इटावा विधानसभा सीट - Etawah

इटावा

वर्तमान विधायक
श्रीमती सरिता भदौरिया
जिला
Etawah
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
इटावा
इटावा विधानसभा सीट
इटावा विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण विधान सभा सीट है। यह इटावा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और मुलायम सिंह यादव जैसे प्रमुख नेताओं से जुड़ाव के कारण राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस निर्वाचन क्षेत्र की आबादी शहरी और ग्रामीण दोनों प्रकार की है और यहां मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच कड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा होती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
स्थान: एटावा जिला
लोकसभा क्षेत्र: एटावा
जिला जनसंख्या: 1,581,810
लिंग अनुपात: 870/1000 पुरुष
साक्षरता दर: 78.41%
धार्मिक और सामाजिक संरचना
हिंदू: 74.07%
मुस्लिम: 23.25%
ईसाई: 0.04%
सिख: 0.07%
बौद्ध: 0.09%
जैन: 2.42%
अनुसूचित जाति (दलित): 18.67 %
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,44,356
विजेता: सरिता भदौरिया (भाजपा)
वोट शेयर: 40.2%
उपविजेता: सर्वेश शक्य (सपा)
मतदान प्रतिशत: 60.1%
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
सरिता भदौरिया भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक प्रमुख नेता हैं। वे वर्तमान में इटावा विधानसभा क्षेत्र से 18वीं उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य हैं। उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को हराकर भाजपा को इस क्षेत्र में सशक्त बनाया। सरिता भदौरिया ने कानपुर विश्वविद्यालय (सीएसजेएम यूनिवर्सिटी) से शिक्षा प्राप्त की है और वे एक समाजसेवी, कृषक एवं सक्रिय राजनेता हैं। उनका राजनीतिक सफर 1999 में कांग्रेस से शुरू हुआ, लेकिन 2000 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। वे भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (2010-2013), भाजपा उत्तर प्रदेश की उपाध्यक्ष (2013-2016) रह चुकी हैं और वर्तमान में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान की उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
एटावा विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में इटावा विधानसभा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा में रहे हैं। यह सीट ऐतिहासिक रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) का गढ़ रही है, लेकिन 2017 में भाजपा की सरिता भदौरिया ने जीत हासिल कर इस वर्चस्व को तोड़ा। क्षेत्र की जातीय संरचना ने सामाजिक समीकरणों को चुनावी राजनीति में निर्णायक बना दिया। विकास के मोर्चे पर, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी एक गंभीर मुद्दा बनी रही, खासकर यमुना नदी के आसपास के क्षेत्रों में विकास की धीमी गति को लेकर जनता में असंतोष देखा गया। इटावा लॉयन सफारी, जो क्षेत्रीय पर्यटन और रोजगार का केंद्र बन सकता था, उसकी स्थिति और संचालन को लेकर भी कई सवाल उठे। कृषि क्षेत्र, विशेषकर भरथना का चावल कारोबार, गिरावट की चपेट में आया और किसानों को बाजार, मूल्य और सिंचाई से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के सीमित अवसर और बढ़ते पलायन ने बेरोजगारी को प्रमुख मुद्दा बनाए रखा। साथ ही, राजनीतिक अस्थिरता, दलों के बदलते समीकरण और नए चेहरों के उभरने ने राजनीतिक परिदृश्य को लगातार प्रभावित किया।

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