बुलंदशहर विधानसà¤à¤¾ सीट - Bulandshahr
बुलंदशहर |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री प्रदीप कुमार चौधरी |
| जिला | Bulandshahr |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बुलंदशहर |
बुलंदशहर विधानसभा सीट
बुलंदशहर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बुलंदशहर जिले का एक हिस्सा है और बुलंदशहर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1952 में हुआ था जब 1951 में 'डीपीएसीओ (1951)' (परिसीमन आदेश) पारित किया गया था। 2008 में 'संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश' पारित होने के बाद, निर्वाचन क्षेत्र को पहचान संख्या 65 सौंपी गई। यह क्षेत्र गंगा-यमुना के दोआब में स्थित है और ऐतिहासिक रूप से कृषि प्रधान रहा है।
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 65
जिला: बुलंदशहर
लोकसभा क्षेत्र: बुलंदशहर
आरक्षण: सामान्य
कुल जनसंख्या: 34,98,507
धार्मिक और जातीय विभाजन (जनगणना 2011)
मुस्लिम: 68.50%
हिन्दू: 30.98%
ईसाई: 0.44%
सिख: 0.01%
बौद्ध: 0.02%
अनुसूचित जाति: 4.58%
अनुसूचित जनजाति: 0.01%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,58,597
विजेता: प्रदीप चौधरी (भाजपा)
वोट शेयर: 49.1%
उपविजेता: हाजी यूनुस (रालोद)
मतदान प्रतिशत: 64.7%
बुलंदशहर जिले की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं। मुस्लिम और दलित वोटरों का गठजोड़ पारंपरिक रूप से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पक्ष में जाता रहा है, जबकि ठाकुर, लोध, वैश्य और अन्य सवर्ण जातियां आमतौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करती रही हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) ने एक समय पर जिले में मजबूत उपस्थिति दर्ज की थी, लेकिन हाल के वर्षों में उसका प्रभाव लगातार घटा है। 2012 में बसपा के मोहम्मद अलीम खान ने जीत दर्ज की थी, हालांकि मुकाबला कड़ा रहा। 2017 में भाजपा के वीरेंद्र सिंह सिरोही ने विजय हासिल की और उनके निधन के बाद 2020 के उपचुनाव में उनकी पत्नी उषा सिरोही ने यह सीट बरकरार रखी। 2022 में भाजपा के प्रदीप कुमार चौधरी ने 48.94% वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के मोहम्मद यूनुस दूसरे स्थान पर रहे और बसपा तीसरे स्थान पर चली गई। वर्तमान में जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर भाजपा का दबदबा है, जबकि बसपा और सपा का प्रभाव लगातार कमजोर हुआ है। आरएलडी ने हालिया चुनावों में मुस्लिम-दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है, वहीं कांग्रेस पूरी तरह से हाशिए पर चली गई है और मुख्य मुकाबले से बाहर हो गई है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
प्रदीप चौधरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा में बुलंदशहर सदर सीट से विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 1,27,076 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की थी। इससे पहले वे बुलंदशहर जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जिससे उनका स्थानीय राजनीतिक अनुभव मजबूत रहा है। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है। इसके अलावा अन्य सुत्रों के अनुसार एमपी/एमएलए कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ चार समन और तीन गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। वे कई बार अदालत में पेश नहीं हुए, जिस पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए सख्त रुख अपनाया है। पुलिस द्वारा समय पर पेश न किए जाने पर भी अदालत ने गंभीर टिप्पणी की है।
बुलंदशहर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में बुलंदशहर विधानसभा क्षेत्र में कई प्रमुख मुद्दे चुनावी विमर्श और जनचर्चा का केंद्र रहे हैं। किसान आंदोलन और कृषि संकट ने क्षेत्र में व्यापक असर डाला, जिसमें गन्ना भुगतान, न्यूनतम समर्थन मूल्य और सिंचाई सुविधाओं जैसी मांगें प्रमुख रहीं। जाट आरक्षण और ग्रामीण असंतोष के चलते भाजपा को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जातीय समीकरणों की बात करें तो लोध, जाट, मुस्लिम, दलित और सवर्ण मतदाताओं के गठजोड़ ने चुनावी रणनीति और उम्मीदवार चयन को प्रभावित किया। कानून-व्यवस्था भी एक अहम मुद्दा रही, खासतौर पर आपराधिक घटनाओं और पूर्व विधायक अलीम खान की हत्या जैसी घटनाओं के चलते विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया, वहीं भाजपा ने अपराध नियंत्रण को अपनी उपलब्धि बताया। बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा पर लगातार चर्चा होती रही, जबकि दिल्ली-एनसीआर से सटे होने के कारण शहरीकरण, रोजगार और ट्रैफिक जैसे मुद्दे भी उभरकर सामने आए। धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी राजनीति का हिस्सा बनी रही, जिसमें अनूपशहर को 'छोटी काशी' के रूप में विकसित करने और गंगा किनारे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बातें शामिल थीं।