धामपुर विधानसà¤à¤¾ सीट - Bijnor
धामपुर |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | अशोक कुमार राणा |
| जिला | Bijnor |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | 2,04,233 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | नग़ीना |
धामपुर विधानसभा सीट
धामपुर उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले की विधानसभा क्षेत्र संख्या 20 है। यह एक महत्वपूर्ण सीट है, जनसांख्यिकीय और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से। यह नग़ीना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट शहरी और ग्रामीण आबादी के मिश्रण वाली है, जिसमें धामपुर नगर इसका मुख्य शहरी केंद्र है।
जनसंख्या और जनसांख्यिकी विभाजन (जनगणना 2011)
कुल जनसंख्या (तहसील स्तर पर): 11,23,962
पुरुष: 5,85,405
महिलाएं: 5,38,557
लिंगानुपात: 920/1,000
आरक्षण स्थिति: सामान्य
साक्षरता दर (नगर): 79.91%
अनुसूचित जाति: (तहसील): 20.8%
नगर: 2.4%
धार्मिक और सांप्रदायिक विभाजन (जनगणना 2011)
हिंदू: 54.99%
मुस्लिम: 42.93%
सिख: 1.62%
ईसाई: 0.19%
जैन : 0.12%
बौद्ध: 0.02%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,04,233
विजेता: अशोक कुमार राणा (भाजपा)
वोट शेयर: 39.8%
उपविजेता: नईमुल हसन (सपा)
मतदान प्रतिशत: 67.5%
धामपुर विधानसभा सीट का गठन 1956 में परिसीमन के बाद हुआ था, और यहां पहली बार 1957 में चुनाव हुए। इस सीट पर लंबे समय से मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच होता रहा है। 1990 के दशक में भाजपा ने यहां मजबूत पकड़ बनाई, जबकि 2000 के दशक में सपा और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का प्रभाव भी दिखा। अशोक कुमार राणा (जो पहले बसपा में थे और बाद में भाजपा में आए), मूलचंद चौहान (सपा/बसपा), और राजेंद्र सिंह (भाजपा) जैसे नेता प्रमुख चेहरे रहे हैं। अशोक कुमार राणा ने 2007 में बसपा, 2017 और 2022 में भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की, जबकि सपा के मूलचंद चौहान ने 2002 और 2012 में जीत दर्ज की थी। 2022 में भाजपा के अशोक कुमार राणा ने सपा के नईमुल हसन को मात्र 203 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया, जबकि 2017 में उन्होंने सपा के मूलचंद चौहान को 17,864 वोटों से हराया था। 2012 में सपा के मूलचंद चौहान ने बसपा के राणा को सिर्फ 564 वोटों से हराया था। इन आंकड़ों से साफ है कि पिछले तीन चुनावों में भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला रहा है। बसपा का प्रभाव 2007 के बाद लगातार घटा है, जबकि कांग्रेस और अन्य दलों की भूमिका नगण्य रही है। अशोक कुमार राणा की व्यक्तिगत छवि और दल बदल का उनके राजनीतिक कॅरियर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
अशोक कुमार राणा, उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद स्थित हरी ठाठजट गांव के निवासी हैं, जिनका जन्म 1960/1961 में हुआ था। उन्होंने 1978 में देहरादून के सेंट थॉमसन कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की और कृषक एवं व्यवसायी के रूप में कार्य किया। उनका राजनीतिक सफर 1989 में जनता दल से स्योहारा सीट से विधायक निर्वाचित होकर शुरू हुआ। इसके बाद वे 2007 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से, और 2017 व 2022 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से धामपुर सीट से विधायक बने। अब तक वे कुल चार बार विधायक रह चुके हैं। वे जनता दल, बसपा, भाजपा और रालोद सहित विभिन्न दलों से जुड़े रहे हैं। अशोक कुमार राणा के खिलाफ कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। 2012 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने धोखाधड़ी, मारपीट, शस्त्र अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट, अपहरण, डकैती, हत्या के प्रयास, सार्वजनिक हिंसा और एससी/एसटी एक्ट जैसी गंभीर धाराओं वाले मामलों का उल्लेख किया था, जिनमें से अधिकांश 1990 और 2000 के दशक के हैं। मई 2024 में उन पर और उनके पुत्र पर बिजनौर के जीएस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड प्लांट में आगजनी, फायरिंग, रंगदारी और धमकी जैसे गंभीर आरोप लगे, जिनके तहत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। 2025 तक उनके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मुकदमे न्यायिक प्रक्रिया में हैं। हालांकि, 2022 के हलफनामे में उन्होंने कोई मामला दर्ज नहीं बताया था।
धामपुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में धामपुर विधानसभा क्षेत्र में कई प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं, जो लगातार चुनावी विमर्श का हिस्सा बने रहे। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से गन्ना किसानों पर आधारित है, जिनकी प्रमुख समस्याओं में गन्ने का समय पर भुगतान न होना, बकाया राशि, मिलों की सीमित क्षमता, और गन्ना मूल्य वृद्धि की मांग शामिल रही। इसके अलावा, सड़क, बिजली, और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में कच्ची सड़कों और शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम व सीवर की समस्या ने जनजीवन को प्रभावित किया। कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर भी जनता में असंतोष रहा, खासकर चोरी, छेड़छाड़ और पुलिस की निष्क्रियता जैसी घटनाओं को लेकर। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और सुविधाओं की कमी, तथा अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की अनुपलब्धता जैसी चुनौतियाँ बनी रहीं। बेरोजगारी और युवाओं की समस्याएँ भी गंभीर मुद्दे रहे, जहां रोजगार के अवसरों की कमी और स्वरोजगार के लिए संसाधनों का अभाव देखा गया। वहीं, मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्गों की बड़ी आबादी वाले इस क्षेत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, योजनाओं में भागीदारी, और सामाजिक न्याय से जुड़े सवाल भी प्रमुखता से उठते रहे।