छर्रा विधानसà¤à¤¾ सीट - Aligarh
छर्रा |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री रवेन्द्र पाल सिंह |
| जिला | Aligarh |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | हाथरस |
छर्रा विधानसभा सीट प्रोफ़ाइल
छर्रा उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में स्थित एक विधानसभा क्षेत्र है। यह हाथरस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। छर्रा, अलीगढ़ के इतिहास का हिस्सा है। स्वतंत्रता के बाद छर्रा एक कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में उभरा, जिसकी राजनीतिक पहचान भी समय के साथ मजबूत हुई। हालांकि अलीगढ़ शहर में साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएं देखी गई हैं, छर्रा का ग्रामीण चरित्र अधिकतर जातीय समीकरणों पर आधारित रहा है। यहाँ की प्रमुख विशेषताओं में खेती (गेहूं, गन्ना, सरसों), अलीगढ़ की ताला उद्योग का प्रभाव, हिंदू-मुस्लिम सांस्कृतिक मेल, और शिक्षा के प्रति युवाओं की बढ़ती आकांक्षा शामिल हैं।
जनसंख्या और जनसांख्यिकी
कुल जनसंख्या (2011 जनगणना): 21,146
पुरुष: 11,052
महिलाएं: 10,094
साक्षरता दर: 62.4%
पुरुष साक्षरता: 70.5%
महिला साक्षरता: 53.6%
अनुसूचित जाति की जनसंख्या: 1,677
सामुदायिक और धार्मिक विभाजन
धार्मिक संरचना:
हिंदू: 63.12%
मुस्लिम: 36.57%
ईसाई, सिख, बौद्ध एवं अन्य: कुल मिलाकर 1% से भी कम
इस क्षेत्र में हिंदू समुदाय बहुसंख्यक है, जबकि मुस्लिम आबादी भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा रखती है।
चुनावी रुझान और इतिहास
2022 विधानसभा चुनाव:
विजेता: रवेंद्र पाल सिंह (भाजपा)
मुख्य प्रतिद्वंद्वी: लक्ष्मी धनगर (सपा)
मतों का अंतर: 24,327
मतदान प्रतिशत: 60–65%
छर्रा विधानसभा क्षेत्र, जिसकी स्थापना 2008 में परिसीमन आदेश के बाद हुई, 2017 से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गढ़ बनकर उभरा है। रवेंद्र पाल सिंह ने 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज कर इस क्षेत्र में भाजपा की मजबूत पकड़ बना दी है। 2012 में यह सीट समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीती थी, लेकिन इसके बाद से मतदाताओं का रुझान स्पष्ट रूप से भाजपा की ओर झुका है। इस बदलाव में ठाकुर समुदाय (लगभग 90,000 मतदाता) और अन्य हिंदू समुदायों का निर्णायक समर्थन प्रमुख कारण रहा है। सपा और बसपा सक्रिय रूप से चुनाव लड़ते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में उनके सर्मथकों में कमी आई है। चुनावी मुद्दे मुख्यतः विकास और जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमते हैं, जिसमें किसान वर्ग की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
रवेंद्र पाल सिंह, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े हैं, अलीगढ़ के छर्रा विधानसभा क्षेत्र से 2017 और 2022 में लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं। वे व्यवसायी हैं और शैक्षणिक योग्यता के रूप में दसवीं पास हैं। 2024 के अनुसार उनकी कुल संपत्ति ₹8.05 करोड़ है और उन पर कोई वित्तीय दायित्व नहीं है। 2022 के चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार लक्ष्मी ढांगर को 18,913 मतों से हराया था। खास बात यह है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, जिससे वह उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं जिनकी छवि साफ-सुथरी मानी जाती है। लेकिन कुछ खबरों के अनुसार अक्टूबर 2022 में विधायक के समर्थकों ने टोल कर्मचारियों से मारपीट की थी। घटना सीसीटीवी में कैद हुई और पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया था।
छर्रा विधानसभा के पिछले 5 साल
छर्रा विधानसभा क्षेत्र के पिछले पांच वर्षों को देखने में कई प्रमुख सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामने नजर आती हैं। क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की कमी, जैसे खराब सड़कें और पीने के पानी तथा स्वच्छता की समस्याएं, लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं। कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं की कमी और फसल बीमा में देरी किसानों के लिए चिंता का विषय है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी भारी कमियाँ हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपलब्धता प्रमुख समस्याएं हैं। इसके अलावा, बेरोजगारी और स्थानीय उद्योगों के विकास की धीमी गति आर्थिक विकास में बाधा बन रही है। जातिगत तनाव, सामाजिक असमानता और महिला सशक्तिकरण जैसे सामाजिक मुद्दे भी क्षेत्र की समग्र प्रगति के लिए चुनौतियां बने हुए हैं।