गाजियाबाद विधानसà¤à¤¾ सीट - Ghaziabad
गाजियाबाद |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री संजीव शर्मा |
| जिला | Ghaziabad |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | गाजियाबाद |
गाज़ियाबाद विधानसभा सीट
गाज़ियाबाद विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में से एक है और गाज़ियाबाद ज़िले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह विधानसभा क्षेत्र संख्या 56 है। यह सीट गाज़ियाबाद शहर के कई प्रमुख शहरी वार्डों को कवर करती है, जिनमें आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्र दोनों शामिल हैं। पहली बार यहाँ चुनाव 1957 में हुआ था। गाज़ियाबाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का एक प्रमुख औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय केंद्र है, जिससे इसकी राजनीतिक और आर्थिक महत्ता बढ़ जाती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: गाज़ियाबाद
विधानसभा संख्या: 56
गाज़ियाबाद शहर की जनसंख्या: 4,681,645
आरक्षण: नहीं (सामान्य)
साक्षरता दर (2011): 78.07%
लिंगानुपात: 881/1,000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 72.93 %
मुस्लिम: 25.35 %
अन्य: 1% से कम
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,73,325
विजेता: अतुल गर्ग (भाजपा)
वोट शेयर: 61.9%
उपविजेता: सुरेंद्र कुमार मुन्नी (रालोद)
मतदान प्रतिशत: 59.7%
2024 उपचुनावी परिणाम
विजेता: संजीव शर्मा (भाजपा)
उपविजेता: सिंह राज जाटव (सपा)
गाज़ियाबाद विधानसभा सीट का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। यहां 1977 के बाद से भाजपा का दबदबा लगातार बढ़ा है और अब तक वह छह बार चुनाव जीत चुकी है। कांग्रेस को चार बार और बसपा को एक बार जीत मिली है। 2012 में बसपा के सुरेश बंसल ने दलित-मुस्लिम समीकरण के सहारे जीत दर्ज की थी, लेकिन 2017 और 2022 में भाजपा के अतुल गर्ग ने भारी अंतर से जीतकर इस सीट को पार्टी का मजबूत गढ़ बना दिया। इस इलाके में ब्राह्मण, वैश्य, दलित और मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर शहर वाले हिस्से में ब्राह्मण और वैश्य मतदाता ज़्यादा हैं, जबकि ‘लाइन पार’ इलाके में दलित और मुस्लिम आबादी अधिक है। अतुल गर्ग के लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद 2024 के उपचुनाव में भाजपा ने ब्राह्मण समुदाय से आने वाले संगठन से जुड़े नेता संजीव शर्मा को टिकट दिया और उन्होंने समाजवादी पार्टी के दलित उम्मीदवार सिंह राज जाटव को 69,351 वोटों के बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की। बसपा ने वैश्य समाज से परमानंद गर्ग को उतारा था, लेकिन उन्हें भी खास कामयाबी नहीं मिली। 2022 में भी भाजपा के अतुल गर्ग ने करीब 55% वोट हासिल कर सपा और बसपा को पीछे छोड़ दिया था। हाल के चुनावों में साफ है कि गाज़ियाबाद सीट पर भाजपा की पकड़ लगातार मज़बूत होती जा रही है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
संजीव शर्मा भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और फिलहाल गाज़ियाबाद विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने 2024 के उपचुनाव में भाजपा की ओर से चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत दर्ज कर 23 नवंबर 2024 को विधायक बने। वे साल 2007 से भाजपा से जुड़े हुए हैं और मुरली मनोहर जोशी के मार्गदर्शन में पार्टी में आए थे। पिछले 17 सालों से वे गाज़ियाबाद महानगर संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत करने में लगातार जुटे रहे हैं। एक समर्पित कार्यकर्ता और संगठन के रणनीतिकार के तौर पर उनकी पहचान रही है। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले संजीव शर्मा को भाजपा ने संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए 2024 के उपचुनाव में टिकट दिया और उन्होंने पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए शानदार जीत दर्ज की। चुनावी हलफनामे और सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ किसी भी तरह का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
गाज़ियाबाद विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
गाज़ियाबाद विधानसभा, जो दिल्ली-एनसीआर का हिस्सा है, बीते पांच सालों में तेज़ी से शहरीकरण के बावजूद कई बुनियादी समस्याओं से जूझती रही है। सड़कों की हालत, सीवर और जल निकासी की दिक्कतें, साफ पानी, बिजली और ट्रैफिक जाम जैसे मुद्दे लगातार लोगों के लिए परेशानी का कारण बने रहे। अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण की मांग भी जोर पकड़ती रही। तेजी से बढ़ते उद्योग और शहरी विकास के चलते प्रदूषण बड़ी चिंता बना रहा, जिससे लोगों की सेहत पर असर पड़ा। शहर में अपराध, छेड़छाड़ और जमीन कब्जे जैसी घटनाएँ बढ़ीं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई। दिल्ली से नजदीकी और आबादी बढ़ने के चलते ट्रैफिक और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की समस्या भी गंभीर रही। स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी स्कूलों की हालत पर भी सवाल उठते रहे, खासकर कोरोना काल में जब अस्पतालों में अव्यवस्था दिखी। गाजियाबाद में रोजगार के मौके सीमित रहे, जिससे स्थानीय युवा बेरोजगारी की मार झेलते रहे। साथ ही, अलग-अलग धर्मों और समुदायों की मौजूदगी के चलते सांप्रदायिक तनाव के छोटे-मोटे मामले भी समय-समय पर चर्चा में रहे।