फरीदपुर विधानसभा सीट - Bareilly

फरीदपुर

वर्तमान विधायक
डॉ. श्याम बिहारी लाल
जिला
Bareilly
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
आंवला
फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र
फरीदपुर उत्तर प्रदेश की विधानसभा क्षेत्र संख्या 122 है, जो बरेली जनपद में स्थित है। यह आंवला लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यह सीट 1957 में स्थापित की गई थी और 2008 में परिसीमन के बाद इसे अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित कर दिया गया। यह क्षेत्र फरीदपुर तहसील को कवर करता है, जिसमें ऐतिहासिक रूप से ज़री कारीगरी के लिए प्रसिद्ध फरीदपुर नगर भी शामिल है। इस सीट पर अब तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस जैसे प्रमुख दलों का प्रतिनिधित्व रहा है। वर्तमान में यह सीट भाजपा के डॉ. श्याम बिहारी लाल के पास है, जिन्हें 2022 में पुनः निर्वाचित किया गया।
जनसंख्या
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 122
जिला:  बरेली
लोकसभा क्षेत्र: आंवला
आरक्षण स्थिति : अनुसूचित जाति (SC)
जनसंख्या (2011): 69,700
पुरुष: 36,634
महिलाएं: 33,066
लिंग अनुपात: 903/1,000
साक्षरता दर: 54.5%
धार्मिक और सामुदायिक विभाजन (2011)
मुस्लिम: 50.62%
हिन्दू: 48.93%
अन्य: 1% से कम
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 3,63,673
विजेता: डॉ. श्याम बिहारी लाल (भाजपा)
वोट शेयर: 45.6%
उपविजेता: विजय पाल सिंह (सपा)
मतदान प्रतिशत: 62.0%
डॉ. श्याम बिहारी लाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और उत्तर प्रदेश की फरीदपुर विधानसभा सीट (संख्या 122, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित) से वर्तमान विधायक हैं। वे 2017 में पहली बार विधायक बने और 2022 में पुनः जीत दर्ज कर उस मिथक को तोड़ा कि इस सीट पर कोई भी प्रत्याशी लगातार दो बार नहीं जीतता। डॉ. लाल इतिहास में पीएचडी धारक हैं और एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली में प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति के प्रोफेसर रहे हैं। वे लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं और सामाजिक व शैक्षिक क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। चुनावी हलफनामे के अनुसार, डॉ. श्याम बिहारी के खिलाफ चार आपराधिक मामले दर्ज हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में स्थित है और आंवला लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसका गठन 1956 में 'DPACO (1956)' के तहत हुआ और पहला चुनाव 1957 में हुआ था। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और इसकी विधानसभा संख्या 122 है। फरीदपुर तहसील इस क्षेत्र में शामिल है। राजनीतिक रूप से यह सीट इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि कहा जाता है कि यहां जीतने वाली पार्टी अक्सर प्रदेश में सरकार बनाती है। 2022 में कुल मतदाताओं की संख्या 3,26,290 थी। क्षेत्र की सामाजिक संरचना में मुस्लिम (95,000), यादव (63,000), दलित (55,000), मौर्य (24,000), कश्यप (21,000), ब्राह्मण (16,000) और कुर्मी (14,000) जैसे समुदाय प्रमुख हैं। यहां कोई बड़ा उद्योग नहीं है और सड़क, बिजली व पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी एक अहम मुद्दा बना हुआ है। वर्तमान में क्षेत्र के विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल हैं, जो भारतीय जनता पार्टी से हैं और 2017 व 2022 में लगातार दो बार विजयी रहे। उनके खिलाफ किसी आपराधिक मामले या एफआईआर की जानकारी उपलब्ध नहीं है; बल्कि हाल के वर्षों में उनके साथ अभद्रता, जातिसूचक भाषा और जान से मारने की धमकी की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें संबंधित आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
फरीदपुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र ने बुनियादी सुविधाओं की गंभीर कमी का सामना किया, जिससे जनता में असंतोष और आक्रोश लगातार बना रहा। टूटी हुई सड़कों, लगातार बिजली कटौती और पीने के पानी की कमी जैसी समस्याओं ने आम लोगों को कई बार गंदे पानी में बैठकर प्रदर्शन करने तक को मजबूर कर दिया, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। बरसात के मौसम में जलनिकासी की खराब व्यवस्था के कारण जलभराव और बीमारियों का खतरा और बढ़ गया। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी दयनीय रही सरकारी स्कूलों में न तो पर्याप्त शिक्षक थे और न ही भवनों में मूलभूत सुविधाएं; वहीं स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी ने ग्रामीणों को इलाज के लिए दूर जाने पर मजबूर किया। किसानों को भी अपनी ज़मीन की सुरक्षा, सिंचाई, खाद-बीज, उचित मूल्य और आवारा पशुओं से फसल की रक्षा जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा, साथ ही भूमि विवाद और दबंगों की धमकियों जैसी घटनाएं बढ़ीं। कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठे, जिसमें पुलिस की निष्क्रियता स्पष्ट रूप से दिखी। राजनीतिक दृष्टि से, पिछले चुनावों में किए गए वादे जैसे सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार अधूरे रह गए, जिससे सत्तारुढ़ और विपक्षी दोनों दलों की नीयत पर सवाल उठे। बार-बार के प्रदर्शनों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका, जिससे क्षेत्र में सामाजिक असंतोष की भावना गहराई।

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