घाटमपुर विधानसभा सीट - Kanpur Nagar

घाटमपुर

वर्तमान विधायक
सरोज कुरील
जिला
Kanpur Nagar
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
अपना दल (सोनेलाल)
कुल मतदाता
1,94,813
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
अकबरपुर
घाटमपुर विधानसभा सीट
घाटमपुर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले में स्थित है और यह अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। घाटमपुर क्षेत्र में शहरी और ग्रामीण दोनों तरह की आबादी शामिल है, जिसमें मुख्य रूप से किसान, मजदूर, ओबीसी और अनुसूचित जाति के मतदाता हैं. क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अनुसूचित जातियों की अच्छी-खासी आबादी है।
जनसंख्या (जनगणना 2011):
जिला: कानपुर नगर
विधानसभा क्रमांक: 218
लोकसभा क्षेत्र: अकबरपुर
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: 3.8 लाख
साक्षरता दर: 72-74%
लिंग अनुपात: 880/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 80%
मुस्लिम: 17%
अन्य समुदाय: लगभग 3%
अनुसूचित जाति: 23-25%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,94,813
विजेता: सरोज कुरील (अपना दल (सोनेलाल))
वोट शेयर: 42.0%
उपविजेता: भगवती सागर (सपा)
मतदान प्रतिशत: 60.8%
घाटमपुर विधानसभा सीट, जो अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है, पहले कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों का गढ़ रही है। 2002 और 2012 में समाजवादी पार्टी ने यहां जीत दर्ज की, जबकि 2007 में बसपा का कब्जा रहा। 2017 में पहली बार भाजपा की कमला रानी वरुण ने यह सीट जीतीं और मंत्री भी बनीं। उनके निधन के बाद 2020 के उपचुनाव में भाजपा के उपेंद्र नाथ पासवान ने जीत हासिल की। 2022 में भाजपा ने अपना दल (एस) के साथ मिलकर सरोज कुरील को मैदान में उतारा और उन्होंने सपा के भगवती सागर को करीब 14,000 वोटों से हराया। इस सीट पर दलित, ब्राह्मण, ओबीसी और मुस्लिम वोटरों का खास असर होता है। यहां के लोग आमतौर पर प्रादेशिक मुद्दों से ज्यादा स्थानीय समस्याओं और सामाजिक न्याय को ध्यान में रखकर वोट करते हैं। हाल के चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों ने लगातार अपनी पकड़ मजबूत की है, हालांकि सपा और बसपा के बीच मुकाबला अब भी टक्कर का बना हुआ है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
सरोज कुरील अपना दल (सोनेलाल) की नेता हैं और 2022 में पहली बार घाटमपुर विधानसभा सीट से विधायक बनीं। वे भाजपा, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी गठबंधन की संयुक्त प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ीं और जीत हासिल की। सरोज कुरील सामाजिक कामों में सक्रिय रही हैं और इलाके में सड़क, सामुदायिक भवन और दूसरी जरूरी सुविधाओं को लेकर काम करने के लिए जानी जाती हैं। चुनावी हलफनामे और
के मुताबिक उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
घाटमपुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच सालों में घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र में कई अहम मुद्दों ने राजनीति और जनता की चर्चा को प्रभावित किया। किसान बिल को लेकर यहां विरोध तेज रहा, क्योंकि यह इलाका किसानों का क्षेत्र माना जाता है। दलित समुदाय भी खासा नाराज नजर आया, खासकर हाथरस जैसी घटनाओं के बाद, जिससे सामाजिक न्याय का मुद्दा जोर पकड़ गया। बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर लोगों में असंतोष रहा, और विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर सवाल उठते रहे। राजनीतिक दलों में टिकट वितरण को लेकर भी खूब गुटबाजी और खींचतान देखने को मिली बीजेपी और कांग्रेस, दोनों में आंतरिक कलह नजर आई। 2020 में विधायक कमलरानी वरुण के निधन के बाद उपचुनाव हुआ, जो कोरोना महामारी के बीच हुआ और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े हुए। चुनाव के दौरान ईवीएम और वीवीपैट में खराबी, मतदान में देरी और छोटी-मोटी झड़पें भी सुर्खियों में रहीं। इन तमाम मुद्दों ने मिलकर घाटमपुर की राजनीति को बीते कुछ सालों में काफी प्रभावित किया।

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