चमरव्वा विधानसभा सीट - Rampur

चमरव्वा

वर्तमान विधायक
श्री नसीर अहमद खां
जिला
Rampur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
समाजवादी पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
रामपुर
चमरव्वा विधानसभा सीट
चमरव्वा उत्तर प्रदेश की एक विधानसभा सीट है, जो रामपुर जिले में स्थित है। इस सीट पर पहली बार 2012 में चुनाव हुए। यह रामपुर लोकसभा क्षेत्र के अधीन आती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: रामपुर
विधानसभा क्रमांक: 35
लोकसभा क्षेत्र: रामपुर
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित: आबादी लगभग 3,00,000
साक्षरता दर: 51%
लिंग अनुपात: 915/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 34%
मुस्लिम: 61%
अन्य समुदाय: लगभग 5%
अनुसूचित जाति: 8.5%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,99,620
विजेता: नसीर अहमद खान (सपा)
वोट शेयर: 50.6%
उपविजेता: मोहन कुमार लोधी (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 64.9%
चमरौआ विधानसभा, जो 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और रामपुर जिले की मुस्लिम बहुल सीट है, राजनीति के लिहाज से अपेक्षाकृत नई होने के बावजूद काफी अहम मानी जाती है। यहां का मुख्य मुकाबला हमेशा से समाजवादी पार्टी और बसपा के बीच रहा है। 2012 में बसपा के यूसुफ अली ने सपा के नसीर अहमद खान को हराकर जीत हासिल की थी, लेकिन 2017 में नसीर अहमद खान ने जोरदार वापसी करते हुए बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की। 2022 में भी सपा ने उन पर भरोसा जताया और उन्होंने भाजपा प्रत्याशी मोहन कुमार लोढ़ी को लगभग 34,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में नसीर अहमद खान को एक लाख से अधिक वोट मिले, जबकि मतदान प्रतिशत करीब 50.34% रहा। मुस्लिम मतदाताओं की 40% से अधिक हिस्सेदारी और ओबीसी वर्ग का प्रभाव इस सीट को सपा के लिए मजबूत बनाता है। यहाँ की राजनीति में सामाजिक समरसता, युवाओं के लिए शिक्षा व रोजगार और आधारभूत सुविधाओं का विकास प्रमुख मुद्दे रहे हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
नसीर अहमद खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर जिले की चमरौआ विधानसभा सीट से विधायक हैं। 8 जुलाई 1938 को रामपुर में जन्मे खान परास्नातक शिक्षा प्राप्त हैं और पेशे से कृषि व सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2012 में पहली बार चुनाव लड़ा था, जहाँ वे दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन 2017 में बड़ी जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने और तब से लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। मुस्लिम और ओबीसी समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ उनकी राजनीतिक लोकप्रियता का अहम आधार है। हालांकि, उनके खिलाफ शत्रु संपत्ति मामले में मुकदमा दर्ज है, जिसमें वे अदालत में सरेंडर कर चुके हैं और फिलहाल अंतरिम जमानत पर हैं। 2022 के उनके चुनावी हलफनामे में 30 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
चमरौआ विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में चमरौआ विधानसभा में सामाजिक और विकास संबंधी कई मुद्दे प्रमुख रहे। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में सामाजिक और धार्मिक समरसता बनाए रखना लगातार चर्चा का विषय रहा, जहाँ विभिन्न समुदायों के बीच सहयोग और सद्भाव की मांग उठती रही। शिक्षा के मामले में स्कूल और कॉलेज तो मौजूद हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवाओं के लिए बेहतर रोजगार अवसरों की कमी महसूस की गई। सड़कों के चौड़े होने के बावजूद उनकी मरम्मत, यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने की जरूरत रही। वहीं, विकास कार्यों की धीमी गति और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी ने लोगों में असंतोष बढ़ाया। राजनीतिक दृष्टि से यहाँ सपा और बसपा के बीच मुख्य मुकाबला देखने को मिला, जिसमें सपा के नसीर अहमद खान ने हाल के वर्षों में मजबूत स्थिति बनाई। कुल मिलाकर, इन मुद्दों ने चमरौआ के सामाजिक और चुनावी माहौल को गहराई से प्रभावित किया है।

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