ददरौल विधानसभा सीट - Shahjahanpur

ददरौल

वर्तमान विधायक
श्री अरविन्द कुमार सिंह
जिला
Shahjahanpur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
शाहजहांपुर
ददरौल विधानसभा सीट
ददरौल उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले की एक प्रमुख विधानसभा सीट है। इसका विधानसभा क्रमांक 136 है और यह शाहजहांपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट मुख्यतः ग्रामीण, कृषिप्रधान क्षेत्र है, जिसमें कई ब्लॉक और कस्बे आते हैं। यहाँ अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि, पशुपालन और छोटे उद्योग हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: शाहजहांपुर
विधानसभा क्रमांक: 136
लोकसभा क्षेत्र: शाहजहांपुर
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: लगभग 3,50,000
साक्षरता दर: अनुमानित 60-65%
लिंग अनुपात: 900/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 85%
मुस्लिम: लगभग 14%
अन्य समुदाय: लगभग 1%
अनुसूचित जाति: करीब 16-18%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता:2,23,062
विजेता: मनवेन्द्र सिंह (भाजपा)
वोट: 45.3%
उपविजेता: राजेश कुमार वर्मा (सपा)
मतदान प्रतिशत: 62.8%
ददरौल विधानसभा सीट, जो शाहजहांपुर जिले का हिस्सा है, 1967 में बनी और शुरूआती दौर में यहां कांग्रेस का दबदबा रहा, जहाँ राममूर्ति अंचल और रामऔतार मिश्र जैसे नेताओं ने कई बार जीत दर्ज की। बाद के वर्षों में यह सीट लगातार राजनीतिक बदलावों की गवाह बनी, जहां जनता दल, बसपा, सपा और भाजपा ने बारी-बारी से अपना असर दिखाया। 2002 और 2007 में बसपा के अवधेश कुमार वर्मा, 2012 में सपा के राममूर्ति सिंह वर्मा, और 2017 में भाजपा के मानवेंद्र सिंह विजयी रहे। 2024 के उपचुनाव में भाजपा के अरविंद कुमार सिंह ने जीत हासिल की। 2022 में कुल 3,02,364 मतदाताओं में से लगभग 63% मतदान हुआ, जिसमें भाजपा के मानवेंद्र सिंह ने 45.06% वोट पाकर सपा के राजेश कुमार वर्मा को 9,701 वोटों से हराया। ददरौल औद्योगिक केंद्र माना जाता है और यहां पिछड़े व अगड़े वर्ग दोनों का राजनीतिक प्रभाव झलकता है, यही वजह है कि यह सीट हमेशा बदलते सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच चर्चा में रहती है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
मनवेन्द्र सिंह, उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले की ददरौल विधानसभा सीट से भाजपा के पूर्व विधायक रहे। 4 जनवरी 1954 को जन्मे मनवेन्द्र सिंह ने छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू किया और लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे। इसके बाद वे बसपा में शामिल हुए और अंततः 2017 में भाजपा का हिस्सा बने। उन्होंने 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में ददरौल सीट से जीत दर्ज की। पेशे से किसान रहे मनवेन्द्र सिंह अपनी सादगी, सहज स्वभाव और जमीन से जुड़े रहने की वजह से स्थानीय राजनीति में खासे लोकप्रिय थे। 2022 चुनावी हलफनामें के अनुसार उनके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं था।
ददरौल विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच सालों में ददरौल विधानसभा में जनता की सबसे बड़ी परेशानियाँ बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी रहीं। क्षेत्र में जर्जर पुलों और टूटी सड़कों की मरम्मत की मांग लगातार उठती रही, लेकिन काम की रफ्तार धीमी रही। किसानों को नहरों की सफाई, सिंचाई व्यवस्था और गर्मियों में पानी की किल्लत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। गाँवों में बिजली-पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतें पूरी नहीं हो पाईं और पंचायत स्तर पर विकास योजनाएँ भी सुस्त रहीं। रोजगार के मोर्चे पर भी स्थिति बेहतर नहीं हुई पुराने लघु उद्योग और मिलें बंद होने से बेरोजगारी और पलायन बढ़ा, जबकि नए उद्योग-कारखानों की स्थापना की मांग अधूरी रही। प्रशासनिक सुस्ती और जनसुनवाई की कमी ने लोगों की नाराज़गी और बढ़ा दी। वहीं, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में संसाधनों और स्टाफ की कमी ने स्थिति और गंभीर बना दी। इन सभी मुद्दों का असर सीधे तौर पर चुनावी राजनीति और आम जनजीवन पर दिखा।

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