गरौठा विधानसà¤à¤¾ सीट - Jhansi
गरौठा |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | जवाहर लाल राजपूत |
| जिला | Jhansi |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | जालौन |
गरौठा विधानसभा सीट
गरौठा विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में स्थित है और जालौन लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसका विधानसभा क्रमांक 225 है। यह सीट गरौठा नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करती है। गरौठा का राजनीतिक इतिहास विविध रहा है कांग्रेस, सपा, बसपा और हाल के वर्षों में भाजपा यहां प्रभावी रही है।
जनसंख्या और जनगणना 2011
जिला: झांसी
विधानसभा क्रमांक: 225
लोकसभा क्षेत्र: जालौन
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: 2.5-3 लाख
साक्षरता दर: 66.09%
लिंग अनुपात: 890/1,000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (झाँसी जिला)
हिंदू: 91-92%
मुस्लिम: 6-7%
अन्य समुदाय: 1-2% से कम
अनुसूचित जाति: 24%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,33,205
विजेता: जवाहर लाल राजपूत (भाजपा)
वोट शेयर: 48.9%
उपविजेता: दीप नारायण सिंह (सपा)
मतदान प्रतिशत: 66.9%
गरौठा विधानसभा सीट झांसी जिले में है, जहां समाज की बनावट लोधी, राजपूत, पटेल, यादव, ब्राह्मण, ठाकुर, पाल और कुशवाहा जैसी कई जातियों के संतुलन पर टिकी है। यहां धर्म से ज्यादा जातीय समीकरण असर डालते हैं। राजनीतिक तौर पर इस सीट का सफर काफी दिलचस्प रहा है 1980 के दशक तक कांग्रेस का दबदबा था, खासकर रणजीत सिंह जूदेव की लगातार जीत के चलते। इसके बाद 1996 में समाजवादी पार्टी ने अपनी पकड़ बनाई, फिर बसपा और दोबारा सपा ने 2000 के दशक में जीत हासिल की। लेकिन 2017 से भाजपा ने मजबूती से कदम जमाए हैं। जवाहर राजपूत ने 2017 और 2022 दोनों चुनावों में सपा के दीप नारायण सिंह को हराया और 2022 में तो करीब 34 हजार वोटों के भारी अंतर से। उस साल कुल मतदान करीब 48% रहा। वहीं कांग्रेस और बसपा का ग्राफ तेजी से गिरा कांग्रेस को सिर्फ 1.4% और बसपा को 12.4% वोट मिले। कुल मिलाकर, गरौठा की राजनीति अब भाजपा के इर्द-गिर्द घूम रही है, जबकि पुराने दावेदार पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। यहां जातीय समीकरण अब भी चुनावी नतीजों पर गहरा असर डालते हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
जवाहर लाल राजपूत का जन्म 1 जनवरी 1963 को भरोसा मोंठ, झांसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ। वे लोधी जाति से हैं और हिंदू धर्म का पालन करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने स्नातकोत्तर और कानून (एल.एल.बी.) की पढ़ाई की है। पेशे से वे किसान हैं। वे विवाहित हैं, पत्नी का नाम श्रीमती मनोरमा है और उनके दो बेटे हैं। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़कर राजनीति में सक्रिय हुए और 2017 में पहली बार गरौठा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद 2022 में उन्होंने फिर से बड़ी जीत दर्ज की। उनकी खास रुचि कृषि, शिक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों में रही है। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
गरौठा विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में गरौठा विधानसभा क्षेत्र में कई अहम मुद्दे सामने आए, जिनमें सबसे प्रमुख सड़क और बुनियादी ढांचे का विकास रहा। लंबे समय से खराब सड़कों से जूझ रहे लोगों को अब काफी राहत मिली है क्योंकि अधिकतर सड़कें बनकर तैयार हो गई हैं। पेयजल की समस्या भी क्षेत्र में बड़ी चिंता रही, लेकिन 'हर घर नल' योजना के तहत अब ज्यादातर घरों तक साफ पानी पहुंचने लगा है। चूंकि यह क्षेत्र किसानों की बहुलता वाला है, इसलिए खेती-बाड़ी से जुड़े मुद्दे और फसल नुकसान पर मुआवजा व बीमा जैसी योजनाएं भी लोगों के लिए महत्वपूर्ण रहीं। विकास की दिशा में भी बड़ा कदम बढ़ा है जैसे डिफेंस कॉरिडोर, सोलर पार्क और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं क्षेत्र के लिए उम्मीद की किरण बनी हैं। इसके अलावा, मोंठ तालाब से अवैध कब्जा हटाने जैसे स्थानीय मुद्दों पर भी काम हुआ है। सामाजिक ढांचे की बात करें तो यहां जातीय संतुलन काफी अहम भूमिका निभाता है, और राजनीतिक रूप से भाजपा व सपा के बीच कड़ा मुकाबला रहा है। हालांकि कभी कांग्रेस का भी दबदबा था, पर अब मुकाबला इन्हीं दो दलों में सिमट गया है। कोविड के कारण विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी थी, लेकिन बाद में योजनाओं ने फिर गति पकड़ी। कुल मिलाकर, सड़क, पानी, खेती, विकास और सामाजिक समीकरण ही गरौठा क्षेत्र की असली तस्वीर रहे हैं।