दुद्‍धी विधानसभा सीट - Sonbhadra

दुद्‍धी

वर्तमान विधायक
विजय सिंह
जिला
Sonbhadra
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
समाजवादी पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
रॉबर्ट्सगंज
दुद्धी विधानसभा सीट
दुद्धी विधानसभा पूर्वी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की आदिवासी बहुल और वन-खनन क्षेत्र वाली अहम सीट है, जो विंध्य और छोटानागपुर पठार से सटे इलाके को कवर करती है। यह सीट घने जंगल, कोयला-खनन, सोन-रेणुक नदियों, उत्तर प्रदेश-झारखंड-छत्तीसगढ़ की नज़दीकी और बड़े बांध-परियोजनाओं से विस्थापन की कहानियों के कारण खास पहचान रखती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: सोनभद्र
विधानसभा क्रमांक: 403 (दुद्धी)
लोकसभा क्षेत्र: रॉबर्ट्सगंज
आरक्षण: अनुसूचित जनजाति (एसटी आरक्षित सीट)
अनुमानित आबादी: 4.25-4.30 लाख (2011)
साक्षरता दर: 65.58%
लिंग अनुपात: 940 के आसपास (प्रति 1000 पुरुष पर)
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (अनुमानित)
हिंदू: 85-90%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
दुद्धी सीट पर लंबे समय तक विजय सिंह जैसे स्थानीय प्रभावशाली नेता का वर्चस्व रहा, जिन्होंने अलग-अलग दलों (कांग्रेस, जनता दल, समाजवादी पार्टी, निर्दलीय) से चुनाव जीत कर व्यक्तिगत समीकरणों की ताकत दिखाई। 2000 के दशक के बाद बसपा, भाजपा और क्षेत्रीय-आदिवासी दलों ने यहां पैर जमाने की कोशिश की; 2012 में निर्दलीय और छोटी पार्टियों के उभार ने बहुकोणीय मुकाबले को बढ़ाया।
- 1980-1996 के बीच ज्यादातर चुनाव विजय सिंह के नाम रहे (कभी कांग्रेस, कभी जनता दल, कभी समाजवादी पार्टी, कभी निर्दलीय के रूप में)।
- 2002 में विजय सिंह (सपा), 2007 में बसपा के चंद्र मणि प्रसाद, 2012 में निर्दलीय रूबी प्रसाद, 2017 में हरिराम चेरो रहे।
- 2022 में भाजपा के रामदुलार गोंड, और 2024 के उपचुनाव में फिर सपा के विजय सिंह की जीत।
2022 चुनावी परिणाम (दुद्धी विधानसभा)
कुल मतदाता: 3,15,052
मतदान प्रतिशत: लगभग 64.9%
विजेता: रामदुलार गोंड, भाजपा
वोट शेयर (विजेता): लगभग 41.28%
उपविजेता: विजय सिंह गौड़ (सपा)
2024 उपचुनाव की ताज़ा तस्वीर:
विजेता: विजय सिंह (सपा)
वोट शेयर: लगभग 42.02%
उपविजेता: सरवन कुमार (भाजपा)
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
दुद्धी (एसटी), सोनभद्र सीट से वर्तमान विधायक विजय सिंह (समाजवादी पार्टी) हैं, जिन्होंने 2024 के उपचुनाव में जीत दर्ज की। इससे पहले 2017 में यहां से हरिराम विधायक चुने गए थे; उनके हलफनामे के अनुसार उन पर भारतीय दंड संहिता की सामान्य धाराओं जैसे मारपीट, अवरोध और बलवा से जुड़े कुछ आपराधिक मामले दर्ज थे, हालांकि कोई बड़ा आर्थिक अपराध या गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी धाराएं उल्लेखित नहीं थीं। उनके शपथपत्र में सीमित संपत्ति, देनदारियां और शैक्षिक विवरण भी दर्ज थे, जिससे वे एक जमीनी, स्थानीय आदिवासी नेता के रूप में सामने आते हैं। वहीं विजय सिंह के ताजा हलफनामे में दर्ज आपराधिक मामले, संपत्ति और शिक्षा संबंधी विस्तृत जानकारी निर्वाचन आयोग और एडीआर की वेबसाइट पर उपलब्ध है; समग्र रूप से उन्हें भी लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय, प्रभावशाली और आंदोलनों से जुड़े नेता के रूप में देखा जाता है।
दुद्धी विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
दुद्धी-रेणुक घाटी क्षेत्र की राजनीति मूलतः जमीन, जंगल और आजीविका के सवालों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। वनाधिकार कानून के तहत पट्टों, पुराने वनवासियों के दावों और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर लगातार टकराव होते रहे हैं, वहीं बांध, कोयला खनन और औद्योगिक परियोजनाओं से विस्थापित परिवार पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार की मांग को लेकर आंदोलित रहे हैं। खनन क्षेत्र में मजदूर सुरक्षा, ठेका कंपनियों द्वारा शोषण, प्रदूषण और जंगल कटान जैसे मुद्दों ने असंतोष को और गहरा किया है। बुनियादी ढांचे की कमी। टूटी सड़कें, दूर-दराज गांवों में स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों का अभाव आज भी बड़ी चुनौती है; कस्बाई क्षेत्र में साक्षरता बेहतर दिखती है, लेकिन ग्रामीण आदिवासी इलाकों की स्थिति कमजोर है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर उद्योग, तकनीकी शिक्षा और स्थायी रोजगार के अवसर कम होने से पलायन आम है। इसके साथ ही पेयजल संकट, फ्लोराइड प्रदूषण, बिजली आपूर्ति की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर अविश्वास भी यहां की सामाजिक-राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा बना हुआ है।

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