चरखारी विधानसभा सीट - Mahoba

चरखारी

वर्तमान विधायक
श्री ब्रजभूषण राजपूत
जिला
Mahoba
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
हमीरपुर
चरखारी विधानसभा सीट
चरखारी विधानसभा उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में स्थित है। यह क्षेत्र बुंदेलखंड की राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है और मुख्य रूप से ग्रामीण आबादी के साथ कुछ छोटे शहर केंद्र जैसे कुलपहाड़, चरखारी, पनवारी, जैतपुर और खरेला को कवर करता है। चरखारी का विधानसभा क्रमांक 231 है और यह हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इस सीट पर कोई आरक्षण निर्धारित नहीं है।
जनसांख्यिकी और सांख्यिकीय जानकारी
जनसंख्या (2011): 1,55,407
जिला: महोबा
विधानसभा क्रमांक: 231
लोकसभा क्षेत्र: हमीरपुर
आरक्षण: कोई नहीं
साक्षरता दर: 56.7%
लिंग अनुपात: 873/1,000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (जिला)
हिंदू: लगभग 84%
मुस्लिम: लगभग 13%
अन्य समुदाय: 3%
अनुसूचित जाति: 23-25%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,20,822
विजेता: बृजभूषण राजपूत (भाजपा)
वोट शेयर: 46.2%
उपविजेता: रामजीवन यादव (सपा)
मतदान प्रतिशत: 64.1%
चरखारी विधानसभा का राजनीतिक सफर कई दलों के उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. कभी कांग्रेस, जनसंघ और जनता दल का प्रभाव रहा, तो कभी बसपा और सपा ने अपना झंडा बुलंद किया। लेकिन 2012 के बाद से यहां भाजपा का दबदबा साफ दिखने लगा है। पहले उमा भारती ने जीत दर्ज की, फिर 2017 और 2022 में बृजभूषण राजपूत लगातार दो बार विधायक बने। खास बात यह है कि 2022 के चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के अजेंद्र सिंह राजपूत को 41,881 वोटों से हराया और कुल 1,02,051 वोट हासिल किए। इस चुनाव में कुल मतदान लगभग 45.75% रहा, जिसमें बसपा की विनोद कुमारी तीसरे नंबर पर रहीं और कांग्रेस की स्थिति बेहद कमजोर रही। जातीय समीकरण खासतौर पर लोधी, दलित और ब्राह्मण समुदाय की भूमिका हर बार निर्णायक रही है, लेकिन 2022 में मोदी लहर और भाजपा की मजबूत जातिगत रणनीति सबसे ज्यादा असरदार साबित हुई। अब चरखारी को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जा रहा है, हालांकि हर चुनाव में स्थानीय मुद्दे, सामाजिक समीकरण और प्रत्याशी की छवि अहम भूमिका निभाते हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
बृजभूषण राजपूत, जिन्हें लोग गुड्डु भैया के नाम से भी जानते हैं, चरखारी विधानसभा (महोबा) से भारतीय जनता पार्टी के लोकप्रिय विधायक हैं। उनका जन्म 28 मई 1982 को उरई (उत्तर प्रदेश) में हुआ था और वे एक सामाजिक रूप से जागरूक, युवाओं के बीच लोकप्रिय नेता के रूप में पहचान रखते हैं। पिछड़े वर्ग (राजपूत) समुदाय से आने वाले बृजभूषण राजपूत 2017 और 2022 दोनों चुनावों में भाजपा से जीत हासिल कर लगातार दूसरी बार विधायक बने। किसान और विकास से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता और किसानों के साथ संवेदनशील संवाद के कारण उन्हें क्षेत्र में सराहा जाता है। जहां तक उनके आपराधिक रिकॉर्ड की बात है, तो 2022 विधानसभा चुनाव के नामांकन के समय उन्होंने अपने शपथपत्र में 5 आपराधिक मामला घोषित किया था।
चरखारी विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में महोबा ज़िले की चरखारी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति और जनचर्चा कुछ बेहद ज़मीनी और ज्वलंत मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। सबसे गंभीर समस्या जल संकट की रही। बुंदेलखंड के इस क्षेत्र में सूखा, पीने के पानी की कमी और सिंचाई की व्यवस्था लगातार बदहाल रही, जिससे किसान और आम ग्रामीण जनता बुरी तरह प्रभावित हुए। इसके चलते खेती की हालत भी बिगड़ी, किसान फसल बीमा, मुआवज़ा और समर्थन मूल्य जैसी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहे। रोजगार के मौके बेहद सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में युवा पलायन को मजबूर हुए और स्थानीय स्तर पर रोज़गार व सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता की मांग जोर पकड़ती गई। वहीं, क्षेत्र में सड़क, अस्पताल, स्कूल, बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी, और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप भी लोगों के गुस्से का कारण बने। चरखारी की राजनीति में जातीय समीकरण खासकर लोधी और अन्य प्रभावशाली जातियों की भूमिका भी चुनावों को काफी हद तक प्रभावित करते रहे। भूमाफिया, अवैध खनन और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों ने भी कई बार सुर्खियाँ बटोरीं। इस बीच भाजपा के ब्रजभूषण राजपूत ने 2017 और 2022 में लगातार जीत हासिल कर बीजेपी को मज़बूत स्थिति में बनाए रखा, लेकिन विपक्ष इन जमीनी समस्याओं को लेकर लगातार हमलावर बना रहा। सरकारी स्तर पर जल जीवन मिशन, सड़कों और सिंचाई योजनाओं के कुछ प्रयास ज़रूर हुए, पर ज़मीनी हकीकत में व्यापक सुधार अभी भी जनता की अपेक्षा से दूर है।

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