हण्डिया विधानसभा सीट - Allahabad

हण्डिया

वर्तमान विधायक
हाकिम लाल बिन्द
जिला
Allahabad
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
समाजवादी पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
भदोही
हण्डिया विधानसभा क्षेत्र चुनावी प्रोफाइल
हण्डिया विधानसभा क्षेत्र, प्रयागराज (इलाहाबाद) जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है, जो उत्तर प्रदेश विधान सभा का हिस्सा है। यह विधानसभा क्षेत्र भदोही लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है और ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। हंडिया विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण और शहरी दोनों प्रकार की आबादी शामिल है।
जनसंख्या वितरण
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 258
- कुल जनसंख्या (2011): 21,798
- लिंग अनुपात: 871/1000
- साक्षरता दर: कुल 61.1% (पुरुष 68.9%, महिला 52.5%)
- साक्षरता दर: 72.8% (पुरुष 81.6%, महिला 62.9%)
- अनुसूचित जाति: लगभग 3,010
धार्मिक और जातीय विभाजन
धार्मिक समुदाय:
- हिंदू: लगभग 85%
- मुस्लिम: लगभग 11%
- अन्य धर्म: लगभग 4%
जातीय समुदाय:
- यादव: लगभग 1,00,000 मतदाता
- ब्राह्मण: लगभग 60,000 मतदाता
- बिंद (पिछड़ा वर्ग): लगभग 70,000 मतदाता
- मुस्लिम: लगभग 90,000 मतदाता
- राजपूत: लगभग 40,000 मतदाता
- अन्य जातियां: बनिया, ठाकुर, कायस्थ आदि
राजनीतिक परिदृश्य
पिछले चुनाव परिणाम (2022)
- वर्तमान विधायक: हकीम लाल बिंद (समाजवादी पार्टी)
- उपविजेता: प्रशांत कुमार सिंह (निषाद पार्टी)
- मुख्य राजनीतिक दल: समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, निषाद पार्टी, भाजपा, कांग्रेस
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
हाकिम लाल बिंद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले की हंडिया विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। वे पहली बार 2017 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से चुनाव जीतकर विधायक बने थे, लेकिन 2021 में पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट होकर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। इसके बाद 2022 में सपा उम्मीदवार के रूप में भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी प्रशांत सिंह को हराकर दोबारा विधायक बने। चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
हंडिया विधानसभा के पिछले 5 साल
पिछले पांच वर्षों में हंडिया विधानसभा (प्रयागराज) क्षेत्र में कई अहम चुनावी और सामाजिक मुद्दे उभरकर सामने आए हैं। क्षेत्र मुख्यतः कृषि आधारित है, जहां सिंचाई की कमी, फसल की उचित कीमत न मिलना और कृषि सुविधाओं का अभाव प्रमुख समस्याएं रही हैं। बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, बिजली, जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी ने भी विकास में बाधा डाली है। शिक्षा की गुणवत्ता और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग लगातार उठती रही है। जातीय समीकरणों— विशेषकर यादव, ब्राह्मण, मुस्लिम और अन्य समुदायों की भागीदारी, का राजनीतिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण रहा है, जिससे सामाजिक समरसता और चुनावी रणनीतियाँ प्रभावित हुई हैं। कोविड-19 के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती को लेकर भी लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। राजनीतिक दृष्टि से समाजवादी पार्टी और बसपा के बीच कड़ी टक्कर रही है, जबकि भाजपा का प्रभाव अपेक्षा से कम रहा है।

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