दरियाबाद विधानसभा सीट - Barabanki

दरियाबाद

वर्तमान विधायक
श्री सतीश चन्द्र शर्मा
जिला
Barabanki
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
फैजाबाद
दरियाबाद विधानसभा
दरियाबाद उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीट संख्या 270 है, जो बाराबंकी ज़िले में स्थित है। यह क्षेत्र दरियाबाद नगर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करता है और फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी में आती है और मुख्यतः ग्रामीण स्वरूप की है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सतीश चंद्र शर्मा ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अरविंद कुमार सिंह गोपे को 32,402 मतों से हराया था।
जनसंख्या
निर्वाचन क्षेत्र संख्या: 270
ज़िला: बाराबंकी
लोकसभा क्षेत्र : फैज़ाबाद
आरक्षण स्थिति: नहीं (सामान्य)
नगर जनसंख्या (2021):18,338
(2011 जनगणना: 18,338
लिंगानुपात: 949/1000
साक्षरता दर (नगर): 63.2%
मतदाता संख्या (2022): लगभग 2.7–3.0 लाख
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 80–85%
मुस्लिम: 13–18%
अनुसूचित जाति जनसंख्या: अनुमानित 29.36%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
विजेता: सतीश चंद्र शर्मा (भाजपा)
वोट शेयर: 46.87%
उपविजेता: अरविंद सिंह गोप (सपा)
दरियाबाद विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास लंबे समय तक राजा राजीव कुमार सिंह के प्रभुत्व में रहा, जिन्होंने 1985 से 2012 तक छह बार विधायक रहते हुए कभी निर्दलीय तो कभी कांग्रेस, भाजपा और सपा के टिकट पर चुनाव जीता और प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। हालांकि, 2017 में इस वर्चस्व को चुनौती देते हुए भाजपा के सतीश चंद्र शर्मा ने राजीव कुमार सिंह को 50,686 वोटों के बड़े अंतर से हराकर दरियाबाद की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया। इसके बाद 2022 में भी सतीश चंद्र शर्मा ने सपा के अरविंद सिंह गोप को 32,402 वोटों से हराकर भाजपा की लगातार दूसरी जीत दर्ज की। 2022 में सतीश चंद्र शर्मा को 1,28,219 (46.87%) वोट मिले, जबकि सपा को 35.03% और बसपा को 10.37% वोट मिले। 2012 में यह सीट सपा के राजीव कुमार सिंह ने 19,894 वोटों के अंतर से जीती थी। मतदाता संरचना की बात करें तो यहां कुल 4 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें दलित और ओबीसी समुदाय की संख्या सबसे अधिक है, इसके बाद ब्राह्मण, मुस्लिम और ठाकुर समुदाय आते हैं। दरियाबाद सीट अवध क्षेत्र की प्रमुख सीटों में मानी जाती है, जहां चुनावी नतीजों को किसान, जातीय समीकरण और स्थानीय नेतृत्व जैसे फैक्टर प्रमुख रूप से प्रभावित करते हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
सतीश चंद्र शर्मा, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में जन्मे एक शिक्षित, सक्रिय और जमीनी स्तर के राजनेता हैं। स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त सतीश शर्मा पेशे से शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि मजबूत रही है। उनके दादा अवधेश शर्मा RSS पदाधिकारी और भाजपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। सतीश शर्मा ने 2007 में भाजपा युवा मोर्चा से राजनीति में कदम रखा और 2010 व 2015 में दो बार जिला पंचायत सदस्य चुने गए। 2017 में उन्होंने दरियाबाद विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बनते हुए छह बार के विधायक व पूर्व मंत्री राजीव कुमार सिंह को पराजित किया और 2022 में सपा के अरविंद सिंह गोप को हराकर दोबारा जीत हासिल की। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश सरकार में खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग में राज्य मंत्री हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे के विकास पर उनका विशेष ध्यान रहता है और उनकी संगठन में भी मजबूत पकड़ है। 2022 चुनावी हलफनामों के अनुसार, उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
दरियाबाद विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़ी कई अहम समस्याएं और मांगें सामने आईं। सड़क, पुल और ओवरब्रिज निर्माण जैसे कार्य जैसे सिल्हौर, सदेवा, दुल्लापुर घाट और सरयू नदी पर पक्का पुल, रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज और 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर पुलों का निर्माण स्थानीय राजनीति में केंद्र में रहे। 400 गांवों तक बिजली पहुंचाना, नए बस अड्डे की आवश्यकता और दरियाबाद व पूरेडलई के लिए बस सेवा की मांग भी चर्चा में रही। वहीं, स्टेडियम की स्वीकृति और रामसनेहीघाट को नगर पंचायत का दर्जा देने की मांग भी उठती रही। स्वास्थ्य क्षेत्र में भिटरिया में मिनी ट्रॉमा सेंटर की स्वीकृति तो मिली, लेकिन मथुरानगर और टिकैतनगर सीएचसी पर बुनियादी सुविधाओं की कमी और महिला डॉक्टरों की अनुपलब्धता गंभीर चिंता का विषय बनी रही। बाढ़ भी एक बड़ी चुनौती रही, विशेषकर सरयू, कल्याणी और रारी नदियों के किनारे बसे गांवों में, जहां हर साल बाढ़ से फसल और जनजीवन प्रभावित होता है। किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) न मिलना, बिचौलियों पर निर्भरता और आवारा पशुओं से फसल की सुरक्षा की समस्या बनी रही। गन्ना किसानों को भुगतान में देरी और सिंचाई की कमी भी संकट के रूप में बनी रही। शिक्षा की गुणवत्ता, स्कूलों और शिक्षकों की संख्या को लेकर असंतोष देखा गया, वहीं स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी एक बड़ी चुनौती है। सामाजिक न्याय के मोर्चे पर अनुसूचित जाति, पिछड़े और मुस्लिम समुदाय के सम्मान और सुविधाओं के विस्तार की मांग लगातार उठती रही, जो इस क्षेत्र के सामाजिक संतुलन और राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रही।

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