घोरावल विधानसà¤à¤¾ सीट - Sonbhadra
घोरावल |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | डा0 अनिल कुमार मौर्य |
| जिला | Sonbhadra |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | 2,45,860 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | राबर्ट्सगंज |
घोरावल विधानसभा सीट
घोरावल विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित है। यह राबर्ट्सगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह विधानसभा क्षेत्र मुख्यतः शहरी और ग्रामीण मिश्रित है, जिसमें सामाजिक और आर्थिक रूप से विविध जनसंख्या रहती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: सोनभद्र
विधानसभा क्रमांक: 400
लोकसभा क्षेत्र: राबर्ट्सगंज (SC)
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: लगभग 3,50,000
साक्षरता दर: 64.03%
लिंग अनुपात: 919/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 75%
मुस्लिम: लगभग 23%
अन्य समुदाय: लगभग 2%
अनुसूचित जाति: लगभग 33%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,45,860
विजेता: डॉ. अनिल कुमार मौर्य (भाजपा)
वोट: 41.2%
उपविजेता: रमेश चंद्र दुबे (सपा)
मतदान प्रतिशत: 63.2%
घोरावल विधानसभा सीट का राजनीतिक सफर 2012 के परिसीमन के बाद शुरू हुआ और तब से यह सीट मुख्य रूप से सपा और भाजपा के बीच मुकाबले का केंद्र रही है। 2012 में पहला चुनाव समाजवादी पार्टी के रमेश चंद्र दुबे ने जीता था, जबकि बसपा के अनिल कुमार मौर्य दूसरे स्थान पर रहे। इसके बाद 2017 में भाजपा के अनिल कुमार मौर्य ने बड़ी जीत दर्ज कर सपा से यह सीट छीन ली और 2022 में उन्होंने एक बार फिर अपना वर्चस्व कायम रखते हुए सपा के रमेश चंद्र दुबे को पीछे छोड़ दिया। हाल के दो चुनावों में भाजपा की लगातार मजबूत स्थिति दिखी है, वहीं जातिगत समीकरण मौर्य, एससी/एसटी, ब्राह्मण, क्षत्रिय और मुस्लिम वोटरों के बीच बंटवारा साथ ही सड़क, बिजली और किसानों से जुड़े मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करते रहे। 2022 में भाजपा उम्मीदवार को 40% से अधिक वोट मिले और 23,922 वोटों के अंतर से उन्होंने जीत दर्ज की, जिससे साफ है कि पिछले एक दशक में घोरावल की राजनीति मुख्य रूप से भाजपा और सपा के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
डॉ. अनिल कुमार मौर्य घोरावल (सोनभद्र) विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं और क्षेत्र में एक शिक्षित एवं अनुभवी जनप्रतिनिधि माने जाते हैं। वाराणसी जिले में जन्मे 52 वर्षीय मौर्य डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं और उनकी आय का मुख्य स्रोत किराये की संपत्ति के साथ-साथ विधायक वेतन-भत्ता है। वे 2017 और 2022 दोनों ही चुनावों में भाजपा से विजयी रहे, जबकि इससे पहले वे बसपा के टिकट पर भी विधायक रह चुके हैं। राजनीतिक और सामाजिक रूप से सक्रिय मौर्य पर 2022 के शपथपत्र अनुसार एक आपराधिक मामला दर्ज है, जिसका विस्तृत विवरण सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। कुल मिलाकर, वे घोरावल क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले प्रभावशाली विधायक हैं।
घोरावल विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच सालों में घोरावल विधानसभा क्षेत्र की राजनीति और जनचर्चा जातीय समीकरण, विकास और रोज़मर्रा की ज़रूरतों के इर्द-गिर्द घूमती रही। कुशवाहा, ब्राह्मण, यादव, कुर्मी और मुस्लिम वोटरों के बीच जातीय गोलबंदी चुनावी राजनीति का अहम पहलू बनी रही, वहीं सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं पर लोगों ने सवाल भी उठाए और कुछ सुधारों की सराहना भी की। प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, मुफ्त राशन और शौचालय जैसी योजनाओं की पहुँच के साथ-साथ उनमें गड़बड़ियों पर भी चर्चा रही। किसानों के लिए सिंचाई, समर्थन मूल्य और ज़मीन से जुड़े विवाद बड़े मुद्दे बने, जबकि कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों ने पुलिस की चुस्ती और रविवार-बंदी की तारीफ़ भी की, लेकिन भ्रष्टाचार और स्थानीय नेताओं की भूमिका को लेकर असंतोष भी दिखा। कुल मिलाकर, घोरावल में बीते वर्षों में विकास कार्य, जातिगत समीकरण, प्रशासन की शैली और किसानों की समस्याएँ ही सबसे ज़्यादा चर्चा और मतभेद का कारण बने।