छपरौली विधानसभा सीट - Bagpat

छपरौली

वर्तमान विधायक
डॉo अजय कुमार
जिला
Bagpat
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
राष्ट्रीय लोक दल
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
बागपत
छपरौली विधानसभा क्षेत्र (बागपत, उत्तर प्रदेश)
छपरौली (विधानसभा सीट संख्या 50) उत्तर प्रदेश की बागपत लोकसभा सीट का हिस्सा है। यह एक ग्रामीण-प्रधान क्षेत्र है, जहाँ जाट और गुर्जर मतदाताओं की संख्या प्रमुख है। यह सीट पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय लोक दल और जनता दल के विभिन्न गुटों का गढ़ रही है, जो यहां की कृषि-आधारित और जातीय राजनीतिक संरचना को दर्शाता है।
जनसंख्या विवरण
- कुल मतदाता (2022): 3.17–3.5 लाख
- मुख्य समुदाय:
- जाट: 30–35% (प्रमुख वोट बैंक)
- गुर्जर:15–20%
- एससी (वाल्मीकि, धनगर): 10–15%
- मुस्लिम: 10–15%
- साक्षरता दर: 65–70%
चुनावी रुझान और नतीजे
2022 विधानसभा चुनावी नतीजे
विजेता: अजय कुमार  (रालोद)
वोट शेयर: 53.30%
उपविजेता: सहेन्दर सिंह रामाला (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 62.6%
छपरौली विधानसभा क्षेत्र के ऐतिहासिक चुनावी रुझान यह दर्शाते हैं कि यह सीट लंबे समय से राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) का मजबूत गढ़ रही है। 2022 में अजय कुमार ने किसान आंदोलन और जाट समुदाय की एकजुटता का भरपूर लाभ उठाकर बड़ी जीत दर्ज की। इससे पहले 2017 में सहेन्दर सिंह रामाला ने भाजपा के सतेंद्र सिंह को केवल 3,842 वोटों से हराया था। 2012 में भी रालोद के वीरपाल राठी ने बसपा के देवपाल सिंह को 21,571 वोटों से हराया, जबकि 1996 में गजेन्द्र कुमार मुन्ना (BKKGP) ने भारी अंतर से जीत हासिल की थी। 1989 में नरेंद्र सिंह (जनता दल) ने 84% वोट प्राप्त कर क्षेत्र के इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो रालोद की पकड़ मुख्य रूप से जाट समुदाय के समर्थन पर आधारित रही है, जो 2020–21 के किसान आंदोलन के बाद और मजबूत हुई। 2022 में पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में रहते हुए छपरौली सीट से अकेले चुनाव लड़ा और अपना जनाधार बरकरार रखा। दूसरी ओर, भाजपा ने गैर-जाट ओबीसी समुदायों (जैसे गुर्जर और त्यागी) और हिंदू एकता पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन सहेन्दर सिंह रामाला को जाट वोटबैंक में सेंध लगाने में सफलता नहीं मिली। वहीं, बसपा का प्रभाव तेजी से घटा, और उसका वोट शेयर 2012 के लगभग 30% से गिरकर 2022 में सिर्फ 4.66% रह गया।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
अजय कुमार, जो राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के सदस्य हैं, वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा की 18वीं विधानसभा के सदस्य हैं और छपरौली विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। अजय कुमार ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की और वे एक कृषक और शिक्षक के रूप में कार्य करते हैं। अजय कुमार ने 2002 में पहली बार छपरौली से विधायक के रूप में चुनाव जीता और 2002-2007 तक 14वीं विधानसभा के सदस्य रहे। फिर, 2022 में रालोद प्रत्याशी के रूप में उन्होंने छपरौली सीट पर भाजपा के सहेंदर सिंह को 29,508 वोटों के अंतर से हराया. चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
छपरौली विधानसभा क्षेत्र के पिछले 5 साल
पिछले पाँच वर्षों में छपरौली विधानसभा क्षेत्र में कई अहम मुद्दे सामने आए, जो स्थानीय जनता, खासकर किसानों और युवाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बने रहे। सबसे प्रमुख मुद्दा गन्ना किसानों से जुड़ा रहा बकाया भुगतान, ब्याज न मिलना और रमाला चीनी मिल की कार्यप्रणाली को लेकर नाराज़गी बनी रही। सरकार द्वारा कुछ प्रयासों के बावजूद गन्ना भुगतान में देरी ने इस नगदी फसल को किसानों के लिए 'उधारी की फसल' बना दिया। बिजली आपूर्ति में सुधार जरूर हुआ, लेकिन ट्रांसफॉर्मर की क्षमता, बिल और रखरखाव को लेकर शिकायतें जारी रहीं। आवारा पशुओं की समस्या भी गहराई, जिससे किसानों को फसल की रखवाली के लिए रातभर जागना पड़ा। रोजगार के क्षेत्र में निजी नौकरियों की भारी कमी और सरकारी भर्तियों की सीमित उपलब्धता से युवा बेरोजगार रहे। जातिगत समीकरणों में जाट, मुस्लिम, कश्यप, दलित और गुर्जर जैसे प्रमुख समुदायों की राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव आया, हालांकि जाटों का झुकाव अब भी RLD की ओर ज्यादा रहा। वहीं, जनप्रतिनिधियों की क्षेत्र में सक्रियता की कमी को लेकर भी असंतोष बना रहा। इसके अतिरिक्त, बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने की मांग लगातार बनी रही।

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