हैदरगढ़ विधानसà¤à¤¾ सीट - Barabanki
हैदरगढ़ |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | दिनेश रावत |
| जिला | Barabanki |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बाराबंकी |
हैदरगढ़ विधानसभा सीट
हैदरगढ़, उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीट संख्या 272 है, जो बाराबंकी ज़िले में स्थित है। यह हैदरगढ़ नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करती है। यह बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत पाँच विधानसभा सीटों में से एक है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिनेश रावत ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को हराया था।
जनसंख्या जानकारी
विधानसभा संख्या : 272
जिला: बाराबंकी
लोकसभा क्षेत्र: बाराबंकी
आरक्षण स्थिति : अनुसूचित जाति (SC)
कुल मतदाता (2022): 3,49,784
लिंगानुपात: 927/1,000
साक्षरता दर: 74.13%
धार्मिक एवं सामाजिक संरचना
हिंदू: 80–85% हिंदू
मुस्लिम: 13–18%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
विजेता: दिनेश रावत (भाजपा)
वोट शेयर: 51.5%
उपविजेता: राममगन रावत (सपा)
हैदरगढ़ विधानसभा सीट (बाराबंकी) का राजनीतिक इतिहास बेहद विविध और परिवर्तनशील रहा है, जहां कांग्रेस, भाजपा और सपा तीनों दलों को समय-समय पर जीत मिलती रही है। 2008 में हुए परिसीमन के बाद यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित कर दी गई, जिससे इसके राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आया। इससे पहले 2002 में भाजपा के राजनाथ सिंह यहां से विधायक चुने गए थे और मुख्यमंत्री बने थे। आरक्षण लागू होने के बाद 2012 में सपा के राममगन रावत ने जीत दर्ज की, लेकिन 2017 और 2022 में भाजपा ने क्रमशः बैजनाथ रावत और दिनेश रावत के नेतृत्व में लगातार दो चुनावों में सपा को हराया। ऐतिहासिक रूप से 1980 से 2007 के बीच यह सीट कांग्रेस, भाजपा और सपा के बीच बदलती रही 1980 में कांग्रेस, 1989-93 में भाजपा, 1996 में कांग्रेस, 2002 में भाजपा, 2007 और 2012 में सपा विजयी रही। सामाजिक दृष्टिकोण से यहां ब्राह्मण (20%), मुस्लिम (20%), दलित (14%), क्षत्रिय (14%), यादव-कुर्मी जैसे ओबीसी (प्रत्येक 9%) और अन्य समुदायों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति है। यही जातीय समूह विशेषकर दलित, मुस्लिम और ओबीसी यहां के चुनावी परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं। वर्तमान में भाजपा की पकड़ इस सीट पर मजबूत बनी हुई है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
दिनेश रावत, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और उत्तर प्रदेश की हैदरगढ़ (SC आरक्षित) विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया और उन्होंने समाजवादी पार्टी के राममगन रावत को हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। वे क्षेत्र में भाजपा के एक युवा, सक्रिय और जमीनी नेता के रूप में पहचाने जाते हैं, जो पार्टी और संगठनात्मक कार्यों में विशेष रूप से सक्रिय रहते हैं। उनकी सार्वजनिक छवि एक ऐसे विधायक की रही है जो विकास, कानून-व्यवस्था और जनसंपर्क को प्राथमिकता देते हैं, साथ ही सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं। उपलब्ध चुनावी हलफनामों के अनुसार, दिनेश रावत के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। हालांकि, सितंबर 2024 में एक मंदिर विवाद के दौरान उन पर यह आरोप लगाया गया कि वे घटनास्थल पर मौजूद थे और पुजारी की पिटाई के दौरान हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन उन्होंने इन आरोपों से स्पष्ट रूप से इनकार करते हुए कहा कि घटना उनके सामने नहीं हुई।
हैदरगढ़ विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की गंभीर समस्याएं सामने आईं, जिनमें जर्जर सड़कों, नालियों की सफाई की कमी और जलभराव ने लोगों को बार-बार परेशान किया। मुख्य बाजारों में ट्रैफिक जाम, पार्किंग की अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही ने व्यापारियों और नागरिकों दोनों को प्रभावित किया। शिक्षा व्यवस्था भी संकट में रही सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतें, शुद्ध पेयजल, साफ-सफाई और बिजली की कमी के साथ-साथ महिला शिक्षिकाओं की सुरक्षा एक प्रमुख चिंता बनी रही। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से पढ़ाई प्रभावित हुई। स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी कमजोर रही; ट्रॉमा सेंटर होते हुए भी वह केवल रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी महसूस की गई। बेरोजगारी खासकर युवाओं में एक प्रमुख मुद्दा रही, जिसे लंबे समय से बंद पड़ी सूत मिल और बुढ़वल चीनी मिल ने और भी गंभीर बना दिया। प्राकृतिक आपदाओं की बात करें तो हर साल सिरौलीगौसपुर, रामनगर और फतेहपुर तहसील के कई गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित होते हैं, जिससे फसल और जनजीवन दोनों प्रभावित होते हैं। महिला सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा रहा, विशेषकर दूरदराज के इलाकों में सुरक्षित आवागमन और स्कूलों में महिला शिक्षिकाओं की सुविधाजनक तैनाती की मांग उठती रही।