फाज़िलनगर विधानसà¤à¤¾ सीट - Kushinagar
फाज़िलनगर |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री सुरेन्द्र कुमार कुशवाहा |
| जिला | Kushinagar |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | देवरिया |
फाजिलनगर विधानसभा सीट
फाजिलनगर विधानसभा, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की एक महत्वपूर्ण सामान्य (अनारक्षित) सीट है। यह देवरिया लोकसभा क्षेत्र (विधानसभा क्रमांक 332) का हिस्सा है। यह कृषि प्रधान, सामाजिक रूप से विविध और ऐतिहासिक दृष्टि से पुरुष और महिला दोनों मतदाताओं की बड़ी भागीदारी वाली सीट है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: कुशीनगर
विधानसभा क्रमांक: 332
लोकसभा क्षेत्र: देवरिया
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: 3.6-3.7 लाख
साक्षरता दर: 66% (जिला)
लिंग अनुपात: 950/1000 (जिला)
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 80%
मुस्लिम: 18%
अन्य समुदाय: 2%
अनुसूचित जाति: 17-20%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,23,325
विजेता: सुरेंद्र कुशवाहा (भाजपा)
वोट शेयर: 52.0%
उपविजेता: स्वामी प्रसाद मौर्य (सपा)
मतदान प्रतिशत: 56.1%
फाजिलनगर विधानसभा सीट कुशीनगर जिले की प्रमुख और राजनीतिक रूप से सक्रिय सीटों में मानी जाती है, जहां का चुनावी इतिहास काफी दिलचस्प और बदलते समीकरणों से भरा रहा है। कभी इस सीट पर सपा के विश्वनाथ का लंबा दबदबा था, जिन्होंने छह बार जीत हासिल की, वहीं भाजपा के जगदीश मिश्रा (बाल्टी बाबा) और गंगा सिंह कुशवाहा ने भी यहां ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 2007 में सपा, 2012 और 2017 में भाजपा ने जीत हासिल की। खासकर 2017 में गंगा सिंह कुशवाहा ने सपा को 41 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था। 2022 में भाजपा ने गंगा सिंह की जगह उनके बेटे सुरेंद्र कुशवाहा को टिकट दिया, जबकि सपा की ओर से पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य मैदान में उतरे, जिन्होंने सीट बदलकर यहां से चुनाव लड़ा। मुकाबला हाईप्रोफाइल और चर्चित रहा, लेकिन भाजपा ने एक बार फिर जातीय समीकरण और मजबूत जमीनी संगठन के बूते 45 हजार से ज्यादा वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। लगभग 2.30 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में करीब 51.61% मतदान हुआ। भाजपा को 1.16 लाख वोट, सपा को 71 हजार और बसपा को 28 हजार से अधिक वोट मिले, जबकि कांग्रेस मुकाबले से लगभग बाहर रही। कुल मिलाकर, फाजिलनगर में भाजपा की पकड़ हाल के वर्षों में और मजबूत हुई है, हालांकि सपा और बसपा अभी भी मुकाबले में बनी हुई हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
सुरेंद्र कुमार कुशवाहा, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की फाजिलनगर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं, मूल रूप से शिक्षक रहे हैं और एक कॉलेज में भूगोल विषय पढ़ाते थे। राजनीति में उनका अनुभव सीमित था, लेकिन उनके पिता गंगा सिंह कुशवाहा इस सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं, जिससे उन्हें राजनीतिक विरासत जरूर मिली। 2022 के चुनाव में जब उनके पिता ने उम्र के चलते चुनाव न लड़ने का फैसला लिया, तो भाजपा ने सुरेंद्र को प्रत्याशी बनाया। पहली बार चुनाव लड़ते हुए उन्होंने सपा के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को 45,014 वोटों के बड़े अंतर से हराकर चौंका देने वाली जीत दर्ज की। सुरेंद्र कुशवाहा को एक ईमानदार, सादगी पसंद और शिक्षा से जुड़े जनप्रतिनिधि के रूप में जाना जाता है। विधायक बनने के बाद उन्होंने वेतन और भत्ते न लेने की घोषणा की और अब भी कॉलेज में पढ़ाना जारी रखा है। 2022 चुनावी हलफनामों के मुताबिक उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
फाजिलनगर विधानसभा : पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में फाजिलनगर विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी, किसानों की परेशानियां और बेरोजगारी जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे। जर्जर सड़कें, जलभराव, और बिजली कटौती जैसी समस्याओं से आम जनता बार-बार जूझती रही है। क्षेत्र की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन सिंचाई के लिए पानी की कमी, खाद-बीज की अनियमित आपूर्ति और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री में दिक्कतों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। खासकर गन्ना और धान की खरीद को लेकर सरकारी उदासीनता पर सवाल उठते रहे। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके बेहद सीमित हैं, जिससे बड़ी संख्या में पलायन हो रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है. सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी है और बेहतर इलाज के लिए लोगों को बाहर जाना पड़ता है। राजनीतिक लिहाज़ से भी क्षेत्र में असंतोष रहा, खासकर बाहरी उम्मीदवारों के चयन और बार-बार दल बदलने को लेकर। 2022 में जब स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़ सपा में आए तो राजनीतिक माहौल गर्माया, लेकिन जनता के असल मुद्दे जस के तस बने रहे। भाजपा, सपा और बसपा के त्रिकोणीय मुकाबले के बीच भी फाजिलनगर की जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं की ओर टकटकी लगाए बैठी है।