धनघटा विधानसà¤à¤¾ सीट - Sant Kabir Nagar
धनघटा |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री गणेश चंद्र |
| जिला | Sant Kabir Nagar |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | संत कबीर नगर |
धनघटा विधानसभा क्षेत्र
धनघटा विधानसभा उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में स्थित एक अनुसूचित जाति (SC) रिजर्व सीट है। यह संत कबीर नगर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। क्षेत्र में चौहान और माझी समुदायों की संख्या अधिक है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि, सूती उद्योग और स्थानीय व्यापार पर आधारित है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: संत कबीर नगर
विधानसभा क्रमांक: 314
लोकसभा क्षेत्र: संत कबीर नगर
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: लगभग 400,000
साक्षरता दर: 70%
लिंग अनुपात: 920/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 68.79%
मुस्लिम: 30.08%
अन्य समुदाय: 1% से कम
अनुसूचित जाति: 20% के आसपास (अनुमानित)
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,14,307
विजेता: गणेश चंद्र चौहान (भाजपा)
वोट शेयर: 38.8%
उपविजेता: अलगू प्रसाद (सुभासपा)
मतदान प्रतिशत: 56.0%
धनघटा विधानसभा, संत कबीर नगर जिले की अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित सीट है, जिसे पहले हैसर विधानसभा के नाम से जाना जाता था और 1997 में जिले की स्थापना के बाद इसका नाम बदलकर धनघटा कर दिया गया। यहां चौहान और माझी जाति के मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं। लंबे समय तक इस क्षेत्र पर समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा, लेकिन 2017 में मोदी लहर के दौरान भाजपा के श्रीराम चौहान ने सपा का गढ़ तोड़ दिया। इसके बाद 2022 के चुनाव में भी भाजपा ने बढ़त बनाए रखी और गणेश चंद्र चौहान ने सुभासपा के अलगू प्रसाद को 10,553 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। इस चुनाव में कुल लगभग 4 लाख मतदाताओं में से 54% ने वोट डाले, जिसमें गणेश चंद्र चौहान को 38.50% वोट मिले, अलगू प्रसाद को 33.62% और बसपा के संतोष बेलदार को 18.82% वोट प्राप्त हुए। ये नतीजे साफ दिखाते हैं कि धनघटा की राजनीति में मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच ही रहता है, हालांकि बसपा और सुभासपा भी यहां सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
गणेश चंद्र चौहान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हैं, जो संत कबीर नगर जिले की धनघटा विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2022 के चुनाव में उन्होंने सुभासपा के अलगू प्रसाद को 10,553 वोटों से हराकर जीत हासिल की। राजनीति में आने से पहले वे सफाईकर्मी के रूप में काम कर चुके हैं और यहीं से उनका संघर्षपूर्ण सफर शुरू हुआ। उनका गांव खलीलाबाद में है और वे शिक्षा के क्षेत्र से भी जुड़े हुए हैं। उनकी सादगी का एक उदाहरण तब सामने आया जब उन्होंने अपने ही ड्राइवर की शादी में खुद कार चलाकर दूल्हे को विदा किया, जो सोशल मीडिया पर खूब चर्चित हुआ और लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता और बढ़ी। चुनाव आयोग के हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। सफाईकर्मी से विधायक बनने तक का उनका सफर आज क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है।
धनघटा विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में धनघटा विधानसभा क्षेत्र कई बुनियादी और विकास संबंधी समस्याओं से जूझता रहा है। किसानों के लिए सिंचाई और पानी की उपलब्धता बड़ी चिंता का विषय रही, वहीं सड़कें जर्जर होने और यातायात व्यवस्था की कमी ने ग्रामीण व शहरी दोनों इलाकों को प्रभावित किया। बिजली की असमय कटौती ने लोगों की दिक्कतें और बढ़ाईं। स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी कमजोर रही। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी आम रही। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की अधूरी सुविधाएं और शिक्षकों की कमी ने बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित किया। युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों की कमी लगातार चुनौती बनी रही। बरसात के बाद बाढ़ और जल निकासी की समस्या ने लोगों को परेशान किया, तो वहीं किसानों के लिए खाद, बीज और फसल की उचित कीमतें न मिल पाना एक बड़ी समस्या रही। इसके अलावा, साफ-सफाई, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सामंजस्य बनाए रखने की जरूरत भी महसूस की गई। ये सभी मुद्दे मिलकर धनघटा क्षेत्र की विकास दिशा और सामाजिक-आर्थिक हालात को तय करते रहे हैं।