गोसाईगंज विधानसà¤à¤¾ सीट - Faizabad
गोसाईगंज |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | अभय सिंह |
| जिला | Faizabad |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | 2,39,551 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | अयोध्या |
गोसाईंगंज विधानसभा सीट
गोसाईंगंज विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में स्थित है और यह क्षेत्र की महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है। 2012 में परिसीमन के बाद इस सीट का गठन हुआ था। यह क्षेत्र गोसाईंगंज नगर पंचायत, आसपास के ग्रामीण इलाकों और पुराने बाजारों को शामिल करता है। गोसाईंगंज का ऐतिहासिक महत्व भी है, यहां का बाजार जिले के सबसे पुराने बाजारों में से एक है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: अयोध्या
गठन वर्ष : 2012 (परिसीमन के बाद)
कुल जनसंख्या: 12,931 (नगर पंचायत)
साक्षरता दर: 73.6%
धार्मिक और साम्प्रदायिक विभाजन
हिन्दू: 80%
मुस्लिम: 19%
जैन: 0.3%
ईसाई: 0.35%
सिख: 0.2%
बौद्ध: 0.2%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,39,551
विजेता: अभय सिंह (सपा)
वोट शेयर: 44.2%
उपविजेता: आरती तिवारी (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 60.9%
गोसाईंगंज विधानसभा सीट का गठन 2008 में परिसीमन के बाद हुआ और यहां पहला चुनाव 2012 में आयोजित किया गया। यह अयोध्या जिले की प्रमुख पांच विधानसभा सीटों में से एक है। 2012 में सपा के अभय सिंह ने जीत दर्ज की, लेकिन 2017 में भाजपा के बाहुबली नेता इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी ने अभय सिंह को हराकर सीट अपने नाम की। 2022 में अभय सिंह ने फिर वापसी करते हुए भाजपा की उम्मीदवार आरती तिवारी (खब्बू तिवारी की पत्नी) को पराजित किया। इस सीट पर बीते दो चुनावों से सपा और भाजपा के बाहुबली नेताओं के बीच सीधी टक्कर रही है, जबकि कांग्रेस और बसपा की भूमिका सीमित रही है। लगभग 3.75 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में दलित (75,000) और ब्राह्मण (65,000) प्रमुख जातियां हैं, साथ ही वर्मा, निषाद, वैश्य, ठाकुर, यादव, मुस्लिम और अन्य समुदाय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सवर्ण, दलित, ओबीसी और मुस्लिम मतदाताओं का समीकरण चुनाव परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित करता है। चुनावी रुझानों की बात करें तो सीट पर 2012 में सपा, 2017 में भाजपा और 2022 में पुनः सपा की जीत हुई है। स्थानीय विकास, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और जातीय ध्रुवीकरण जैसे मुद्दे यहां के चुनावी माहौल को दिशा देते हैं। 2022 के चुनाव में सपा के अभय सिंह को 44.2% मिले, भाजपा की आरती तिवारी को 38.45%, बसपा के राम सागर को 15.45% और कांग्रेस की शारदा जायसवाल को मात्र 0.55% वोट मिले।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
अभय सिंह समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में अयोध्या जिले की गोसाईंगंज विधानसभा सीट से विधायक हैं। मूल रूप से जौनपुर निवासी अभय सिंह पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के दूर के संबंधी माने जाते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से की थी, लेकिन बाद में सपा में शामिल होकर 2012 और फिर 2022 में विधायक चुने गए। पूर्वांचल के बाहुबली नेताओं में उनकी गिनती होती है और वे लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से उभरे हैं। उनका नाम माफिया-राजनेता मुख्तार अंसारी के करीबी के रूप में भी चर्चा में रहा है। अभय सिंह का नाम कई गंभीर आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है, जिनमें लखनऊ जेलर आरके तिवारी, विधायक कृष्णानंद राय और सीएमओ विनोद आर्या की हत्या से जुड़े मामलों में उनकी संलिप्तता की चर्चा रही, हालांकि किसी भी मामले में उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले और वे कानूनी रूप से आरोपमुक्त रहे। उनके खिलाफ करीब 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनमें से अधिकांश में वे बरी हो चुके हैं।
गोसाईंगंज विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में गोसाईंगंज विधानसभा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उभरकर सामने आए हैं। बेरोजगारी और स्थानीय उद्योगों की कमी के चलते युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित रहे, जिससे पलायन और स्वरोजगार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग जोर पकड़ती रही। क्षेत्र की सामाजिक संरचना में दलित, ब्राह्मण, वर्मा, निषाद, वैश्य, ठाकुर, यादव और मुस्लिम जैसे प्रमुख समुदायों की संख्या काफी है, जिससे जातीय समीकरण चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। सपा और भाजपा के बाहुबली नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने कानून-व्यवस्था को बार-बार चुनौती दी, खासकर 2022 चुनाव में अभय सिंह और आरती तिवारी के समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़पों के कारण। इसके अलावा, वनराजा, नट, कंकाली, धरकार जैसे वंचित समाजों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की मांग लगातार बनी रही। वहीं, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास कार्यों की धीमी गति भी क्षेत्र की जनता के लिए एक बड़ा मुद्दा रही।