दादरी विधानसà¤à¤¾ सीट - Gautam Budh Nagar
दादरी |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री तेजपाल सिंह नागर |
| जिला | Gautam Budh Nagar |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | गौतम बुद्ध नगर |
दादरी विधानसभा सीट
दादरी विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से एक है। यह गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित है और गौतम बुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह क्षेत्र दादरी कस्बे और ग्रेटर नोएडा के कुछ हिस्सों को शामिल करता है। दादरी एक तेज़ी से विकसित हो रहा क्षेत्र है, जिसमें शहरी और ग्रामीण जनसंख्या का मिश्रण है। यह नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक व आवासीय केंद्रों के निकट होने के कारण महत्वपूर्ण है। परिसीमन के बाद 2008 में इस क्षेत्र को विधानसभा सीट संख्या 62 दी गई। दादरी में पहला चुनाव 1957 में हुआ था।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: गौतम बुद्ध नगर
विधानसभा क्रमांक: 62
कस्बे की जनसंख्या (2017): लगभग 91,189
लिंगानुपात: 866/1000
साक्षरता दर: 74.37% (दादरी)
धार्मिक और जातीय विभाजन
हिन्दू: 64.16%
मुस्लिम: 35.22%
अन्य: 1 से कम
अनुसूचित जाति (अन्य): 11.61%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 3,51,744
विजेता: तेजपाल सिंह नागर (भाजपा)
वोट शेयर: 62%
उपविजेता: राजकुमार भाटी (सपा)
मतदान प्रतिशत: 58.3%
दादरी विधानसभा सीट, जो गौतमबुद्ध नगर जिले में स्थित है, राजनीतिक रूप से एक विविध इतिहास की साक्षी रही है। यह क्षेत्र कभी किसी एक दल का स्थायी गढ़ नहीं रहा है। यहां भाजपा, बसपा और सपा सभी को अलग-अलग समय पर जीत मिली है। 2007 और 2012 में बसपा के सतवीर सिंह गुर्जर ने लगातार दो बार जीत दर्ज की, जबकि 2017 और 2022 में भाजपा के तेजपाल सिंह नागर विजयी रहे, जिससे भाजपा की पकड़ इस क्षेत्र में मजबूत हुई। दादरी की राजनीति में गुर्जर समुदाय का खासा प्रभाव रहा है और पिछले चार चुनावों में जीतने वाले सभी विधायक इसी समुदाय से रहे हैं। सामाजिक दृष्टि से यह सीट बेहद मिश्रित है, जहां ग्रेटर नोएडा जैसे शहरी क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण गांव, दोनों शामिल हैं, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के मुद्दे चुनावी चर्चा में रहते हैं। हालिया चुनावी रुझानों में देखा गया है कि भले ही वोटों का बंटवारा विभिन्न दलों में होता रहा हो, लेकिन भाजपा ने लगातार दो चुनावों में मजबूत जीत दर्ज की है। भूमि अधिग्रहण, किसान मुआवजा, शहरीकरण, बुनियादी सुविधाओं की कमी, बेरोजगारी और जातीय संतुलन यहां के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत शहरी इलाकों की तुलना में अधिक रहता है। 2022 के चुनाव में भाजपा के तेजपाल सिंह नागर ने समाजवादी पार्टी के राजकुमार भाटी को बड़े अंतर से हराया।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
तेजपाल सिंह नागर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं और उत्तर प्रदेश की दादरी विधानसभा सीट से लगातार दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर कॉलेज जीवन में मिहिर भोज छात्र संघ के महामंत्री और अध्यक्ष बनने से शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने दादरी सहकारी संघ और जिला पंचायत के चुनावों में सफलता प्राप्त की, वे 1995, 2000 और 2005 में लगातार तीन बार जिला पंचायत सदस्य चुने गए, जिससे उनकी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ बनी। 2017 में भाजपा ने उन्हें दादरी से टिकट दिया, जहां उन्होंने पहली बार 80,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के राजकुमार भाटी को रिकॉर्ड 1,38,218 वोटों से हराकर 2,18,068 वोट प्राप्त किए, जिससे उनका वोट प्रतिशत 61.4% तक पहुंच गया। वे एक जनप्रिय, जमीन से जुड़े और विकास कार्यों में सक्रिय विधायक के रूप में जाने जाते हैं। 2022 के चुनावी शपथपत्र के अनुसार, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उनकी छवि एक ईमानदार और साफ-सुथरे जनप्रतिनिधि की रही है।
दादरी विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच सालों में दादरी विधानसभा क्षेत्र में कई अहम मुद्दे सामने आए जो लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और विकास से जुड़े रहे। ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में बड़ी-बड़ी परियोजनाओं के लिए किसानों की ज़मीन ली गई, लेकिन मुआवज़ा, पुनर्वास और सही कीमत को लेकर किसानों में नाराज़गी रही और उन्होंने कई बार आंदोलन भी किए। इलाके में तेजी से शहरीकरण तो हुआ, लेकिन गांवों और नई कॉलोनियों में सड़क, पानी, बिजली, सीवर, अस्पताल, स्कूल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी ज़रूरी सुविधाएं अब भी काफी पीछे हैं।
यहां इंडस्ट्री होने के बावजूद, स्थानीय युवाओं को नौकरी के ज़्यादा मौके नहीं मिल पाए, जिससे बेरोज़गारी का संकट और गहरा गया. खासतौर पर बाहरी मज़दूरों के आने से। किसानों को भी सिंचाई, खाद-बीज, लागत और फसल के सही दाम जैसी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। साथ ही, कारखानों और प्रोजेक्ट्स के बढ़ने से हवा-पानी का प्रदूषण, कूड़ा प्रबंधन और पेड़-पौधों की कमी जैसी पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ीं।
दादरी की आबादी जातीय रूप से भी काफी विविध है। यहां गुर्जर, जाट, यादव, दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़ी जातियों की संख्या काफी है। इन समुदायों से जुड़े हक और प्रतिनिधित्व के सवाल लगातार राजनीति का हिस्सा बने रहे। वहीं, शहर फैलने के साथ ज़मीन पर कब्ज़ा, अपराध और कानून-व्यवस्था से जुड़ी दिक्कतें भी बढ़ीं, जिससे लोगों में असुरक्षा की भावना बनी रही।