गुन्नौर विधानसà¤à¤¾ सीट - Sambhal
गुन्नौर |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री रामखिलाड़ी सिंह |
| जिला | Sambhal |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बदायूँ |
गुन्नौर विधानसभा सीट
गुन्नौर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र भारत के उत्तर प्रदेश विधान सभा के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यह सम्भल जिले का एक हिस्सा है और बदायूं लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के पाँच विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1952 में हुआ था जब 1951 में 'डीपीएसीओ (1951)' (परिसीमन आदेश) पारित किया गया था। 2008 में 'संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश' पारित होने के बाद, निर्वाचन क्षेत्र को पहचान संख्या 111 दी गई। इसका नाम मखदूम शाह विलायत साहब के नाम पर रखा गया था, जो यहां रुकने के लिए एक शर्त पर तैयार हुए थे कि वनपुरी का नाम उनके आबाइनी कस्बे के नाम पर गुन्नौर रखा जाएगा.
जनसंख्या विभाजन (जनगणना 2011)
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 111
जनपद: संभल
लोकसभा क्षेत्र: बदायूं
कुल जनसंख्या (तहसील): 5,54,275
पुरुष: 2,97,404
महिला: 2,56,871
लिंगानुपात: 864/1000
साक्षरता दर: शहरी: 58.2%,
ग्रामीण: 46.1%
आरक्षण: सामान्य वर्ग
धार्मिक और साम्प्रदायिक आंकड़े (जनगणना 2011)
हिन्दू: 88.22%
मुस्लिम: 11.39%
अन्य: 0.39%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,38,691
विजेता: राम खिलाड़ी सिंह (सपा)
वोट शेयर: 51.9%
उपविजेता: अजीत कुमार (राजू यादव) (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 58.6%
गुन्नौर विधानसभा सीट, जो उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित है, राज्य की प्रमुख राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है और इसका राजनीतिक इतिहास समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रभाव से गहराई से जुड़ा रहा है। 2007 में मुलायम सिंह यादव ने यहां से चुनाव लड़कर भारी मतों से जीत हासिल की थी, जिससे गुन्नौर को सपा के मजबूत गढ़ के रूप में पहचान मिली। इसके बाद भी सपा का दबदबा बना रहा, हालांकि 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की, जब अजीत कुमार यादव (राजू यादव) ने सपा प्रत्याशी को हराया। लेकिन 2022 में सपा के राम खिलाड़ी सिंह ने निर्णायक जीत के साथ सीट पर फिर से कब्जा जमाया। चुनावी आंकड़ों से स्पष्ट है कि 2012 और 2022 में सपा ने बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की, जबकि 2017 में भाजपा ने सपा को टक्कर देते हुए जीत हासिल की थी। बसपा और कांग्रेस का प्रभाव इस सीट पर सीमित रहा है और वे मुख्य मुकाबले से अक्सर बाहर रही हैं। गुन्नौर की राजनीति मुख्य रूप से यादव और मुस्लिम मतदाताओं पर केंद्रित रही है, जिससे सपा को परंपरागत लाभ मिलता रहा है। हालांकि 2017 में भाजपा की जीत ने राजनीतिक समीकरणों में बदलाव लाया, 2022 में सपा ने अपनी पकड़ फिर से मजबूत कर ली। यहां चुनाव आमतौर पर सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला रहा है, जबकि स्थानीय विकास, कानून-व्यवस्था और जातीय समीकरण प्रमुख चुनावी मुद्दों के रूप में उभरते रहे हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
राम खिलाड़ी सिंह यादव समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उनका जन्म 4 मार्च 1960 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद स्थित घोंसली राजा गांव में हुआ था। अहीर (यादव) जाति से आने वाले राम खिलाड़ी सिंह स्नातक शिक्षित हैं और राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियों में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने 1991 में पहली बार विधायक का चुनाव जीता और इसके बाद 1996, 2012 तथा 2022 में भी विधानसभा पहुंचे। वे विभिन्न विधानसभा समितियों के सदस्य और सभापति रह चुके हैं तथा शिक्षा और सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। हालांकि, सितंबर 2016 में उनके खिलाफ पुलिसकर्मियों पर हमला, उन्हें बंधक बनाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप था कि अपहरण के एक मामले की जांच के दौरान पुलिसकर्मियों से मारपीट कर उन्हें घंटों तक घर में बंद रखा गया। इस मामले में आईपीसी की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ, हालांकि विधायक और उनके बेटे ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए आरोपों से इंकार किया। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर उन पर अवैध खनन को न रोकने के आरोप भी लगे हैं, लेकिन इन मामलों में उनके खिलाफ कोई औपचारिक आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है।
गुन्नौर विधानसभा : पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समस्याएं सामने आई हैं, जो स्थानीय जनता के लिए निरंतर चिंता का विषय बनी रही हैं। सबसे बड़ी समस्याओं में सिंचाई के पर्याप्त साधनों की कमी शामिल है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ और किसान परेशान रहे। बेरोजगारी भी एक गंभीर मुद्दा रहा है, जिसके चलते बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों और राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। बालू (रेत) के अवैध खनन और ओवरलोड ट्रकों की गतिविधियाँ भी क्षेत्र में लगातार बनी रहीं, जिससे पर्यावरणीय और प्रशासनिक चुनौतियाँ पैदा हुईं हालांकि प्रशासन द्वारा कार्रवाई भी की गई। कानून व्यवस्था को लेकर भी चिंता बनी रही, क्योंकि अपराध नियंत्रण के लिए प्रयासों के बावजूद घटनाएं पूरी तरह नहीं रुक सकीं। शिक्षा के क्षेत्र में गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों की बढ़ती संख्या और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं, जिन पर प्रशासन ने कुछ स्तर पर कार्रवाई की है। साथ ही, सड़क, स्वास्थ्य और अन्य आधारभूत सुविधाओं की कमी भी स्थानीय लोगों की प्राथमिक समस्याओं में शामिल रही है, जिन पर चुनावों में वादे तो किए गए, लेकिन ज़मीनी सुधार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका।