चंदौसी विधानसà¤à¤¾ सीट - Sambhal
चंदौसी |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | गुलाब देवी |
| जिला | Sambhal |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | 2,25,875 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | संभल |
चंदौसी विधानसभा सीट
चंदौसी विधानसभा उत्तर प्रदेश के संभल जिले की एक प्रमुख सीट है। यह विधानसभा क्रमांक 31 है और यह संभल लोकसभा क्षेत्र में आती है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। चंदौसी क्षेत्र शहरी और ग्रामीण जनसंख्या, व्यापारिक गतिविधियों और सामाजिक विविधता के लिए जाना जाता है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: संभल
विधानसभा क्रमांक: 31
लोकसभा क्षेत्र: संभल
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: 652,106
साक्षरता दर: 71%
लिंग अनुपात: 898/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 60%
मुस्लिम: लगभग 38-40%
अन्य समुदाय: लगभग 2%
अनुसूचित जाति: 16-18%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,25,875
विजेता: गुलाब देवी (भाजपा)
वोट शेयर: 50.0%
उपविजेता: कुमारी विमलेश (सपा)
मतदान प्रतिशत: 59.1%
चंदौसी विधानसभा, जो उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित एक अनुसूचित जाति आरक्षित सीट है, उसका राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। यह सीट 1962 में अस्तित्व में आई और तब से अब तक यहां भाजपा को सबसे ज्यादा बार जीत मिली है। पिछले दो दशकों में राजनीति में दिलचस्प बदलाव देखने को मिले। 2002 में भाजपा की गुलाब देवी ने पहली बार जीत दर्ज की, उसके बाद 2007 में बसपा के गिरीश चंद्र और 2012 में सपा की लक्ष्मी गौतम विजयी रहीं। लेकिन 2017 और 2022 में गुलाब देवी ने दोबारा बीजेपी की पकड़ मजबूत करते हुए समाजवादी पार्टी और अन्य दलों को पछाड़ दिया। 2022 में उन्होंने लगभग 49.53% वोट हासिल किए, जबकि समाजवादी पार्टी की उम्मीदार कु. विमलेश को 34.01% वोट मिले। इस क्षेत्र की सामाजिक बनावट में अनुसूचित जाति मतदाता सबसे अधिक हैं, लेकिन मुस्लिम और सवर्ण वोटर्स की भी अहम भूमिका रहती है। कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3.94 लाख है। चंदौसी गन्ना, कपास और मिंट ऑयल के लिए भी जाना जाता है, जिससे यहाँ की अर्थव्यवस्था और मुद्दे दोनों खास हैं। गुलाब देवी इस वक्त राज्य सरकार में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री भी हैं और उनका क्षेत्र में अच्छा जनाधार बना हुआ है, हालांकि सपा और बसपा की मौजूदगी अब भी चुनौती बनी हुई है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
गुलाब देवी भारतीय जनता पार्टी की एक अनुभवी और सम्मानित नेता हैं, जो उत्तर प्रदेश की चंदौसी विधानसभा सीट से विधायक हैं। उनका जन्म चंदौसी में हुआ था। राजनीति में आने से पहले वे एक शिक्षिका थीं और इंटर कॉलेज में राजनीति शास्त्र की प्रधानाचार्या के रूप में कार्य कर चुकी हैं। 1991 से वे लगातार चंदौसी सीट से चुनाव लड़ती रही हैं, और 2017 व 2022 में उन्होंने शानदार जीत हासिल की। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश सरकार में सामाजिक न्याय राज्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने भूमिका निभाई है। उनके परिवार का भी राजनीतिक जीवन में योगदान है और उनकी बेटियां भी राजनीति से जुड़ी हुई हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है। चुनाव आयोग को दिए गए शपथपत्र के अनुसार, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और वे साफ-सुथरी छवि वाली नेता मानी जाती हैं।
चंदौसी विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में चंदौसी विधानसभा क्षेत्र में कई अहम मुद्दे उभर कर सामने आए हैं। यह इलाका मुस्लिम, अनुसूचित जाति, यादव, मौर्य, ठाकुर और ब्राह्मण जैसे विभिन्न जातीय समूहों से मिलकर बना है, जिससे जातिगत समीकरण हर चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं। समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला रहता है। विकास के मोर्चे पर देखा जाए तो साफ पानी, सड़कें, बिजली, जल निकासी और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी क्षेत्र की बड़ी चिंता बनी हुई है। शिक्षा और स्थानीय रोजगार के अवसरों की कमी से युवा निराश हैं और कई बार उन्हें पलायन का रास्ता अपनाना पड़ता है। स्वास्थ्य सेवाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। अस्पतालों में जरूरी संसाधनों की कमी को लेकर लोग लगातार शिकायत करते रहे हैं। इसके साथ ही महिला सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और पुलिस की कार्यशैली जैसे कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी जनता की नजर में हैं। सामाजिक और धार्मिक सौहार्द बनाए रखना यहां एक और संवेदनशील मुद्दा है, खासकर ऐसे समय में जब कभी-कभी तनाव की स्थिति बनती है। स्थानीय नेतृत्व से लोगों को काफी उम्मीदें हैं, खासकर जब बात विकास योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन की हो। चुनावी रणनीतियों में हर पार्टी जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश करती है। 2022 में भी यही देखा गया जब भाजपा की मजबूत स्थिति के बावजूद समाजवादी पार्टी ने सामाजिक समूहों का समर्थन पाने के लिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की।