धौलाना विधानसà¤à¤¾ सीट - Hapur
धौलाना |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री धर्मेश सिंह तोमर |
| जिला | Hapur |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | गाजियाबाद |
धौलाना विधानसभा सीट
धौलाना विधानसभा सीट (संसदीय क्षेत्र संख्या 58) उत्तर प्रदेश विधान सभा की 403 सीटों में से एक है। 2008 के परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई और यह हापुड़ जिले में स्थित है (जो पहले गाजियाबाद का हिस्सा था)। यह गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यह सीट शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का मिश्रण है, जिसमें पिलखुवा जैसे कस्बे और हापुड़ तथा गाजियाबाद तहसील के कई गाँव शामिल हैं।
जनसंख्या और जनगणना 2011
जिला: हापुड़ (पूर्व में गाजियाबाद)
विधानसभा संख्या: 58
जनसंख्या: 3.5 लाख
लिंगानुपात: 881/1,000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 72.93 %
मुस्लिम: 29%
अन्य: 1% से कम
दलित लगभग 14%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,79,063
विजेता: धर्मेश तोमर (भाजपा)
वोट शेयर: 44.8%
उपविजेता: असलम अली (सपा)
मतदान प्रतिशत: 67.7%
धौलाना विधानसभा सीट का गठन 2012 में परिसीमन के बाद हुआ और तभी से यह सीट यूपी की राजनीति में अहम बन गई। शुरुआत में यहां सपा और बसपा का दबदबा रहा। 2012 में सपा के धर्मेश सिंह तोमर और 2017 में बसपा के असलम चौधरी ने जीत दर्ज की। लेकिन 2022 में पहली बार भाजपा ने यह सीट अपने नाम की, जिससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखा गया। इस सीट की खास बात यह रही है कि यहां के मतदाता हर चुनाव में नया चेहरा चुनते हैं और 2022 में भी यही हुआ जब भाजपा के धर्मेश तोमर ने निर्णायक जीत हासिल की। सपा के असलम अली दूसरे नंबर पर रहे। मुस्लिम और दलित वोटर यहां के चुनावों में अहम भूमिका निभाते हैं, जिसकी वजह से पहले बसपा और सपा का असर ज्यादा दिखता था। लेकिन इस बार भाजपा ने जातीय समीकरणों को पीछे छोड़ते हुए मजबूत पकड़ बना ली। 2022 के चुनाव में धर्मेश तोमर को 44.65% मिले, जबकि असलम अली को 40.14% मिले। जीत का अंतर 12,628 वोट रहा और कुल मतदान प्रतिशत भी 44.65% के आसपास था।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
धर्मेश सिंह तोमर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं और फिलहाल धौलाना विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह एक किसान परिवार से आते हैं और कृषि के साथ-साथ पेंशनधारी के रूप में भी जाने जाते हैं। परंपरागत मूल्यों से जुड़े होने के साथ-साथ वह जमीनी स्तर पर सक्रिय नेता माने जाते हैं, जो खासतौर पर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को उठाते रहे हैं। वे 2012 में समाजवादी पार्टी से विधायक रह चुके हैं और 2022 में भाजपा के टिकट पर दोबारा जीत दर्ज की। जहां तक उनके आपराधिक रिकॉर्ड की बात है, तो चुनावी हलफनामे के मुताबिक उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
धौलाना विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच सालों में ढोलाना विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने कई गंभीर मुद्दों को लेकर नाराज़गी जताई है। सबसे बड़ी चिंता दलित समाज पर हो रहे अत्याचार और युवाओं की हत्या की घटनाएं रहीं, जिससे कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय पर सवाल उठे। महिलाओं और कमजोर वर्गों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर भी लोगों में असुरक्षा का माहौल बना रहा। बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, पानी, बिजली और सीवर की हालत खराब रही, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में लोग परेशान रहे। बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की कमजोर स्थिति भी युवाओं के लिए चिंता का विषय बनी रही। इसके साथ ही किसानों को गन्ने का बकाया, फसल की कीमत और सिंचाई से जुड़ी समस्याओं ने भी काफी चर्चा बटोरी। क्षेत्रीय असंतोष की एक और वजह यह रही कि ढोलाना गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र में आता है, जिससे लोगों को लगा कि हापुड़ जिले का कोई स्थानीय सांसद नहीं होने के कारण विकास कार्यों में उनकी उपेक्षा हो रही है।