छानबे विधानसभा सीट - Mirzapur

छानबे

वर्तमान विधायक
श्रीमती रिंकी कोल
जिला
Mirzapur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
अपना दल (सोनेलाल)
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
मिर्जापुर
छानबे विधानसभा क्षेत्र
छानबे विधानसभा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित है और यह मिर्जापुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह क्षेत्र अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और इसका विधानसभा क्रमांक 395 है। छानबे क्षेत्र मुख्य रूप से कोल, आदिवासी, दलित और अन्य पिछड़ी जाति बहुल माना जाता है। स्थानीय राजनीति में पिछड़े एवं दलित मतदाताओं का निर्णायक प्रभाव रहता है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: मिर्जापुर
विधानसभा क्रमांक: 395
लोकसभा क्षेत्र: मिर्जापुर
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: लगभग 5,66,000
साक्षरता दर: लगभग 68.5%
लिंग अनुपात: 903/1000 पुरुष (जिला औसत)
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (अनुमानित)
हिंदू: 75-80%
मुस्लिम: 5-6%
अन्य समुदाय: 20-25%
अनुसूचित जाति: 20% से अधिक
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,13,515
विजेता: राहुल प्रकाश कोल (अपना दल (सोनेलाल))
वोट शेयर: 48.0%
उपविजेता: कीर्ति कोल (सपा)
मतदान प्रतिशत: 56.4%
2023 उपचुनाव
विजेता: रिंकी कोल (अपना दल (सोनेलाल))
वोट शेयर: 46.70%
उपविजेता: कीर्ति कोल (सपा)
छानबे विधानसभा (मिर्जापुर) का राजनीतिक सफर दलित और आदिवासी बहुल सामाजिक ताने-बाने पर गहराई से टिका रहा है। यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, जहां कोल और दलित समुदाय की बड़ी आबादी है। शुरूआती दौर में कांग्रेस, जनता दल और बसपा जैसी पार्टियों को यहां जनता ने मौका दिया, लेकिन 1990 के दशक में जनता दल और बसपा का खासा प्रभाव रहा। 2012 में सपा के भाईलाल कोल ने जीत दर्ज की, लेकिन 2017 से अपना दल (सोनेलाल) ने राजनीति में मज़बूत दखल बनाते हुए लगातार दो चुनावों में जीत हासिल की। 2022 में राहुल प्रकाश कोल ने लगभग 47% वोट पाकर कीर्ति कोल (सपा) को बड़े अंतर से हराया, जबकि बसपा इस बार हाशिए पर चली गई। कुल वोटिंग 57.91% रही और जीत का अंतर 38,113 वोट का था। 2023 में विधायक राहुल कोल के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी रिंकी कोल ने जीत दर्ज कर अपना दल की पकड़ और मजबूत कर दी। बीते कुछ वर्षों में छानबे की राजनीति सपा और अपना दल (एस) के बीच सीधी टक्कर में सिमट गई है, जहां जातिगत समीकरण खासतौर पर कोल और दलित समुदाय निर्णायक भूमिका निभाते हैं। स्थानीय मुद्दे जैसे सड़क, बिजली, शिक्षा और आदिवासी कल्याण यहां चुनावी नतीजों को गहराई से प्रभावित करते रहे हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
रिंकी कोल मिर्जापुर जिले की छानबे विधानसभा से अपना दल (सोनेलाल) की विधायक हैं और एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पति, स्वर्गीय राहुल प्रकाश कोल, इसी सीट से विधायक रह चुके हैं, और 2023 के उपचुनाव में रिंकी कोल ने जीत दर्ज कर उनके राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। स्थानीय और जातीय समीकरणों को समझते हुए वे अपना दल (एस) में सक्रिय और असरदार भूमिका निभा रही हैं। उनका जन्म इसी क्षेत्र में हुआ और वे लंबे समय से स्थानीय राजनीति से जुड़ी रही हैं। 2024 में उनके लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा भी सामने आई थी, हालांकि इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं रही। उपलब्ध रिपोर्टों और दस्तावेजों के अनुसार रिंकी कोल के खिलाफ किसी भी तरह का गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
छानबे विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
छानबे विधानसभा क्षेत्र ने बीते पांच वर्षों में कई ऐसे जमीनी मुद्दों को झेला है जो सीधे-सीधे आम लोगों की ज़िंदगी से जुड़े हैं। सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी कई गांवों में महसूस की जाती है, जहां जर्जर सड़कों और अनियमित बिजली आपूर्ति की शिकायतें आम हैं। चूंकि यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, कोल और दलित समुदायों के सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की प्रभावी पहुँच को लेकर आवाजें उठती रही हैं। कृषि पर निर्भर बड़ी आबादी फसल की कीमत, सिंचाई, बीज-खाद और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाती रही है। वहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सेवाएं अब भी अधूरी तस्वीर पेश करती हैं। सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की दुर्दशा अब भी चुनावी चर्चा में बनी रहती है। राजनीतिक रूप से छानबे में अपना दल (एस) और भाजपा गठबंधन को बढ़त मिली है, लेकिन सपा-बसपा ने भी मुकाबला बनाए रखा। 2023 के उपचुनाव के बाद नए नेतृत्व का उभरना, खासकर युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, राजनीतिक माहौल को नया रंग देने लगा है। बेरोजगारी और युवाओं का पलायन यहां की एक गंभीर सच्चाई रही है, जिससे स्वरोजगार और स्किल ट्रेनिंग जैसे विकल्पों की माँग बढ़ी है। साथ ही, सामाजिक समरसता, अवैध खनन, शराब तस्करी और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों ने भी चिंता बढ़ाई है। कुल मिलाकर, छानबे का समाज आज भी एक ऐसे विकास मॉडल की राह देख रहा है, जो सभी को साथ लेकर चले और ज़मीन पर असर दिखाए।

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