छपरौली विधानसभा से विधायक अजय कुमार का राजनीतिक सफर, शिक्षा, प्रमुख कार्य, उपलब्धियां और जनाधार
10 June, 2026 | Desk

छपरौली विधानसभा से विधायक अजय कुमार का राजनीतिक सफर, शिक्षा, प्रमुख कार्य, उपलब्धियां और जनाधार

छपरौली विधानसभा
अजय कुमार राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के वरिष्ठ नेता और बागपत जिले की छपरौली विधानसभा सीट से विधायक हैं। उनका जन्म 1 नवंबर 1957 को हुआ था। वे डॉक्टरेट तक शिक्षित हैं और पूर्व में प्रोफेसर रह चुके हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी घोषित संपत्ति लगभग 4.5 करोड़ रुपये है तथा उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है। राजनीति के साथ-साथ वे समाज सेवा और किसान हितों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
राजनीतिक सफर
  • वर्ष 2002 में पहली बार छपरौली विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।
  • 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद प्रत्याशी के रूप में भाजपा के सहेन्द्र सिंह को हराकर पुनः विधायक बने।
  • रालोद के पूर्व विधायक वीरपाल राठी का टिकट कटने के बाद पार्टी ने उन पर भरोसा जताया।
  • जाट–मुस्लिम गठजोड़, किसान राजनीति और ग्रामीण जनाधार के बीच उन्होंने मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई।
  • बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का लगातार दौरा कर विधानसभा और सरकार के सामने स्थानीय समस्याओं को उठाया।
प्रमुख कार्य और उपलब्धियां
  • किशनपुर–बराल मार्ग के चौड़ीकरण तथा सड़क सुधार कार्यों को प्राथमिकता दी।
  • बाढ़ राहत कार्यों, सिंचाई परियोजनाओं और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।
  • गन्ना किसानों के भुगतान और मंडी संबंधी समस्याओं को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया।
  • शिक्षा के क्षेत्र में नए विद्यालयों की मांग तथा स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में सहयोग किया।
  • गरीब, मजदूर और किसान परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाए।
छपरौली के प्रमुख नेता
  • चौधरी चरण सिंह पूर्व प्रधानमंत्री रहे और किसान हितों, भूमि सुधार तथा जमींदारी उन्मूलन के लिए ऐतिहासिक योगदान दिया।
  • चौधरी अजित सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे और उन्होंने ग्रामीण उद्योग, सिंचाई तथा कृषि विकास को नई दिशा दी।
  • सहेन्द्र सिंह भाजपा के प्रमुख नेता रहे और क्षेत्र में संगठन विस्तार के लिए सक्रिय रहे।
  • वीरपाल राठी पूर्व विधायक रहे और स्थानीय राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं।
क्षेत्रीय विशेषताएं
छपरौली पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान राजनीति, चौधरी चरण सिंह की विरासत और जाट–मुस्लिम सामाजिक समीकरण के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र है। यहां कृषि, सिंचाई, शिक्षा और ग्रामीण विकास प्रमुख चुनावी मुद्दे रहे हैं।