कैम्पियरगंज विधानसभा सीट - Gorakhpur

कैम्पियरगंज

वर्तमान विधायक
श्री फतेह बहादुर
जिला
Gorakhpur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
गोरखपुर
कैम्पियरगंज विधानसभा सीट
कैम्पियरगंज विधानसभा सीट (संख्या 320) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित है और गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और इसमें मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र, छोटे कस्बे तथा कृषि प्रधान गांव शामिल हैं। यहाँ की राजनीति में स्थानीय जातीय समीकरण और ग्रामीण विकास के मुद्दे प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: गोरखपुर
विधानसभा क्रमांक: 320
लोकसभा क्षेत्र: गोरखपुर
अनुमानित आबादी: 3.5–4 लाख
साक्षरता दर: 60.4%
लिंग अनुपात: 921/1000
आरक्षण: सामान्य
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 80-85%
मुस्लिम: 12-15%
अन्य समुदाय: 1% से कम
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,23,238
विजेता: फतेह बहादुर सिंह (भाजपा)
वोट शेयर: 54.7%
उपविजेता: काजल निषाद (सपा)
मतदान प्रतिशत: 58.3%
कैम्पियरगंज विधानसभा क्षेत्र, जो गोरखपुर जिले में आता है, राजनीतिक रूप से एक अहम जगह रही है। यह इलाका उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह की कर्मभूमि रहा है और उनके बेटे फतेह बहादुर सिंह यहां की राजनीति में एक बड़ा चेहरा हैं। 2008 में परिसीमन के बाद इस सीट का गठन हुआ और 2012 में फतेह बहादुर सिंह राकांपा से चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद 2017 और 2022 में वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और दोनों बार जीत हासिल की। 2022 के चुनाव में उन्होंने सपा की उम्मीदवार काजल निषाद को बड़े अंतर से हराया और उन्हें करीब 54% वोट मिले। हालांकि निषाद जाति के मतदाता यहां सबसे ज्यादा हैं, लेकिन अब तक उनका कोई प्रतिनिधि इस सीट से नहीं जीत पाया है। कुल मिलाकर, करीब 4 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में ठाकुर, ओबीसी, ब्राह्मण, यादव, कुर्मी और निषाद जातियों का खासा असर है। यहां की राजनीति में रोजगार, सिंचाई, पेयजल, सड़क और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
फतेह बहादुर सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और कैम्पियरगंज विधानसभा क्षेत्र, गोरखपुर जिले से छह बार विधायक रह चुके हैं। वे उत्तर प्रदेश के पूर्व वन मंत्री और 17वीं विधानसभा में अस्थायी अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के पुत्र हैं। उनकी शिक्षा देहरादून के कर्नल ब्राउन कैम्ब्रिज स्कूल से हुई और उन्होंने सम हिग्गिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज से बीबीए की डिग्री प्राप्त की है। वे अपने क्षेत्र में एक मजबूत राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। जहां तक उनके आपराधिक रिकॉर्ड का सवाल है, 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला या रिकॉर्ड नहीं पाया गया है।
कैम्पियरगंज विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में कैम्पियरगंज विधानसभा क्षेत्र में कई अहम समस्याएं सामने आई हैं। सबसे बड़ी चिंता बेरोजगारी को लेकर रही है, खासकर युवाओं के बीच रोजगार की भारी कमी महसूस की गई है। स्थानीय लोग यह भी कहते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। हालांकि बिजली और सड़क जैसी कुछ सुविधाओं में थोड़ा विकास जरूर हुआ है, लेकिन अब भी यह इलाका बुनियादी ढांचे के मामले में पिछड़ा हुआ है। 2024 के चुनाव में मतदान बहिष्कार की खबरों ने राजनीतिक माहौल को और पेचीदा बना दिया। यहां सपा, बसपा और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला रहता है और जातीय समीकरण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं खासकर निषाद, यादव और कुर्मी समुदायों के वोट काफी निर्णायक माने जाते हैं। क्षेत्र की जनता को योगी सरकार से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन लोगों का मानना है कि वादों के बावजूद इलाके में समग्र विकास नहीं हो पाया, जिससे निराशा फैली है।

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