चाँदपुर विधानसà¤à¤¾ सीट - Bijnor
चाँदपुर |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | स्वामी ओउ्मवेश |
| जिला | Bijnor |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बिजनौर |
चाँदपुर विधानसभा सीट
चाँदपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश विधान सभा के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यह बिजनौर जिले का एक हिस्सा है और बिजनौर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1957 में हुआ था, जब 1956 में परिसीमन आदेश पारित किया गया था। वर्ष 2008 में 'संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश, 2008' पारित होने के बाद निर्वाचन क्षेत्र को पहचान संख्या 23 दी गई थी।
जनसंख्या विभाजन (जनगणना 2011)
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 23
जनपद: बिजनौर
लोकसभा क्षेत्र: बिजनौर
कुल जनसंख्या: 3,26,504
आरक्षण स्थिति: सामान्य
अनुसूचित जाति जनसंख्या: 5.31 %
धार्मिक और सांप्रदायिक विभाजन
हिन्दू: 27.43%
मुस्लिम: 71.77%
ईसाई: 0.14%
सिख: 0.50%
बौद्ध: 0.02%
जैन: 0.06%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,23,520
विजेता: स्वामी ओमवेश (सपा)
वोट शेयर: 40.5%
उपविजेता: कमलेश सैनी (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 68.7%
चांदपुर विधानसभा सीट, बिजनौर जिले की एक महत्वपूर्ण और सामाजिक-धार्मिक रूप से विविध सीट है, जहां मुस्लिम, दलित, ओबीसी, जाट, त्यागी और ब्राह्मण समुदायों का खासा प्रभाव है। यहां के चुनावों में जातीय समीकरणों के साथ-साथ प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि भी निर्णायक भूमिका निभाती है। स्वामी ओमवेश, इकबाल और कमलेश सैनी जैसे चेहरे बार-बार मुकाबले में दिखाई देते रहे हैं। 1980 के दशक में कांग्रेस और जनता दल का वर्चस्व था, लेकिन 1990 के बाद बसपा, रालोद, भाजपा और सपा ने बारी-बारी से जीत हासिल की। 2000 के बाद से यह सीट चौकोर मुकाबलों का गवाह बनी है। 2022 में सपा के स्वामी ओमवेश ने भाजपा के कमलेश सैनी को महज 234 वोटों से हराया, जबकि 2017 में सैनी ने बसपा के इकबाल को बड़े अंतर से हराया था। 2012 में बसपा के इकबाल ने जीत दर्ज की थी, लेकिन तब से बसपा का प्रभाव घटा है, हालांकि उसका वोट शेयर अब भी ठिक- ठाक है। मुस्लिम, दलित, ओबीसी और जाट मतदाता अक्सर परिणाम तय करते हैं, जबकि हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण और प्रत्याशियों की छवि भी अहम भूमिका निभाते हैं। कई बार दल बदलने के बावजूद प्रत्याशी जीत दर्ज करते रहे हैं, जो स्थानीय लोकप्रियता और व्यक्तिगत प्रभाव की भूमिका को दर्शाता है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
स्वामी ओमवेश ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1993 में समाजवादी पार्टी से की और 1996 में निर्दलीय विधायक के रूप में चुने गए। 2002 में उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के टिकट पर जीत हासिल की और उत्तर प्रदेश सरकार में लोक निर्माण विभाग व गन्ना विभाग में दो बार राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। वह क्षेत्र में एक प्रभावशाली किसान नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी से चांदपुर सीट से चुनाव लड़ते हुए भाजपा प्रत्याशी को मात्र 234 वोटों से हराकर विधायक बने। उनकी छवि एक जनसंपर्क में सक्रिय, किसान हितों के पक्षधर और विकास कार्यों के प्रति समर्पित नेता की है। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले दर्ज हैं।
चांदपुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
चांदपुर क्षेत्र अनेक बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है, जिनमें सबसे गंभीर मुद्दे सड़कों की जर्जर हालत और बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित होता है। स्थानीय लोग लंबे समय से सड़क मरम्मत और निर्माण की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र में बेरोजगारी भी एक बड़ी चिंता है, खासकर युवाओं के बीच, जिन्हें न तो पर्याप्त रोजगार मिल पा रहा है और न ही स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक है सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी, और स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं का अभाव देखा जाता है। चांदपुर की राजनीति मुख्यतः विकास-आधारित रही है, जहां लोग धार्मिक मुद्दों के बजाय सड़कों, सफाई, जल निकासी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जरूरी मुद्दों पर वोट करते हैं। इसके अतिरिक्त, नगर पालिका की लचर सफाई व्यवस्था और जलभराव की समस्याओं को लेकर भी जनता में गहरा असंतोष व्याप्त है।