फर्रूखाबाद विधानसà¤à¤¾ सीट - Farrukhabad
फर्रूखाबाद |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | मेजर सुनील दत्त द्विवेदी |
| जिला | Farrukhabad |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | 2,07,704 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | फर्रूखाबाद |
फर्रुखाबाद विधानसभा
फर्रुखाबाद विधान सभा, फर्रुखाबाद जिले में स्थित एक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है। यह फर्रुखाबाद शहर को कवर करता है और फर्रुखाबाद लोकसभा सीट का एक प्रमुख हिस्सा है। फर्रुखाबाद विधानसभा का राजनीतिक इतिहास काफी विविध रहा है। यहां भाजपा, सपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच समय-समय पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। 1980 के दशक से ब्रह्मदत्त द्विवेदी (भाजपा) का इस सीट पर प्रभाव रहा, जिन्होंने कई बार जीत दर्ज की।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
कुल जनसंख्या: 18,85,204
पुरुष: 10,06,240
महिलाएं: 8,78,964
साक्षरता दर: 69.04%
लिंगानुपात: 896/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिन्दू: 84.67 %
मुस्लिम: 14.69 %
जैन: 0.03 %
ईसाई: 0.17 %
सिख: 0.17 %
बौद्ध: 0.17 %
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,07,704
विजेता: सुनील दत्त द्विवेदी (भाजपा)
वोट शेयर: 54.1%
उपविजेता: सुमन सक्य (सपा)
मतदान प्रतिशत: 56.1%
फर्रुखाबाद विधानसभा का राजनीतिक इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है, जहां भाजपा, सपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच समय-समय पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला। 1980 के दशक से इस सीट पर भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी का प्रभाव रहा, जिन्होंने कई बार जीत हासिल की। इसके बाद विजय सिंह (निर्दलीय/सपा) सहित अन्य नेताओं ने भी इस सीट पर कब्जा जमाया। 2000 के दशक में भी निर्दलीय और सपा उम्मीदवारों को सफलता मिली, लेकिन 2017 के बाद से भाजपा ने इस क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम रखा है। हाल के चुनावी रुझानों की बात करें तो 2017 और 2022 में भाजपा के मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने क्रमशः बसपा के मोहम्मद उमर खान और सपा की सुमन मौर्या को हराकर लगातार जीत दर्ज की। 2022 के चुनाव में 53.83% वोट शेयर के साथ बड़े अंतर से जीत हासिल की, जबकि सपा को 34.99% और बसपा तथा कांग्रेस को क्रमशः 7.96% और 0.98% वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रभाव भी बहुत सीमित रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ा है जबकि विपक्षी दलों की स्थिति कमजोर हुई है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
सुनील दत्त द्विवेदी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और फर्रुखाबाद विधानसभा क्षेत्र से दो बार निर्वाचित विधायक हैं, जिन्होंने 17वीं (2017-2022) और 18वीं (2022-2027) उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया है। वे पूर्व भाजपा विधायक एवं चर्चित नेता स्व. ब्रह्मदत्त द्विवेदी के पुत्र हैं। राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने 1990 से 1995 तक भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में सेवा की। पेशे से सलाहकार और सामाजिक कार्यकर्ता सुनील दत्त द्विवेदी को एक साफ-सुथरी छवि वाला जनप्रतिनिधि माना जाता है। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है, जिससे वे फर्रुखाबाद में एक लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित हैं।
फर्रुखाबाद विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में फर्रुखाबाद विधानसभा क्षेत्र में कई अहम मुद्दे प्रमुखता से सामने आए हैं। क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को लेकर जनता में निरंतर असंतोष रहा है, जिसे ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के नागरिकों ने बार-बार उठाया है। बेरोजगारी खासतौर पर युवाओं के लिए एक बड़ी समस्या बनी रही, क्योंकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण युवा पलायन को मजबूर हुए या अस्थायी नौकरियों पर निर्भर रहे। कानून-व्यवस्था, विशेष रूप से महिला सुरक्षा को लेकर भी जनता की चिंता बनी रही और अपराध तथा पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठते रहे। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी चर्चा का विषय रही, जहां सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में संसाधनों की कमी और कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने स्थिति को और खराब किया। कृषि पर निर्भर इस क्षेत्र में किसानों की समस्याएं जैसे सिंचाई सुविधा, फसल बीमा, मंडी व्यवस्था और समय पर भुगतान चुनावी विमर्श में लगातार बनी रहीं। सामाजिक और सांप्रदायिक समरसता को लेकर भी चिंताएं रही हैं, क्योंकि यह क्षेत्र सामाजिक रूप से विविध समुदायों से मिलकर बना है, जहां सभी वर्गों के बीच सौहार्द बनाए रखना स्थानीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहा है। इसके साथ ही, कई स्थानीय संगठनों और नागरिक समूहों ने इन मुद्दों को लेकर आंदोलन किए, लेकिन अक्सर उन्हें मुख्यधारा मीडिया में उचित स्थान नहीं मिला, जिससे आम जनता की आवाज़ को व्यापक मंच नहीं मिल पाया।