविजेता: अशुतोष उपाध्याय (सपा)
मतदान प्रतिशत: 57.6%
भाटपार रानी विधानसभा का राजनीतिक इतिहास मुख्यतः दो प्रभावशाली परिवारों हरिवंश सहाय और कामेश्वर उपाध्याय के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा है। आज़ादी के बाद से अब तक हुए 18 चुनावों में से 7 बार कामेश्वर उपाध्याय एवं उनके परिजन और 4 बार हरिवंश सहाय के परिवार के सदस्य विजयी रहे हैं। शुरुआती वर्षों में कांग्रेस और सोशलिस्ट पार्टी का दबदबा था, जबकि 1985 के बाद कामेश्वर उपाध्याय, जिन्होंने निर्दलीय, कांग्रेस और फिर सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, इस क्षेत्र की राजनीति के केंद्र में रहे। 2007 और 2012 में वे सपा से विधायक बने और उनके निधन के बाद उनके पुत्र आशुतोष उपाध्याय ने सपा से यह विरासत संभाली। लंबे समय तक भाजपा और बसपा इस सीट पर पैर जमाने में असफल रहे; 1991 की राम लहर और 2017 की मोदी लहर में भी भाजपा जीत नहीं सकी। 2017 में आशुतोष उपाध्याय ने भाजपा के जयनाथ कुशवाहा को हराया, लेकिन 2022 में पहली बार भाजपा की सभा कुंवर कुशवाहा ने आशुतोष उपाध्याय को हराकर सपा के मजबूत गढ़ में सेंध लगाई। हालिया रुझानों में स्पष्ट है कि मतदाता लहर से अधिक स्थानीय समीकरणों, परिवारवाद और जातीय संतुलन को महत्व देते हैं, जबकि बसपा और कांग्रेस का प्रभाव अब तक सीमित ही रहा है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
सभा कुंवर कुशवाहा, भाटपार रानी से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। उनका राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है 1996 से अब तक वे एक लोकसभा और छह विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने 2002 में समता पार्टी, 2007-2012 में बसपा, 2013 में निर्दलीय, 2014 में कांग्रेस (लोकसभा) और 2017 में फिर बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। 2022 में भाजपा में शामिल होकर उन्होंने पहली बार चुनाव जीता और सपा के विधायक डॉ. आशुतोष उपाध्याय को हराया था। उनकी राजनीतिक छवि एक संघर्षशील, जमीनी नेता की रही है, जो पार्टी बदलने के बावजूद क्षेत्र में सक्रियता और स्थानीय लोकप्रियता बनाए रखने में सफल रहे हैं। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
भाटपार रानी विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
भाटपार रानी क्षेत्र में पिछले वर्षों के दौरान स्थानीय विकास और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे जर्जर सड़कें, खराब स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और पेयजल की समस्या चुनावी बहस का अहम हिस्सा रही है। साथ ही, बेरोजगारी और युवाओं का पलायन भी एक गंभीर चिंता का विषय रहा, जहां स्वरोजगार, सरकारी नौकरियों और छोटे उद्योगों की स्थापना की मांग लगातार उठती रही है। यह सीट करीब चार दशक तक कामेश्वर उपाध्याय और हरिवंश सहाय जैसे दो प्रमुख राजनीतिक परिवारों के प्रभाव में रही है और प्रत्याशी चयन से लेकर चुनावी रणनीति तक में जातीय समीकरण जैसे कुशवाहा, यादव, ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है, लेकिन किसानों को सिंचाई, खाद-बीज की उपलब्धता, फसल का उचित मूल्य और सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़ी शिकायतें बनी रहती हैं। 2017 और 2022 में भाजपा की प्रदेश और केंद्र स्तर पर लहर के बावजूद मतदाताओं ने यह संकेत दिया कि वे केवल लहर पर नहीं, बल्कि स्थानीय नेतृत्व, विकास और जातीय संतुलन जैसे मुद्दों पर निर्णय लेते हैं।